राजस्थान के विश्वविद्यालयों में मानद उपाधियों के वितरण पर उठे सवाल, 14 विश्वविद्यालयों ने नहीं दी एक भी डिग्री
Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 03, 2026, 12:53 IST
कमेटी से कुलाधिपति तक मंजूरी, फिर भी पारदर्शिता पर सवाल
राजस्थान के 12 विश्वविद्यालयों ने पिछले तीन वर्षों में 52 मानद उपाधियाँ प्रदान की हैं, जबकि 14 विश्वविद्यालयों ने ऐसा कोई कार्य नहीं किया। ये उपाधियाँ उन विशिष्ट व्यक्तियों को दी जाती हैं जिन्होंने अपने क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान किया है। मानद उपाधियों का वितरण स्टैंडिंग कमेटी की स्वीकृति और कुलाधिपति की मंजूरी के बाद ही होता है।
समझें क्या है पूरा मामला
- तीन साल में 12 विश्वविद्यालयों ने 52 लोगों को मानद उपाधि दी
- 14 विश्वविद्यालयों ने तीन साल में किसी को मानद डिग्री नहीं दी
- मानद उपाधि देने की प्रक्रिया और नियमों पर उठे सवाल
- कमेटी से कुलाधिपति तक मंजूरी, फिर भी पारदर्शिता पर सवाल
- मानद डिग्री के लिए एक समान नियम बनाने की मांग
मानद उपाधि आमतौर पर ऐसे लोगों को दी जाती है, जिन्होंने शिक्षा, ज्ञान, शोध, कला, समाजसेवा या किसी अन्य क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। विश्वविद्यालयों के एक्ट में इसके लिए प्रक्रिया भी निर्धारित है।
मानद उपाधि देने के लिए तय है प्रक्रिया
नियमों के अनुसार मानद उपाधि का प्रस्ताव पहले संबंधित कमेटी की प्रक्रिया से गुजरता है। इसके बाद इसे सिंडिकेट से मंजूरी, सीनेट से स्वीकृति और अंत में कुलाधिपति से अनुमोदन मिलना जरूरी होता है।
इन 12 विश्वविद्यालयों ने दी मानद उपाधियां
इसके अलावा संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर ने 7, आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर ने 2, कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर ने 5, कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर ने 1, कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर ने 1, तकनीकी विश्वविद्यालय बीकानेर ने 6 और स्वास्थ्य विश्वविद्यालय जयपुर ने 9 लोगों को मानद उपाधियां दीं। इन सभी विश्वविद्यालयों को मिलाकर पिछले तीन वर्षों में कुल 52 लोगों को मानद उपाधियां दी गईं।
14 विश्वविद्यालयों ने नहीं दी मानद उपाधि
नियमों की समीक्षा की मांग
ऐसे में मांग उठ रही है कि मानद उपाधि देने के लिए सभी विश्वविद्यालयों में स्पष्ट और एक समान दिशा-निर्देश लागू किए जाएं, ताकि चयन प्रक्रिया पारदर्शी रहे और केवल उल्लेखनीय योगदान वाले व्यक्तियों को ही यह सम्मान दिया जाए।
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