इस्तीफे से नहीं, सिस्टम बदलने से होगा सुधार, RAS पंकज ओझा की पोस्ट से हलचल

Ashish Bhardwaj | Jul 22, 2026, 13:34 IST
RAS पंकज ओझा की पोस्ट
भर्ती परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक को लेकर राजस्थान के आरएएस अधिकारी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की है। इसमें अधिकारी ने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से नहीं, सिस्टम बदलने से सुधार होगा।

ऐसे समझें पूरा मामला

  • भर्ती परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक को लेकर आरएएस पंकज ओझा की पोस्ट।
  • ओझा ने लिखा कि समस्या में सुधार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से नहीं, सिस्टम बदलने से होगा।
  • अधिकारी ने लिखा कि बच्चों के विरोध प्रदर्शन को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए।
  • ओझा ने बताया कि जब वे आरएएस बने, तब भी इसी तरह पेपर आउट हुए थे।

Jaipur: राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक अधिकारी की फेसबुक पोस्ट जबरदस्त चर्चा में है। यह पोस्ट राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के अधिकारी पंकज ओझा की है।



प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही धांधली, पेपर लीक और छात्रों के भविष्य को लेकर लिखी गई उनकी यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है।



इस संवेदनशील मुद्दे पर एक सेवारत अधिकारी की टिप्पणी के बाद यह बहस छिड़ गई है कि क्या यह सरकार के खिलाफ असंतोष है या फिर एक चिंतित पिता की वास्तविक पुकार?



​क्या लिखा है पोस्ट में?

​सीनियर आरएएस अधिकारी ओझा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में हालिया आंदोलनों और छात्रों की पीड़ा का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा कि बच्चों के विरोध प्रदर्शन को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। वे ही हमारे देश का भविष्य हैं।



उन्होंने लिखा, हमारे बच्चे बहुत सीधे हैं, विचारों को तो सही ढंग से अपनी मांग रखनी भी नहीं आती। वे सिर्फ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से संतुष्ट होना चाहते हैं, जबकि इससे कोई स्थायी समाधान नहीं निकलेगा... कोई और आएगा और स्थिति फिर वैठी ही बनी रहेगी।



अपनी पुरानी यादों को साझा करते हुए ओझा ने खुलासा किया कि जब वे खुद आरएएस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, तब भी इसी तरह पेपर आउट हुए थे। उनकी दो साल की कड़ी मेहनत पर पानी फिर गया था। उस समय वे एक प्रतिनिधिमंडल के रूप में तत्कालीन आरपीएससी अध्यक्ष से मिले भी थे।



​कड़े कानूनों और त्वरित न्याय की मांग

​पंकज ओझा ने अपनी पोस्ट के जरिए व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव और कड़े नियमों की वकालत की है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:



​फूलप्रूफ सिस्टम: एक ऐसा अभेद्य सिस्टम बनाया जाए, जिससे भविष्य में कभी कोई पेपर लीक न हो सके।



​7 दिन में फांसी की सजा: पेपर लीक या धांधली करने वालों और इसमें शामिल सभी दोषियों को 7 दिनों के भीतर फांसी की सजा दी जाए।



​पीड़ित परिवारों को राहत: मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले बच्चों के परिजनों को आर्थिक सहायता और उनके घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।



​प्रतिभा का सही मूल्यांकन: बच्चों की मेहनत बेकार न जाए, उनके टैलेंट का सही मूल्यांकन हो ताकि वे देश के निर्माण में योगदान दे सकें।



​एक पिता का दर्द या सरकार विरोधी सुर?

​इस पोस्ट के वायरल होते ही प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि एक सेवारत अधिकारी सार्वजनिक मंच पर ऐसी टिप्पणी कैसे कर सकता है।



आलोचकों और जानकारों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह पोस्ट सरकारी व्यवस्था और नीतियों के खिलाफ सीधा सवाल है?



​हालांकि, इस तरह की किसी भी प्रशासनिक या राजनीतिक कंट्रोवर्सी से बचने के लिए ओझा ने अपनी पोस्ट के अंत में एक भावुक डिस्क्लेमर भी जोड़ा है।



​डिस्क्लेमर में उन्होंने लिखा कि इस पोस्ट का न तो किसी राजनीतिक पार्टी से संबंध है और न ही किसी विरोध से। इसका सीधा संबंध मेरी छोटी प्यारी सी बेटी से है, जो इन सब घटनाओं से बेहद आहत और चिंतित है। इसका संबंध उस बाप से है, जो अपनी बेटी को अपनी जान से भी ज्यादा चाहता है।



RAS पंकज ओझा


​भविष्य के भारत का सपना

​अपनी बात को समाप्त करते हुए उन्होंने लिखा कि हमें अपने बच्चों को सड़कों पर प्रदर्शन करते हुए नहीं, बल्कि आसमान की उन ऊंचाइयों तक पहुंचाना है, जहां से वे अपनी प्रतिभा से पूरे जग को रोशन कर सकें।



​फिलहाल, ओझा की इस पोस्ट को एक तरफ जहां प्रतियोगी परीक्षार्थियों का समर्थन मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और राजनीतिक खेमे में इसके दूरगामी असर को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।



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