नरेश मीणा की गिरफ्तारी पर 25 पैसे का इनाम, बारां पुलिस के इस अनोखे दांव की क्यों हो रही है चर्चा?
Jageshwar Prasad | Nov 07, 2026, 11:39 IST
फरार चल रहे नरेश मीणा की गिरफ्तारी के लिए महज 25 पैसे (चवन्नी) का सांकेतिक इनाम घोषित।
राजस्थान के बारां जिले में युवा नेता और भगत सिंह सेना प्रमुख नरेश मीणा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नाहरगढ़ वन विभाग के रेंज कार्यालय में तोड़फोड़ और वनकर्मियों से मारपीट के मामले में पुलिस को नरेश मीणा की तलाश है। बारां पुलिस ने उन पर महज 25 पैसे का इनाम घोषित किया है।
पुलिस की कई टीमें पिछले तीन दिनों से अलग-अलग जगह दबिश दे रही हैं, लेकिन अब तक नरेश मीणा का कोई पता नहीं चल पाया है।
वहीं, सिर्फ 25 पैसे का इनाम रखे जाने को लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर पुलिस ने इतनी छोटी रकम का इनाम क्यों रखा? इसके पीछे क्या मकसद है?
बता दें कि मीणा पिछले कुछ दिनों से किसानों की समस्याओं को लेकर आंदोलन कर रहे थे।
पुलिस के अनुसार इस इनाम का मकसद किसी को आर्थिक लालच देकर पकड़वाना नहीं है। पुलिस का मुख्य उद्देश्य आरोपी की छवि को छोटा और कमतर दिखाना है। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स रखने वाले नेता पर इतना छोटा इनाम रखना एक संदेश है कि कानून की नजर में हर व्यक्ति बराबर है।
पुलिस का तर्क है कि अपराधी अक्सर भारी इनाम को अपनी दहशत या रुतबे से जोड़कर देखने लगते हैं। इसी सोच को तोड़ने के लिए यह कदम उठाया गया है। बारां एसपी का साफ रुख है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और वनकर्मियों से मारपीट करने वाले किसी भी आरोपी के साथ नरमी नहीं बरती जाएगी, चाहे उसका राजनीतिक या सामाजिक दायरा कितना भी बड़ा हो।
सोर्स के अनुसार राजस्थान में भरतपुर पुलिस ने भी एक मोस्ट वांटेड अपराधी को सामाजिक रूप से नीचा दिखाने के लिए इसी तरह 25 पैसे का इनाम घोषित किया था। मध्य प्रदेश के इंदौर में भी 50 पैसे के इनाम का ऐसा मामला देखने को मिला था।
यह विवाद 1 नवंबर को शुरू हुआ था। नाहरगढ़ कस्बे में एक चुनावी सभा के बाद नरेश मीणा समर्थकों की भीड़ के साथ वन विभाग के रेंज कार्यालय पहुंचे। विभाग ने अवैध ट्यूबवेल का जनरेटर जब्त किया था। उसी कार्रवाई के विरोध में कार्यालय में तोड़फोड़ की गई और कर्मचारियों से हाथापाई हुई।
वन कर्मियों का आरोप है कि भीड़ जब्त किए गए सरकारी सामान और जनरेटर को जबरन छुड़ा ले गई। वन विभाग की रिपोर्ट पर अटरू और नाहरगढ़ थाने में राजकार्य में बाधा, सरकारी संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम (PDPP Act) और BNS की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
अटरू पुलिस उप अधीक्षक (DSP) रामानन्द यादव के नेतृत्व में विशेष टीमें नरेश मीणा की तलाश में जुटी हैं। पुलिस की टीमें नयागांव स्थित उनके पैतृक घर पर भी पहुंचीं, लेकिन वे वहां मौजूद नहीं मिले। शुक्रवार को पुलिस ने तीसरी बार बड़े स्तर पर विभिन्न ठिकानों पर दबिश दी।
इंटेलिजेंस और आसूचना तंत्र के इनपुट के आधार पर राजस्थान और आसपास के इलाकों में संभावित शरण स्थलों पर रेड मारी जा रही है। डीएसपी रामानन्द यादव ने चेतावनी दी कि वांछित व्यक्ति को शरण देने वाला भी कानूनी रूप से उतना ही बड़ा अपराधी माना जाएगा।
इस बीच नरेश मीणा सोशल मीडिया पर संदेश जारी कर रहे हैं। सोर्स के अनुसार उन्होंने एक पोस्ट में कहा था कि वे पुलिस के सामने सरेंडर करने के बजाय अब अदालत का सहारा लेंगे।
नरेश मीणा का नाम नवंबर 2024 के देवली-उनियारा उपचुनाव से भी जुड़ा है। उस दौरान उन्होंने मतदान केंद्र के बाहर एक एसडीएम को थप्पड़ मारा था। इसके बाद समरावता गांव में हिंसा हुई और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। इस संदर्भ से मौजूदा मामले की गंभीरता समझ में आती है, लेकिन उन पुराने मामलों में अदालत का फैसला अलग से देखना होगा।
वहीं, सिर्फ 25 पैसे का इनाम रखे जाने को लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर पुलिस ने इतनी छोटी रकम का इनाम क्यों रखा? इसके पीछे क्या मकसद है?
बता दें कि मीणा पिछले कुछ दिनों से किसानों की समस्याओं को लेकर आंदोलन कर रहे थे।
इनाम की रणनीति का मतलब
पुलिस का तर्क है कि अपराधी अक्सर भारी इनाम को अपनी दहशत या रुतबे से जोड़कर देखने लगते हैं। इसी सोच को तोड़ने के लिए यह कदम उठाया गया है। बारां एसपी का साफ रुख है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और वनकर्मियों से मारपीट करने वाले किसी भी आरोपी के साथ नरमी नहीं बरती जाएगी, चाहे उसका राजनीतिक या सामाजिक दायरा कितना भी बड़ा हो।
पहले भी हो चुकी है ऐसी कार्रवाई
नाहरगढ़ में क्या हुआ था?
वन कर्मियों का आरोप है कि भीड़ जब्त किए गए सरकारी सामान और जनरेटर को जबरन छुड़ा ले गई। वन विभाग की रिपोर्ट पर अटरू और नाहरगढ़ थाने में राजकार्य में बाधा, सरकारी संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम (PDPP Act) और BNS की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस की लगातार दबिश
इंटेलिजेंस और आसूचना तंत्र के इनपुट के आधार पर राजस्थान और आसपास के इलाकों में संभावित शरण स्थलों पर रेड मारी जा रही है। डीएसपी रामानन्द यादव ने चेतावनी दी कि वांछित व्यक्ति को शरण देने वाला भी कानूनी रूप से उतना ही बड़ा अपराधी माना जाएगा।
नरेश मीणा का सोशल मीडिया संदेश
पुराने मामलों का संदर्भ
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