रिटायर्ड अधिकारी की जमीन हड़पने का आरोप, रात में दीवार तोड़कर कब्जे की कोशिश

Jageshwar prasad | Apr 22, 2026, 16:45 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में एक सेवानिवृत्त उपमहानिदेशक की जमीन पर लैंड माफिया ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जा करने की कोशिश की। पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

News In Short

  • रिटायर्ड डिप्टी डायरेक्टर की जमीन पर रात में कब्जे करने की कोशिश।
  • रावतसर के चक 24 डीडब्ल्यूडी में स्थित घर पर रात को अचानक दीवार तोड़ी।
  • दीवार तोड़ने के बाद कहा कि यह जमीन अब हमारी है, हमने इसे खरीद लिया है।
  • पीड़ित के पिता ने साल 2002 में यह जमीन ओमप्रकाश मेघवाल से खरीदी थी।
  • रावतसर पुलिस ने BNS की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

News In Detail

राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले के रावतसर थाना क्षेत्र में जमीन पर कब्जा करने का एक मामला सामने आया है। यहां भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग (GSI) के एक सेवानिवृत्त उपमहानिदेशक की कीमती जमीन को फर्जी दस्तावेज के जरिए दोबारा बेचकर उस पर कब्जा करने का प्रयास किया गया। पुलिस ने इस मामले में एक पूर्व विक्रेता और खरीदार सहित चार नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।



आधी रात को गूंजी दीवार टूटने की आवाज

घटना 18 अप्रैल की मध्यरात्रि की है। चक 24 डीडब्ल्यूडी स्थित रिटायर्ड अधिकारी कृष्णदत्त जाट के आवासीय भूखंड की देखरेख कर रहे लूणाराम जाट ने बताया कि रात के सन्नाटे में अचानक दीवार टूटने की आवाजें आने लगीं। जब वे बाहर निकले, तो देखा कि आरोपी ओमप्रकाश मेघवाल और सुरेंद्र ढाका अपने 5-6 साथियों के साथ चारदीवारी तोड़कर अंदर घुस आए थे।



विरोध करने पर आरोपियों ने न केवल गाली-गलौज की, बल्कि जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि यह जमीन अब हमारी है, हमने इसे खरीद लिया है।



24 साल पहले बिकी जमीन को दोबारा बेचा

रिटायर्ड अधिकारी कृष्णदत्त जाट (64) द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार उनके मुखराम ने साल 2002 में यह जमीन ओमप्रकाश मेघवाल से कानूनी तौर पर खरीदी थी और इसकी रजिस्ट्री भी उपपंजीयक कार्यालय रावतसर में हुई थी। आरोपी ओमप्रकाश ने जानते हुए भी कि वह जमीन बेच चुका है, 17 अप्रैल 2026 को उसी जमीन को दोबारा सुरेंद्र ढाका के नाम पंजीकृत करवा दिया।



साजिश में गवाहों की भी भूमिका

पीड़ित का आरोप है कि इस फर्जीवाड़े में केवल खरीदार और विक्रेता ही नहीं, बल्कि गवाह भी शामिल हैं। राजेश अग्रवाल और रामजीलाल जाट ने दस्तावेजों पर गवाह के रूप में हस्ताक्षर किए, जबकि उन्हें पता था कि जमीन पर कब्जा और स्वामित्व कृष्णदत्त के परिवार का है। मौके पर प्रार्थी का पक्का मकान, रसोई और साल 2010 से बिजली-पानी के कनेक्शन भी मौजूद हैं।



पुलिस कार्रवाई

रावतसर पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने जालसाजी और धोखाधड़ी के लिए धारा 318(4), जबरन संपत्ति हड़पने के प्रयास में धारा 329(3), तथा आपराधिक षड्यंत्र और जान से मारने की धमकी देने के मामले में धारा 324(4) व 189(2) के तहत कार्रवाई की है।



इस पूरे प्रकरण की गहन जांच का जिम्मा सहायक उपनिरीक्षक प्रेमकुमार को सौंपा गया है। वर्तमान में पुलिस की टीम उपपंजीयक कार्यालय के रिकॉर्ड खंगालने और घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, ताकि इस 'लैंड सिंडिकेट' के पीछे शामिल सभी चेहरों का पर्दाफाश किया जा सके।



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