बारां में खाद संकट को लेकर नरेश मीणा का आमरण अनशन, ओम बिरला और प्रमोद जैन भाया पर भी बरसे
Ashish Bhardwaj | Oct 03, 2026, 13:37 IST
नरेश मीणा का अनशन
राजस्थान के बारां जिले में खाद की कमी के विरोध में नरेश मीणा ने आमरण अनशन किया है। अनशन के दौरान हजारों किसान और समर्थक रैली में शामिल हुए। नरेश मीणा ने सरकारी तंत्र पर खाद की कालाबाजारी का आरोप लगाया। उन्होंने प्रशासन से खाद उपलब्ध कराने की मांग की और कड़े शब्दों में अधिकारियों को चेताया।
राजस्थान के बारां जिले में खाद की किल्लत को लेकर माहौल गरमा गया है। यूरिया और डीएपी की किल्लत के खिलाफ नरेश मीणा आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। उन्होंने शुक्रवार को बारां में अनशन की शुरुआत की। मीणा का कहना है कि जब तक किसानों की मांग पूरी नहीं होगी अनशन जारी रहेगा। उन्होंने सरकारी तंत्र पर खाद की कालाबाजारी कराने का आरोप लगाया।
अनशन पर बैठने से पहले नरेश मीणा ने एक विशाल रैली निकाली। वे झालावाड़ के कामखेड़ा बालाजी धाम से बारां तक पहुंचे। इस रैली में हजारों समर्थक मोटरसाइकिलों पर सवार होकर शामिल हुए। रैली में शामिल युवाओं के हाथों में झाड़ू नजर आई। युवाओं ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
जिले में रबी की फसलों की बुवाई का समय चल रहा है। इस समय किसानों को यूरिया और डीएपी की सबसे ज्यादा जरूरत है।आरोप है कि सरकारी समितियों पर खाद उपलब्ध नहीं है। दूसरी ओर खुले बाजार में खाद महंगे दामों पर बेची जा रही है। इससे आम किसान दर-दर भटकने को मजबूर है।
नरेश मीणा ने किसानों का दर्द साझा करते हुए व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 50 बीघा जमीन वाले किसान को 25 कट्टे खाद चाहिए। लेकिन समिति से केवल 5 कट्टे खाद ही दिए जा रहे हैं। इतने कम खाद में किसान अपनी फसल कैसे बचाएगा? उन्होंने अनशन स्थल पर मौजूद किसानों से एक अपील भी की। उन्होंने कहा कि कहीं खाद मिले तो किसान पहले खाद लेने जाएं।
नरेश मीणा ने खाद संकट के लिए बड़े नेताओं को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर सीधे आरोप लगाए। इसके साथ ही पूर्व मंत्री और अंता विधायक प्रमोद जैन भाया को भी घेरा। उन्होंने कहा कि इन नेताओं की अनदेखी से किसान परेशान हैं।अनशन स्थल पर पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा भी समर्थन देने पहुंचे। गुढ़ा ने अधिकारियों को आड़े हाथों लिया और कड़े शब्द कहे। गुढ़ा ने कहा कि एसपी और कलेक्टर जनता के नौकर हैं। वे खुद को राजा न समझें क्योंकि उनकी तनख्वाह जनता के टैक्स से आती है।
नरेश मीणा ने राजनीतिक कदम उठाने का संकेत भी दिया है। उन्होंने आगामी पंचायत चुनावों में थर्ड फ्रंट बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि थर्ड फ्रंट के तहत प्रत्याशी मैदान में उतारे जाएंगे। अटरू प्रधान वंदना नागर और रामेश्वर नागर ने भी मीणा को समर्थन दिया।फिलहाल जिला प्रशासन ने किसानों को खाद उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। लेकिन किसान और नरेश मीणा ठोस कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं।
बाइक रैली के साथ पहुंचे बारां
खाद की कमी और कालाबाजारी
जरूरत 25 कट्टों की और मिल रहे 5
नेताओं पर साधा तीखा निशाना
पंचायत चुनाव में थर्ड फ्रंट का ऐलान
अधिकारियों की खींचतान में फंसी मध्यप्रदेश की 237 पर्यावरण मंजूरियां, अब सिया बैठक में होगा फैसला!
By Amresh Kushwaha
कोटा में गर्भवती महिलाओं की मौत का मामला: चार जांच कमेटियों ने दी क्लीनचिट, निलंबित तीन डॉक्टर हुए बहाल
By Jageshwar prasad
पुलिसकर्मी को ही निवेश के नाम पर 16 लाख का चूना, 20 प्रतिशत कमीशन का दिया था लालच
By Ashish Bhardwaj
राजस्थान के विश्वविद्यालयों में मानद उपाधियों के वितरण पर उठे सवाल, 14 विश्वविद्यालयों ने नहीं दी एक भी डिग्री
By Jyoti Mahender Bhardwaj
रायपुर हत्याकांड: महिला के नाखूनों के DNA से आरोपियों तक पहुंची पुलिस, ऐसे बेनकाब हुए तीनों कातिल
By Harrison Masih
त्योहारों के मौसम में हवाई टिकटों की कीमतें बढ़ीं, बेंगलुरु से जयपुर का किराया 27 हजार तक पहुंचा
By Ashish Bhardwaj
इंदौर के 1.36 लाख वोटरों के नाम SIR में कटे, चुनाव आयोग के पास डिजिटल डेटा नहीं, RTI से खुली पोल
By Amresh Kushwaha