11 साल से निरस्त हो रही हर भर्ती, जानिए ऐसी मेडिकल यूनिवर्सिटी की कहानी

Jageshwar prasad | May 22, 2026, 15:50 IST
Photograph: (the sootr)
RUHS ने पिछले 11 वर्षों में चार बार भर्तियां निकालीं, हर बार सेवा नियमों के न बनने, BOM की मंजूरी न मिलने और भर्ती प्रक्रिया में खामियों के कारण इन्हें रद्द करना पड़ा। वर्ष 2011 और 2013 में बिना नियमों के की गई नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

News In Short

  • RUHS की पिछली 11 साल में चारों भर्तियां निरस्त, एक भी सफल नहीं।
  • 2015, 2017, 2023 और 2024 में निकली भर्तियां बार-बार हुईं रद्द।
  • सेवा नियम न बनने, BOM की मंजूरी न मिलने और खामियां रहीं मुख्य कारण।
  • 2011 व 2013 में बिना भर्ती नियमों के सैकड़ों नियुक्तियां करने पर भी सवाल।
  • RUHS रजिस्ट्रार ने सरकार से नियमित पदों पर भर्ती की अनुमति मांगी।

News In Detail

राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (RUHS) में पिछले 11 साल से शिक्षक और गैर-शिक्षक पदों पर भर्ती का सिलसिला बार-बार निरस्त हो रहा है। 2015, 2017, 2023 और 2024 में निकाली गई चारों भर्तियां अलग-अलग कारणों से रद्द करनी पड़ीं। इससे एक तरफ जहां सैकड़ों युवा बेरोजगार हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार के रिम्स जयपुर बनाने के सपने पर सवाल उठने लगे हैं।



स्थापना के 15 साल बाद बने नियम

RUHS की स्थापना 2005 में RUHS एक्ट के तहत हुई थी। एक्ट के अनुसार, नियुक्तियां बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (BOM) द्वारा बनाए गए स्टैच्यूट्स (भर्ती नियमों) के तहत होनी चाहिए। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से RUHS ने भर्ती नियम वर्ष 2020 में बनाए – यानी स्थापना के 15 साल बाद।



इससे पहले 2011 और 2013 में सैकड़ों नियुक्तियां ऐसे समय में कर दी गईं, जब विश्वविद्यालय के पास कोई विधिवत भर्ती नियम ही नहीं थे।



चार बार भर्ती, चार बार निरस्त

RUHS की चार भर्तियां और उनके निरस्त होने के कारण इस प्रकार हैं:



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2023 भर्ती: हूबहू प्रश्न और एसीबी-एसओजी तक मामला

2023 में असिस्टेंट प्रोफेसर के 74 पदों पर भर्ती के लिए 3 व 5 नवंबर को परीक्षा हुई थी। शिकायतें आईं कि परीक्षा में पिछले साल के हूबहू प्रश्न पूछे गए। इस मामले की शिकायत एसीबी और एसओजी तक पहुंची। अंततः 12 जुलाई 2024 को BOM ने यह भर्ती भी निरस्त कर दी।



2011-2013 की नियुक्तियों पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विश्वविद्यालय के पास 2011 और 2013 में कोई भर्ती नियम नहीं थे, तो उस समय सैकड़ों नियुक्तियां कैसे कर दी गईं? यह प्रशासनिक और कानूनी दोनों दृष्टि से गंभीर खामी है। विशेषज्ञों के अनुसार, बिना नियमों के की गई ये नियुक्तियां कानूनी चुनौतियों का सामना कर सकती हैं।



क्यों नहीं हो पा रही नियमित भर्ती?

RUHS में भर्ती न होने के प्रमुख कारण हैं:



सेवा नियमों का अभाव: 2020 से पहले कोई नियम ही नहीं थे।



BOM की मंजूरी न मिलना: हर बार बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के सदस्यों की सहमति नहीं बन पाती।



भर्ती प्रक्रिया में खामियां: हूबहू प्रश्न, पारदर्शिता की कमी, और अनियमितताओं के आरोप।



अस्थायी नियुक्तियों पर निर्भरता: सरकार अस्थायी पदों पर भर्ती की अनुमति देती है, जबकि विशेषज्ञ नियमित पदों की मांग कर रहे हैं।



हैल्थ से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार को चाहिए कि वह टीचिंग और नॉन-टीचिंग पदों पर अस्थायी की बजाय नियमित पदों पर भर्ती की अनुमति दे। इससे न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली भी बेहतर होगी।



सरकार और RUHS क्या कहते हैं?

RUHS के रजिस्ट्रार हरफूल पंकज ने बताया कि फैकल्टी के 74 पदों पर भर्ती के लिए बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के सदस्यों की सहमति के बाद भर्ती निरस्त की है। हमने सरकार को नियमित पदों पर भर्ती करने के लिए कुछ माह पहले लिखा है।



सीएम के सपने पर सवाल

एक तरफ सरकार एम्स दिल्ली की तर्ज पर रिम्स (Rajasthan Institute of Medical Sciences) जयपुर बनाने की बात कर रही है, वहीं RUHS में ही नियमित भर्ती न हो पाने से मुख्यमंत्री के इस सपने पर सवालिया निशान लग रहा है।



अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

आरयूएचएस (RUHS) ने पिछले 11 साल में किन-किन वर्षों में भर्ती नोटिफिकेशन जारी किए जो बाद में निरस्त कर दिए गए?

विश्वविद्यालय ने साल 2015, 2017, 2023 और 2024 में टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ की भर्तियां निकाली थीं, जो अलग-अलग विवादों के चलते निरस्त हो गईं।



साल 2023 की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती को किस तारीख को और क्यों रद्द किया गया?

3 और 5 नवंबर 2023 को आयोजित परीक्षा को भर्ती प्रक्रिया में पाई गई खामियों और प्राप्त शिकायतों के आधार पर 12 जुलाई 2024 को बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (BOM) की बैठक में आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया गया।



आरयूएचएस के किस मूल अधिनियम के तहत नियुक्तियां केवल बॉम (BOM) के नियमों के अनुसार ही की जा सकती हैं?

आरयूएचएस एक्ट 2005 के तहत सभी नियुक्तियां बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट द्वारा बनाए गए स्टैच्यूट्स के तहत होनी अनिवार्य हैं, हालांकि यूनिवर्सिटी ने अपने भर्ती नियम साल 2020 में बनाए।



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