रोडवेज को लापरवाही पड़ी भारी, युवक को देना होगा 17.06 लाख का हर्जाना
News In Short
- रोडवेज बस दुर्घटना में यात्री का पैर कटा था, कोर्ट ने 17.06 लाख का मुआवजा दिया।
- ट्रिब्यूनल ने रोडवेज की लापरवाही मानी, ड्राइवर ने स्वीकार किया कि टायरों का रखरखाव सही नहीं था।
- युवक का पैर काटने के बाद कोर्ट ने कहा- जीवनभर मानसिक और शारीरिक कष्ट झेलना पड़ेगा।
- दुर्घटना के बाद पीड़ित 17 दिन अस्पताल में रहा, संक्रमण फैलने के बाद पैर काटना पड़ा।
- रोडवेज को एक महीने में राशि जमा कराने के आदेश, 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
News In Detail
रोडवेज बस का टायर फटने से यात्री का पैर कटने के 4 साल पुराने मामले में जयपुर महानगर प्रथम के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने यात्री के पक्ष में 17,06,457 रुपए का अवार्ड पारित किया है।
ट्रिब्यूनल ने मामले में रोडवेज की गंभीर लापरवाही मानी। जज श्वेता गुप्ता ने आदेश में कहा कि 30 साल के युवक का पैर कटने से उसे जीवनभर मानसिक और शारीरिक कष्ट झेलना पड़ेगा।
कैसे हुआ हादसा?
यह बस हादसा 28 मई 2022 को हुआ था। जगतपुरा निवासी सुरेश कुमार अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रोडवेज बस में बैठकर जयपुर से कांवट जा रहा था। बडिया की चौकी के पास अचानक तेज धमाके के साथ बस के पीछे का टायर फट गया।
बस का टायर इतना पुराना और घिसा हुआ था कि उसकी रबड़ पूरी तरह उखड़ चुकी थी। टायर फटते ही उस पर लगने वाला दबाव इतना अधिक था कि बस की लोहे की फर्श की चद्दर भी फट गई। सुरेश कुमार उस सीट पर बैठे थे जो टायर के ठीक ऊपर थी, इसलिए लोहे के टुकड़े और चद्दर उनके पैरों में घुसकर गंभीर चोटें पहुंचा गईं।
ड्राइवर ने खोली रोडवेज की पोल
सुनवाई के दौरान रोडवेज प्रशासन ने दलील दी कि यह महज एक दुर्घटना थी और इसमें ड्राइवर की कोई लापरवाही नहीं थी। परंतु कोर्ट के सामने खुद रोडवेज बस के ड्राइवर महेंद्र कुमार शर्मा ने विभाग के दावों की पोल खोलकर रख दी।
ड्राइवर ने स्वीकार किया कि बस के टायरों का रोडवेज विभाग द्वारा सही रख-रखाव नहीं करने के कारण टायर रास्ते में फटा। बस का फर्श टूटने से यात्री को चोट आई। ड्राइवर के इस बयान से रोडवेज की लापरवाही प्रमाणित हो गई।
17 दिन भर्ती रहा, संक्रमण के बाद काटा पैर
इलाज के दौरान पीड़ित सुरेश कुमार 17 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहा। उसके कई ऑपरेशन हुए। पैर में रॉड डाली गई, लेकिन संक्रमण फैलने के कारण आखिरकार पैर काटना पड़ा।
सवाई मानसिंह अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने उसे 60 प्रतिशत स्थायी निर्योग्यता का प्रमाण पत्र जारी किया है। इस हादसे ने सुरेश कुमार की जिंदगी पूरी तरह बदल दी। वह अब अपने परिवार का भरण-पोषण करने में असमर्थ है।
कोर्ट ने तय किया मुआवजा
कोर्ट ने न्यूनतम मजदूरी नियमों के आधार पर पीड़ित की आय, चिकित्सा खर्च, शारीरिक और मानसिक वेदना सहित अन्य मदों का आकलन कर कुल 17,06,457 रुपए की क्षतिपूर्ति राशि तय की। ट्रिब्यूनल ने इस पर याचिका दायर करने की तिथि से 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देने का आदेश दिया।
ट्रिब्यूनल ने रोडवेज प्रशासन को एक महीने में राशि जमा कराने के आदेश दिए हैं। यह फैसला रोडवेज के लिए एक चेतावनी है कि वह अपने बेड़े के रखरखाव पर ध्यान दे, अन्यथा इस तरह के हादसों की पुनरावृत्ति होती रहेगी।
पीड़ित परिवार को राहत
इस फैसले से पीड़ित सुरेश कुमार और उसके परिवार को राहत मिली है। चार साल से चल रहे इस कानूनी संघर्ष के बाद अब उन्हें मुआवजा मिलेगा। हालांकि, यह रकम उस नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती जो उन्हें हुआ है। एक युवा जो परिवार का इकलौता कमाने वाला था, वह अब जीवनभर के लिए अपंग हो गया है।
यह फैसला अन्य यात्रियों के लिए भी एक संदेश है कि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं। यदि किसी सरकारी परिवहन की लापरवाही से वे घायल होते हैं तो वे मुआवजे के हकदार हैं।
FAQ
- मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) क्या है?
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT - Motor Accident Claims Tribunal) एक विशेष अर्ध-न्यायिक निकाय (स्पेशल कोर्ट) है, जो सड़क दुर्घटना के पीड़ितों या उनके परिवारों को वाहन मालिक, चालक और बीमा कंपनी से मुआवजा दिलाने का काम करता है। इसे मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 165 के तहत गठित किया गया है, ताकि दीवानी अदालतों के चक्कर काटे बिना पीड़ितों को त्वरित और समय पर आर्थिक राहत मिल सके।
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