राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले MLA भाटी का EWS दांव, क्या हैं इसके सियासी मायने?

Saurabh Mishra | Sept 26, 2026, 17:32 IST
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पंचायत चुनाव से पहले भाटी ने EWS सरलीकरण यात्रा शुरू की
पंचायत चुनाव से पहले भाटी ने EWS सरलीकरण यात्रा शुरू की

राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले निर्दलीय विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने EWS सरलीकरण यात्रा शुरू की है। जमीन, सर्टिफिकेट और राजनीतिक प्रतिनिधित्व समेत कई मांगें उठाई हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • पंचायत चुनाव से पहले भाटी ने EWS सरलीकरण यात्रा शुरू की।
  • EWS पात्रता में जमीन के मौजूदा नियम बदलने की मांग उठाई।
  • सर्टिफिकेट की वैधता तीन से पांच साल करने की मांग की।
  • भाटी के मुताबिक 75 से ज्यादा विधायकों ने समर्थन दिया।
  • पंचायती राज संस्थाओं में EWS प्रतिनिधित्व की मांग भी उठाई।
राजस्थान में निकाय चुनाव खत्म होते ही अब सियासत गांवों की तरफ बढ़ने लगी। शिव से निर्दलीय विधायक रवींद्र सिंह भाटी EWS आरक्षण के नियमों में सरलीकरण की मांग लेकर सड़क पर उतर गए। 25 सितंबर से बाड़मेर से शुरू हुई उनकी 5 दिन की 'सरलीकरण यात्रा' पश्चिमी राजस्थान के अलग-अलग इलाकों से होते हुए जोधपुर पहुंचेगी।

विधायक भाटी जमीन की सीमा, EWS सर्टिफिकेट की वैधता, केंद्र और राज्य में अलग-अलग नियम, प्रतियोगी परीक्षाओं में छूट और पंचायती राज संस्थाओं में ईडब्ल्यूएस प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे उठा रहे।

निर्दलीय विधायक रवींद्र भाटी ने शुरू की EWS सरलीकरण यात्रा

विधायक भाटी की EWS आरक्षण में सुधार की इस यात्रा का समय भी अहम है। राजस्थान में निकाय चुनाव के नतीजे हाल ही में आए हैं, जिसमें 2273 निर्दलीय पार्षद जीते हैं। अब अगला बड़ा चुनाव पंचायती राज संस्थाओं का है। ऐसे में खुद निर्दलीय विधायक भाटी EWS जैसा मुद्दा लेकर गांवों में लोगों के बीच पहुंच रहे। हालांकि निकाय और पंचायत चुनाव के मुद्दे और समीकरण अलग होते हैं, इसलिए इसका चुनावी असर क्या होगा, यह अभी तय नहीं। फिलहाल इतना जरूर है कि भाटी ने EWS की मांग को सरकारी फाइलों और ज्ञापनों से निकालकर सड़क पर बहस का मुद्दा बना दिया।

बाड़मेर से निकली यात्रा, निशाने पर EWS के नियम

भाटी की यात्रा की शुरुआत बाड़मेर के आलोक आश्रम से हुई। यात्रा पश्चिमी राजस्थान के अलग-अलग इलाकों से गुजरते हुए जोधपुर पहुंचेगी। इस दौरान भाटी गांवों में लोगों से मिलकर EWS आरक्षण से जुड़ी परेशानियां और अपनी मांगें सामने रख रहे।

उनका कहना है कि EWS का फायदा जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव जरूरी है। खास तौर पर केंद्र सरकार की 5 एकड़ कृषि भूमि वाली शर्त पर उन्होंने सवाल उठाया।

EWS आरक्षण में 5 एकड़ जमीन के नियम पर सवाल उठाए

भाटी का तर्क है कि बाड़मेर-जैसलमेर के रेगिस्तानी इलाके की पांच एकड़ जमीन और दिल्ली-NCR या किसी सिंचित इलाके की पांच एकड़ जमीन को एक पैमाने पर नहीं रखा जा सकता। कहीं जमीन से अच्छी आमदनी होती है तो कहीं बड़ी जमीन होने के बाद भी खेती से परिवार का गुजारा मुश्किल होता है।

