राजस्थान के सीनियर IPS पर रेप का केस दर्ज, शादी का झांसा देकर ज्यादती का आरोप
News In Short
- आईजी मानवाधिकार किशन सहाय पर सरकारी आवास में दुष्कर्म और महिला को धमकाने का आरोप।
- पीड़िता ने डाक के जरिए भेजी थी शिकायत, 29 अप्रैल को मालवीय नगर थाने में दर्ज हुई एफआईआर।
- आईजी किशन सहाय मीणा ने आरोपों को नकारा और पुलिस से व्हाट्सएप चैट जांच की मांग की।
- पूर्व में अधिकारी का इतिहास धार्मिक ग्रंथों पर विवादित टिप्पणी और अन्य विवादों से भरा रहा है।
- किशन सहाय 2025 में झारखंड चुनाव ड्यूटी बिना बताए छोड़ने के आरोप में भी सस्पेंड हो चुके हैं।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान पुलिस की साख एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार आरोप किसी छोटे कर्मचारी पर नहीं, बल्कि मानवाधिकारों की रक्षा के लिए तैनात एक आईजी (IG) रैंक के अधिकारी पर लगे हैं। जयपुर के मालवीय नगर थाने में आईजी मानवाधिकार किशन सहाय मीणा के खिलाफ एक 53 वर्षीय महिला ने दुष्कर्म की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कराया है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जल्द ही पीड़िता के बयान लिए जाएंगे, और उन्हीं के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी आवास पर गुनाह का आरोप
पीड़िता ने अपनी शिकायत डाक के माध्यम से पुलिस को भेजी थी, जिसके बाद 29 अप्रैल को पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। महिला का आरोप है कि किशन सहाय ने उसे शादी का झांसा दिया और अपने सरकारी निवास पर बुलाकर उसके साथ जबरदस्ती की। आरोप यहीं खत्म नहीं होते; महिला ने बताया कि विरोध करने पर अधिकारी ने उसका मोबाइल छीनकर मारपीट की और पुलिस के पास न जाने की धमकी दी। पीड़िता के अनुसार, पिछले तीन महीनों से उसे वीडियो कॉल के जरिए डराया-धमकाया जा रहा था।
आईजी ने आरोपों को किया खारिज
दूसरी ओर, आईजी किशन सहाय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि वे एक गहरे षड्यंत्र का शिकार हुए हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपील की है कि उनके और महिला के बीच हुई चैट की गहराई से जांच की जाए, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
विवादों से रहा है पुराना नाता
किशन सहाय का करियर उपलब्धियों से ज्यादा विवादों के लिए जाना जाता है। IPS किशन सहाय मीणा राजस्थान कैडर के 2004 बैच के अफसर हैं। वे मूलत: राजस्थान के दौसा जिले के रहने वाले हैं। साल 2013 में आईपीएस बने थे। वे पहले भी कई बार चर्चा में रहे हैं:
6 महीने रहे एपीओ: अगस्त 2013 में इन्हें एसपी टोंक लगाया गया था, लेकिन 11 जनवरी 2014 को एसपी पद से हटाकर एसपी जीआरपी अजमेर लगाया गया। यहां किशन सहाय पूरे एक साल तक रहे। इसके बाद उन्हें सरकार ने एपीओ कर दिया था। करीब 6 महीने एपीओ रहने के बाद सरकार ने सहाय को सीआईडी सीबी में एसपी लगाया। 2023 में सहाय को ह्यूमन राइट्स में लगाया गया था।
धार्मिक विवाद (2024): करीब दो साल पहले उन्होंने ईश्वर और धर्मग्रंथों को कल्पना और भ्रम बताकर बड़ा विवाद खड़ा किया था।
झारखंड चुनाव विवाद (2025): पिछले साल उन्हें झारखंड चुनाव में ऑब्जर्वर लगाया गया था, लेकिन वे बिना सूचना के ड्यूटी छोड़कर जयपुर लौट आए, जिसके बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था।
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