जिस स्कूल को लेकर CJP का हुआ था विवाद, वहां किस हाल में पढ़ रहे बच्चे, पढे़ं ग्राउंड रिपोर्ट
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर के रामपुरा-कनकपुरा में स्कूल की बदहाल स्थिति सामने आई।
- जर्जर भवन बंद होने के बाद बाड़े में चल रही कक्षाएं।
- टीनशेड के नीचे गर्मी में पढ़ने को मजबूर हैं बच्चे।
- विधायक फंड से ₹12.50 लाख स्वीकृत, काम का इंतजार।
- द सूत्र की पड़ताल में सामने आई सरकारी दावों से अलग तस्वीर।
जयपुर के बगरू विधानसभा क्षेत्र के रामपुरा-कनकपुरा गांव में स्कूल को लेकर हुए विवाद के बाद द सूत्र की टीम ने मौके पर पहुंचकर पड़ताल की। टीम ने स्कूल बिल्डिंग, बच्चों की अस्थायी पढ़ने की जगह और वर्तमान हालात को करीब से देखा। मौके की तस्वीर सरकारी दावों से बेहद अलग नजर आई- जहां पहले प्राथमिक स्कूल चलता था,जर्जर होने के कारण उस इमारत को काफी वक्त पहले बंद किया जा चुका।
25 जुलाई 2025 को झालावाड़ में स्कूल का कमरा गिरने के बाद रामपुरा के इस जर्जर भवन को भी खाली करा दिया गया था। इसके बाद बच्चों की पढ़ाई बंद न हो, इसलिए पास के बाड़े में स्कूल चलाया जाने लगा।
द सूत्र की पड़ताल में स्कूल परिसर में सीमेंट और पत्थर जैसी निर्माण सामग्री भी मिली। इससे मरम्मत की तैयारी दिखाई देती है,लेकिन मौके पर कोई निर्माण कार्य चलता नहीं मिला।
नहीं हुआ कोई काम
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की यह हालत पिछले 2-3 साल से बनी हुई है। सत्य नारायण शर्मा के मुताबिक करीब डेढ़ साल से स्थिति खराब है और कई बार शिकायत के बावजूद अब तक काम शुरू नहीं हुआ। स्कूल के बाहर मरम्मत का सामान तो पड़ा है, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ।
उन्होंने बताया की जहां स्कूल चल रही है वह उनकी निजी सम्पति है। स्कूल की हालत खराब थे इसलिए उन्होंने अपनी निजी सम्पति को स्कूल संचालन के लिए दे दिया है। वे इसके लिए सरकार से कोई किराया नहीं लें रहे है।
स्कूल बिल्डिंग से निकलकर द सूत्र की टीम उस जगह पहुंची जहां फिलहाल बच्चों की पढ़ाई हो रही। करीब 150 गज के बाड़े में स्कूल चल रहा। यहां बच्चों के पढ़ने की जगह के साथ चारा भी रखा मिला।
बच्चे पास में बने टीनशेड के नीचे बैठकर पढ़ाई करते मिले। द सूत्र की टीम जब मौके पर पहुंची, उस समय तेज गर्मी और उमस थी। इसके बावजूद शिक्षक मौजूद थे और बच्चों को पढ़ा रहे थे, लेकिन पंखा नहीं होने की वजह से बच्चे गर्मी में परेशान नजर आए। समस्या यह है कि जिस जगह को स्कूल की अस्थायी व्यवस्था बनाया गया है, वह खुद बच्चों के लिए सामान्य कक्षा जैसी नहीं है।
बच्चे पास ही एक बाड़े (तबेले) में टीनशेड के नीचे पढ़ रहे, जहां चारा भी रखा जाता है। शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे, लेकिन सवाल यही है-जब स्कूल ही सुरक्षित नहीं, तो इन बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?
सर्दी, गर्मी और बारिश के बीच इसी व्यवस्था में पढ़ाई चल रही। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें बच्चों के लिए जल्द से जल्द सुरक्षित और पक्का स्कूल भवन चाहिए।
विवाद के बीच असली मुद्दा बच्चों की सुरक्षित पढ़ाई
इसी जर्जर स्कूल को लेकर शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के बीच विवाद हुआ था। CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका कुछ कार्यकर्ताओं के साथ स्कूल का दौरा करने पहुंचे थे। ग्रामीणों ने उन्हें गांव में घुसने से रोक दिया। इसके बाद दोनों पक्षों में पहले कहासुनी और फिर मारपीट तक हो गई।
CJP ने आरोप लगाया कि विरोध करने वाले भाजपा कार्यकर्ता थे। वहीं, ग्रामीणों ने इससे इनकार किया। उन्होंने कहा कि स्कूल के नाम पर सब लोग सियासत कर रहे और वैसा आगे नहीं होने देंगे और किसी भी बाहरी शख्स को स्कूल में घुसने की मंजूरी नहीं दी जाएगी और जरूरत पड़ी तो गांववाले खुद पैसा इकठ्ठा करके स्कूल बनाएंगे।
द सूत्र की ग्राउंड पड़ताल में विवाद से ज्यादा गंभीर तस्वीर स्कूल की सामने आई। एक तरफ जर्जर भवन बंद है, दूसरी तरफ बच्चे अस्थायी जगह पर पढ़ने को मजबूर हैं। गांव में इसी समस्या को लेकर लंबे समय से नाराजगी है।
ग्रामीणों के मुताबिक उन्होंने शिक्षा विभाग और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर तक शिकायत की है। अब स्थानीय विधायक कैलाश वर्मा की ओर से स्वतंत्रता दिवस पर विधायक फंड से 12 लाख 50 हजार रुपए की स्वीकृति मिलने की बात सामने आई है।
क्या कहा जिला शिक्षा अधिकारी ने
जिला शिक्षा अधिकारी गिर्राज पारीक ने भी कहा है कि स्कूल भवन का बजट पास हो चुका है और जल्द काम शुरू होगा। हालांकि काम कब शुरू होगा, इसकी तय तारीख नहीं बताई गई है।
द सूत्र की पड़ताल में फिलहाल सवाल यही है-बजट और निर्माण सामग्री दोनों मौजूद हैं, फिर बच्चों को पक्की छत कब मिलेगी?
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