उनकी मांग है कि EWS पात्रता में जमीन का सिर्फ रकबा नहीं देखा जाए। जमीन की पैदावार, सिंचाई की सुविधा, स्थानीय बाजार भाव और उससे होने वाली वास्तविक आमदनी को भी आधार बनाया जाए।

राजस्थान में 2019 से मिल रहा 10% EWS आरक्षण

रवींद्र सिंह भाटी की यात्रा को समझने के लिए राजस्थान में EWS की मौजूदा व्यवस्था समझना भी जरूरी। केंद्र में 2019 में 103वें संविधान संशोधन के जरिए EWS आरक्षण का रास्ता साफ हुआ था। संविधान में अनुच्छेद 15(6) और 16(6) जोड़कर उन आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में अधिकतम 10% आरक्षण का प्रावधान किया गया, जो पहले से एससी, एसटी या अन्य आरक्षित वर्गों के दायरे में नहीं आते।

राजस्थान सरकार ने 19 फरवरी 2019 को सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के लिए EWS को 10% आरक्षण देने की अधिसूचना जारी की थी। शुरुआत में परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपए से कम होने के साथ जमीन, फ्लैट और आवासीय प्लॉट से जुड़ी शर्तें भी लगाई गई थीं। लेकिन कुछ महीने बाद राजस्थान ने अपने नियम बदल दिए।

अक्टूबर 2019 में राज्य सरकार ने राजस्थान की सरकारी नौकरियों और राज्य के शिक्षण संस्थानों के लिए संपत्ति से जुड़ी शर्तें हटा दीं। इसके बाद सालाना पारिवारिक आय 8 लाख रुपए से कम होना राज्य स्तर पर EWS पात्रता का मुख्य आधार बन गया।

पांच एकड़ जमीन का सवाल क्यों उठा रहे भाटी?

यहीं विधायक भाटी की EWS सरलीकरण यात्रा का सबसे अहम हिस्सा सामने आता। राजस्थान ने अपनी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों के लिए जमीन-मकान की शर्तें हटा दी हैं, लेकिन केंद्र की EWS व्यवस्था में संपत्ति से जुड़े मानदंड अभी भी लागू हैं।

केंद्रीय नियमों में 5 एकड़ या उससे ज्यादा कृषि भूमि रखने वाला परिवार EWS के दायरे से बाहर हो सकता। इसी तरह तय सीमा से बड़ा फ्लैट या आवासीय प्लॉट होने पर भी पात्रता प्रभावित होती। यानी राजस्थान की राज्य भर्ती में जो व्यक्ति EWS के लिए पात्र हो सकता है, जरूरी नहीं कि केंद्रीय भर्ती में भी उन्हीं शर्तों पर पात्र हो। भाटी इसी अंतर को खत्म करने की मांग कर रहे। उनका कहना है कि केंद्र के नियम बनाते समय राज्यों की भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

एक ही EWS सर्टिफिकेट की मांग कर रहे विधायक भाटी

यात्रा में विधायक भाटी दूसरा बड़ा मुद्दा EWS प्रमाण-पत्र का उठा रहे। उनकी मांग है कि राज्य सरकार की ओर से जारी प्रमाण-पत्र को केंद्रीय नौकरियों और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में भी स्वीकार किया जाए। इसके साथ ही प्रमाण-पत्र की वैधता तीन से पांच साल करने की मांग है।

भाटी का तर्क है कि युवाओं को बार-बार प्रमाण-पत्र बनवाने और दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। उन्होंने विवाहित महिलाओं के लिए आय और दस्तावेज सत्यापन से जुड़े नियमों को आसान करने की बात भी कही है।

भर्ती में उम्र और फीस में भी चाहते हैं राहत

MLA रवींद्र सिंह भाटी EWS उम्मीदवारों को प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु सीमा और आवेदन शुल्क में भी उचित राहत देने की मांग उठा रहे। इसके अलावा EWS विद्यार्थियों के लिए स्कॉलरशिप और छात्रावास जैसी सुविधाएं बढ़ाने की मांग भी उनके एजेंडे में है। भाटी राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक पिछड़ा वर्ग आयोग बनाने की पैरवी भी कर रहे।

