144 नई रोडवेज बसें 3 महीने से कारखाने में कैद, सीएम की हरी झंडी का इंतजार
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान रोडवेज की 144 नई बसें तीन महीने से फांक रही धूल।
- इन बसों को सड़क पर उतारने के बजाय कारखाने में कैद कर रखा है।
- मुख्यमंत्री से इन बसों को हरी झंडी दिखाने का नहीं मिल पा रहा समय।
- रोडवेज एमडी समय के लिए अब तक तीन बार सीएम से मिल चुके।
- ये बसें सड़क पर नहीं चलने से रोडवेज को हो रहा बड़ा नुकसान।
Jaipur: राजस्थान रोडवेज की 144 नई बसें मुख्यमंत्री की हरी झंडी का इंतजार कर रही हैं। इन बसों को प्रदेश में पब्लिक ट्रांसपोर्ट मजबूत बनाने के लिए खरीदा गया था।
करीब 45 करोड़ रुपए के लोन से खरीदी गई ये बसें तीन महीने से जयपुर स्थित बस बॉडी बिल्डिंग कारखाने में खड़ी धूल फांक रही हैं।
इन बसों का संचालन शुरू नहीं होने से निगम को हर महीने कर्ज का भारी ब्याज चुकाना पड़ रहा है, वहीं करोड़ों रुपए के राजस्व से भी हाथ धोना पड़ रहा है।
सीएम की हरी झंडी का इंतजार
सूत्रों के अनुसार इन 144 नई बसों के संचालन को शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री के उद्घाटन समारोहका इंतजार किया जा रहा है।
बताया जाता है कि रोडवेज के प्रबंध निदेशक पुरुषोत्तम शर्मा उद्घाटन के संबंध में मुख्यमंत्री से तीन बार व्यक्तिगत मुलाकात कर चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें उद्घाटन की तारीख नहीं दी गई है।
सूत्रों ने बताया कि हर बार केवल जल्द ही समय देने की बात कही जा रही है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
रोजाना 26 लाख रुपए की आय का नुकसान
रोडवेज के मानकों के अनुसार एक बस प्रतिदिन औसतन 400 किलोमीटर की दूरी तय करती है। वर्तमान रूटों और यात्री भार के अनुसार प्रति किलोमीटर लगभग 45 रुपये की औसत आय प्राप्त होती है।
इस गणित के आधार पर सड़कों पर उतरने के बाद एक बस से प्रतिदिन लगभग 18 हजार रुपए का प्रत्यक्ष राजस्व प्राप्त हो सकता है। यदि सभी 144 बसों का संचालन शुरू हो जाए तो निगम को प्रतिदिन लगभग 26 लाख रुपए की आय प्राप्त हो सकती थी।
पिछले तीन महीनों से कारखाने में खड़े रहने के कारण रोडवेज को अब तक करोड़ों रुपये का सीधा वित्तीय नुकसान हो चुका है।
जनता बेहाल, प्रबंधन दे रहा तकनीकी दलीलें
वर्तमान में प्रदेश के कई जिलों में बसों की भारी कमी है। इससे यात्रियों को सुलभ परिवहन सेवा नहीं मिल पा रही है।
जनता को बेहतर सुविधा देने के वादे के साथ खरीदी गई ये नई बसें सब कुछ तैयार होने के बाद भी सड़कों पर नहीं उतर सकी हैं।
जब इस संबंध में निगम प्रबंधन से बात की गई, तो उन्होंने देरी के लिए तकनीकी प्रक्रियाओं और अंतिम दौर की औपचारिकताओं को जिम्मेदार ठहराया।
संचालन जल्द शुरू करने की कवायद
रोडवेज के एक अधिकारी का कहना है कि बसों को सड़कों पर उतारने से पहले आवश्यक सुरक्षा मानकों को पूरा किया जा रहा है।
वर्तमान में इन नई बसों में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (VTS), पैनिक बटन और आवश्यक वायरिंग सहित अन्य तकनीकी कार्य किए जा रहे हैं।
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