RCA चुनाव में पेच: 3 जिलों की मान्यता रद्द, फिर भी वोटर लिस्ट में नाम

Jageshwar prasad | Sept 26, 2026, 10:55 IST
RCA वोटर लिस्ट विवाद, 3 नए जिलों पर हाईकोर्ट में सुनवाई सोमवार को
राजस्थान क्रिकेट संघ (RCA) में 29 सितंबर को चुनाव होना है। तीन नए जिले बालोतरा, खैरथल-तिजारा और डीडवाना-कुचामन वोटर लिस्ट में जुड़े हैं। इनकी मान्यता रद्द करने के मिनट्स चुनाव अधिकारी को नहीं मिले।

समझें क्या है पूरा मामला

  • चुनाव से पहले अधिकारी के पास रिकॉर्ड नहीं।
  • तीन क्रिकेट संघों की मान्यता रद्द।
  • फिर भी वोटर लिस्ट में शामिल।
  • हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में मामला।
  • 29 सितंबर को होगा आरसीए चुनाव।

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA – Rajasthan Cricket Association) की चुनावी बिसात बिछ चुकी है। करीब 29 माह तक आरसीए में एडहॉक का राज रहा। अब 29 सितंबर को चुनाव होने हैं। चुनाव अधिकारी की ओर से फाइनल वोटर और कैंडिडेट लिस्ट जारी हो चुकी है।



इसके बाद नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। तीन दिन में कार्यकारिणी सदस्य के रूप में दौसा जिला क्रिकेट संघ की अध्यक्ष शोभना गुर्जर का ही नामांकन हुआ है। अब सिर्फ एक दिन बचा है। शनिवार को नामांकन की गहमागहमी नजर आ सकती है।



तीन नए जिलों का मुद्दा

इस बार चुनाव में सबसे दिलचस्प बात तीन नए जिलों का जुड़ना है। इनमें बालोतरा, खैरथल-तिजारा और डीडवाना-कुचामन शामिल हैं। ये तीन जिले बिना एजीएम (AGM – Annual General Meeting) और एग्जीक्यूटिव कमेटी में पास हुए ही जुड़ गए।



5 अप्रैल 2024 को जयदीप बिहाणी के कन्वीनर रहते हुए एग्जीक्यूटिव कमेटी में निर्णय हुआ था। 5 सितंबर 2025 को डीडी कुमावत के कन्वीनर रहते हुए एजीएम में भी निर्णय हुआ। दोनों बैठकों में नए जिलों को मान्यता नहीं दिए जाने का फैसला लिया गया।



अधिकारी को नहीं मिले मिनट्स

ये डॉक्यूमेंट आपत्तियों पर सुनवाई के दौरान चुनाव अधिकारी को उपलब्ध नहीं कराए गए। सहायक चुनाव अधिकारी पीएस हाडा ने भी यह बात कही।



उनके मुताबिक इन जिलों को हटाने को लेकर एग्जीक्यूटिव कमेटी या एजीएम में जो निर्णय हुए थे, उसके मिनट्स उन्हें उपलब्ध नहीं कराए गए। इससे साफ है कि चुनाव अधिकारी के पास पूरा रिकॉर्ड नहीं पहुंचा।



एजीएम में क्या हुआ था?

5 सितंबर 2025 के एजेंडा नंबर 12 पर चर्चा हुई। इसके बाद समिति ने एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया। इसमें पूर्व पदाधिकारियों की ओर से जारी संबद्धता प्रमाण पत्र रद्द करने की बात थी।



एजीएम में बताया गया कि आरसीए के पूर्व सचिव भवानी शंकर सामोता ने नए जिला संघों को व्यक्तिगत स्तर पर संबद्धता प्रमाण पत्र जारी किए थे। पूर्व आरसीए अध्यक्ष वैभव गहलोत खुद भी इस फैसले से सहमत नहीं थे।



इन मामलों को न तो एग्जीक्यूटिव कमेटी के समक्ष रखा गया। न ही जनरल बॉडी की बैठक में मंजूरी ली गई। प्रस्ताव में कहा गया कि 2023-24 और 2024-25 में जनरल बॉडी की बैठक ही आयोजित नहीं हुई। ऐसे में इन संबद्धता प्रमाण पत्रों को अनधिकृत बताया गया।



सर्वसम्मति से हुआ फैसला

एजीएम में सभी 33 जिला क्रिकेट संघों के प्रतिनिधि और एडहॉक कमेटी सदस्य उपस्थित थे। इसके मिनट्स पर सभी के हस्ताक्षर भी हैं।



इसी तरह 5 अप्रैल 2025 की कार्यकारिणी में भी नए जिलों को संबद्धता नहीं दिए जाने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था। फिर भी वोटर लिस्ट में इन जिलों को जोड़ दिया गया। चुनाव अधिकारी को इस एजीएम के मिनट्स ही उपलब्ध नहीं कराए गए।



रिकॉर्ड गायब नहीं

एजीएम और एग्जीक्यूटिव कमेटी के जो मिनट्स चुनाव अधिकारी को नहीं मिले, वे आरसीए में मौजूद हैं। आरसीए के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी।



उनके मुताबिक जिन दोनों मीटिंग में नए जिलों की संबद्धता रद्द करने के निर्णय लिए गए थे, उन दोनों ही मीटिंग के मिनट्स मिसिंग नहीं हैं। ये आरसीए में उपलब्ध हैं। इससे सवाल उठता है कि ये मिनट्स चुनाव अधिकारी तक क्यों नहीं पहुंचे।



अदालत में है मामला

इस मामले में सोमवार को हाई कोर्ट में सुनवाई है। इस संबंध में आरसीए और चुनाव अधिकारी को भी पार्टी बनाया गया है।



इतना ही नहीं इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में भी एक एसएलपी (SLP – Special Leave Petition) लगी हुई है। ये तीन नए जिले वोटर लिस्ट में जुड़े रहेंगे या नहीं, इसका फैसला अब कोर्ट से ही होगा। इस संबंध में पहले भी हाई कोर्ट और डबल बेंच में सुनवाई हो चुकी है। इस दौरान ईसी और एजीएम के सारे रिकॉर्ड उपलब्ध कराए जा चुके हैं।



कब जुड़े थे ये जिले

नए जिले वैभव गहलोत के कार्यकाल में जोड़े गए थे। तब भवानी सामोता आरसीए सचिव थे। उन्होंने बिना एजीएम के ही संबद्धता दी थी।



आज तक न तो इन जिलों के चुनाव हुए हैं। न ही इन जिलों की कोई क्रिकेट टीम किसी भी एज ग्रुप में पिछले तीन साल में खेली है। स्पोर्ट्स काउंसिल के रिकॉर्ड में भी इन जिलों की जानकारी नहीं है।



क्यों अहम है यह मामला

अगर चुनाव हुए तो इन तीनों संघों को वोट निर्णायक होंगे। इससे चुनाव का पूरा गणित बदल सकता है। इसलिए यह मामला अहम हो गया है।



अब सबकी नजर सोमवार की सुनवाई पर है। कोर्ट का फैसला तय करेगा कि ये जिले वोटर लिस्ट में रहेंगे या नहीं। तभी चुनाव की तस्वीर साफ होगी।



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