राजस्थान निकाय चुनाव में कांग्रेस की क्रॉस वोटिंग जांच, सीपी जोशी की अध्यक्षता में कमेटी गठित
Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 03, 2026, 11:47 IST
राजस्थान निकाय चुनाव में क्रॉस वोटिंग पर कांग्रेस सख्त
राजस्थान के निकाय चुनावों में कांग्रेस द्वारा क्रॉस वोटिंग के गंभीर आरोप लगे हैं। इस स्थिति का सामना करने के लिए पार्टी ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी की अगुवाई में एक जांच समिति का गठन किया है। समिति को संबंधित निकायों के मामलों की गहरी जांच कर कार्रवाई करने की सिफारिश करने का कार्य सौंपा गया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग के आरोपों पर जांच तेज कर दी है
- 346 पार्षदों को कार्रवाई के दायरे में रखने की जानकारी सामने आई
- सीपी जोशी की अध्यक्षता वाली कमेटी सात दिन में रिपोर्ट देगी
- कई निकायों में संख्या बल के बावजूद बदले चुनावी नतीजे
- गुप्त मतदान के बीच क्रॉस वोटिंग के आरोपों की होगी जांच
पार्टी के अनुसार, निकाय चुनाव के दौरान कई जगह कांग्रेस के पास संख्या बल होने के बावजूद पार्टी प्रत्याशी चुनाव हार गए। इसके बाद क्रॉस वोटिंग और फ्लोर मैनेजमेंट को लेकर सवाल उठे। पाली, अजमेर, जोधपुर और बीकानेर समेत कई निकायों के नतीजों के बाद पार्टी ने स्थानीय स्तर पर रिपोर्ट मांगी है।
346 पार्षदों पर कार्रवाई की तैयारी
सीपी जोशी की अध्यक्षता में कमेटी
कई निकायों में संख्या बल के बावजूद बदले नतीजे
बीकानेर में भी कांग्रेस के पास 41 पार्षद थे, जबकि भाजपा के 27 पार्षद थे। इसके बावजूद उपमहापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को 40 और कांग्रेस प्रत्याशी को 38 वोट मिले। एक वोट अमान्य रहा और एक NOTA को गया। इसके बाद कांग्रेस ने मामले की जांच की मांग की।
अजमेर और जोधपुर में भी उठे सवाल
जोधपुर में भी कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला बेहद करीबी था। महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को 53 और कांग्रेस प्रत्याशी को 47 वोट मिले। चुनाव से पहले कांग्रेस के पास 44 पार्षद थे।
भीलवाड़ा में सिंबल जमा नहीं होने का मामला
कांग्रेस से जुड़े नेताओं के अनुसार इस मामले में प्रदेश स्तर के बजाय राष्ट्रीय स्तर से कार्रवाई किए जाने की संभावना है। इस दावे पर अंतिम निर्णय पार्टी की ओर से किया जाना बाकी है।
400 पार्षदों के दावे की भी जांच होगी
अब रिपोर्ट के बाद तय होगी कार्रवाई
निकाय चुनाव में क्रॉस वोटिंग के आरोपों को लेकर कांग्रेस की यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी ने कई जगह अपने संख्याबल के आधार पर बोर्ड बनाने की उम्मीद की थी, लेकिन नतीजे अलग रहे। अब सात दिन में आने वाली कमेटी की रिपोर्ट से पार्टी के भीतर कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो सकती है।
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