राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल अब खुद तैयार करेगा सिलेबस; राजस्थानी कला, संस्कृति व इतिहास होगा शामिल

Jageshwar prasad | May 08, 2026, 09:00 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल 21 वर्षों बाद अपना पाठ्यक्रम स्वयं तैयार करेगा, जिससे सालाना 25 लाख रुपए से अधिक की बचत होगी। नए सिलेबस में राजस्थानी कला, संस्कृति और इतिहास को शामिल किया जाएगा, जिससे राज्य के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में लाभ मिलेगा।

News In Short

  • राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल 21 साल बाद खुद का सिलेबस तैयार करेगा।
  • नए पाठ्यक्रम में राजस्थानी कला, संस्कृति और इतिहास को मिलेगी जगह।
  • NIOS पर हर साल होने वाला 25 लाख रुपए का कॉपीराइट खर्च होगा समाप्त।
  • पूर्व सचिव ने राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल के निर्णय को बताया सराहनीय।
  • नया सिलेबस प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों को देगा मजबूत बढ़त।

News In Detail

Jaipur: राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल (RSOS) अपने गठन के 21 साल बाद ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए अब अपना स्वयं का पाठ्यक्रम (सिलेबस) तैयार करने जा रहा है। अब तक यह संस्था राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) के सिलेबस के आधार पर ही कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं आयोजित करती रही है। इस निर्णय से न सिर्फ प्रतिवर्ष होने वाले भारी भरकम कॉपीराइट खर्च में बचत होगी, बल्कि राजस्थान के छात्रों को अपनी स्थानीय विरासत को पढ़ने का अवसर भी मिलेगा।



क्यों जरूरी था अपना सिलेबस बनाना?

पिछले दो दशकों से RSOS, NIOS के ही पाठ्यक्रम का उपयोग कर रहा था। इसके लिए हर साल संस्थान को कॉपीराइट के नाम पर 25 लाख रुपए से अधिक का भुगतान करना पड़ता था। इसके अलावा, राष्ट्रीय स्तर के सिलेबस में राजस्थान के इतिहास, कला और संस्कृति से जुड़े विषय नाममात्र के होते थे। इस कारण राज्य के विद्यार्थी अपनी क्षेत्रीय धरोहर से वंचित रह जाते थे, और प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे RAS, REET, पटवारी आदि) में स्थानीय ज्ञान के अभाव को पूरा करने में उन्हें कठिनाई होती थी।



नए सिलेबस में क्या होगा खास?

राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल की सचिव अरुणा शर्मा ने बताया कि नए पाठ्यक्रम में मुख्य रूप से राजस्थानी कला, संस्कृति और इतिहास को प्राथमिकता दी जाएगी। इसे तैयार करने के लिए कुछ सरकारी विश्वविद्यालयों से विषय विशेषज्ञ उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।



विशेषज्ञों की राय

राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल के पूर्व सचिव राजेंद्र शर्मा हंस ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि संस्थान को अपना सिलेबस गठन के शुरुआती वर्षों में ही बना लेना चाहिए था। उनके कार्यकाल में भी इसके प्रयास हुए थे, परंतु तकनीकी कारणों से वे सफल नहीं हो पाए। अब जब संस्थान स्वयं पाठ्यक्रम तैयार कर रहा है, तो इसमें प्रदेश की महत्वपूर्ण जानकारियों को प्राथमिकता मिलने से छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़ी मदद मिलेगी।



क्या होंगे फायदे?

आर्थिक बचत: हर साल एनआईओएस को दिए जाने वाले 25 लाख रुपए से अधिक के कॉपीराइट शुल्क की बचत होगी, जिसका उपयोग संस्थान के विकास में किया जा सकेगा।



प्रशासनिक राहत: हर वर्ष सिलेबस के लिए समझौता ज्ञापन (MOU) के झंझट से मुक्ति मिलेगी।



क्षेत्रीय पहचान: छात्र स्थानीय इतिहास और संस्कृति के जानकार बनेंगे, जिससे उनकी अपनी धरोहर के प्रति पहचान और गर्व की भावना विकसित होगी।



प्रतियोगिता की तैयारी: राजस्थान आधारित परीक्षाओं में राज्य की कला, संस्कृति और इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा रहता है – इससे छात्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।



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