इन मांगों में कुछ केंद्र सरकार से जुड़ी हैं तो कुछ पर राज्य सरकार के स्तर पर फैसला हो सकता है। केंद्र सरकार ने अगस्त 2026 में लोकसभा में बताया था कि मौजूदा EWS आरक्षण प्रावधानों में संशोधन का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है।

पंचायत चुनाव से जुड़ता है प्रतिनिधित्व का सवाल

भाटी की यात्रा को आने वाले पंचायत चुनाव से जोड़ने वाली सबसे अहम मांग राजनीतिक प्रतिनिधित्व की है। वे पंचायती राज संस्थाओं में EWS वर्ग के लिए प्रतिनिधित्व की व्यवस्था पर भी विचार करने की मांग कर रहे।

उनका तर्क है कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति के लिए पंचायत चुनाव लड़ना भी आसान नहीं है। चुनावी खर्च के बीच कमजोर आर्थिक स्थिति वाले लोगों की राजनीतिक भागीदारी कैसे बढ़े, इस सवाल को भी उन्होंने अपनी यात्रा से जोड़ा है।पंचायतों में EWS के लिए अलग राजनीतिक आरक्षण अभी मौजूदा व्यवस्था का हिस्सा नहीं है। भाटी इसे नई मांग के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं।

75 से ज्यादा विधायकों के समर्थन का दावा

इस आंदोलन से पहले भाटी ने EWS के मुद्दे पर विधानसभा के भीतर भी समर्थन जुटाने की कोशिश की है। उनका दावा है कि पक्ष और विपक्ष के 75 से ज्यादा विधायकों ने EWS नियमों में बदलाव की मांग का लिखित समर्थन किया है। भाटी चाहते हैं कि राजस्थान विधानसभा से इस मुद्दे पर प्रस्ताव केंद्र सरकार तक भेजा जाए। वे सांसदों से भी समर्थन मांग चुके हैं।

निकाय चुनाव में निर्दलीयों का असर नजर आया

विधायक भाटी की यात्रा ऐसे समय शुरू हुई है, जब राजस्थान में निकाय चुनाव के नतीजे आए हैं। प्रदेश के 10244 वार्डों में भाजपा ने 4179, कांग्रेस ने 3,613 और निर्दलीयों ने 2273 वार्ड जीते। बाकी सीटें दूसरे दलों के खाते में गईं। कई निकायों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने स्थानीय स्तर पर चुनौती पेश की। भरतपुर जैसे नगर निगम में तो निर्दलीयों ने 65 में से 36 वार्ड जीत लिए।

लेकिन इन नतीजों को सीधे पंचायत चुनाव से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। शहर और गांव के चुनाव में मुद्दे, उम्मीदवार और सामाजिक समीकरण अलग हो सकते हैं। इतना जरूर है कि निकाय चुनाव ने दिखाया है कि स्थानीय चुनावों में पार्टी के बाहर के उम्मीदवारों के लिए भी जगह बनी हुई है।

भाटी खुद निर्दलीय विधायक हैं। इसलिए पंचायत चुनाव से ठीक पहले उनकी गांवों में बढ़ती सक्रियता पर भाजपा और कांग्रेस के साथ दूसरे राजनीतिक समूहों की नजर रहना स्वाभाविक है।

EWS के बहाने गांवों तक पहुंच रहे भाटी

भाटी की EWS सरलीकरण यात्रा को सिर्फ आरक्षण की मांग या सिर्फ चुनावी अभियान के किसी एक खांचे में रखना जल्दबाजी होगी। घोषित तौर पर यात्रा का मकसद EWS नियमों में बदलाव के लिए समर्थन जुटाना है। लेकिन राजनीतिक तौर पर देखें तो इसके जरिए भाटी गांवों में सीधे लोगों तक भी पहुंच रहे।

यह यात्रा उन्हें अपनी विधानसभा सीट से बाहर पश्चिमी राजस्थान के दूसरे इलाकों में लोगों से संवाद का मौका दे रही है। इसमें नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े युवा हैं तो जमीन की शर्त से प्रभावित ग्रामीण परिवार भी।

अब असली सवाल यह है कि यात्रा के बाद EWS की इन मांगों पर राज्य सरकार क्या रुख अपनाती है? पंचायत चुनाव में इसका कोई असर पड़ता है या नहीं, इसका जवाब उम्मीदवारों और नतीजों के बाद ही मिलेगा।

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