सरिस्का पर डॉक्यूमेंट्री 2028 में होगी रिलीज, NTCA और सरकार करेगी मदद
समझें क्या है पूरा मामला
- सरिस्का में बाघ पुनर्वास की सफलता पर बनेगी डॉक्यूमेंट्री।
- 2008 में रणथंभौर से पहला बाघ आया, आज 56 बाघों का घर।
- वाइल्डलाइफ फिल्म मेकर नल्ला मुथु करेंगे फिल्मांकन।
- 2028 में पुनर्वास के 20 साल पूरे, इसी साल होगा प्रदर्शन।
- जहां बाघ खत्म हुए, वहीं से शुरू हुई वापसी की कहानी।
राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्वास की सफलता की कहानी अब दुनिया के सामने फिल्म के रूप में आएगी। 18 साल पहले रणथंभौर से पहला बाघ लाया गया था। आज सरिस्का में 56 बाघ हैं। इस पूरी यात्रा पर मशहूर वाइल्डलाइफ फिल्म मेकर सुब्बैय्या नल्ला मुथु डॉक्यूमेंट्री बनाएंगे।
यह डॉक्यूमेंट्री 2 साल में तैयार होगी और 2028 में बाघ पुनर्वास के 20 साल पूरे होने पर प्रदर्शित की जाएगी। एनटीसीए (National Tiger Conservation Authority), भारत सरकार और राजस्थान सरकार इस काम में मदद करेंगे।
जहां बाघ खत्म हुए, वहीं से शुरू हुई वापसी की कहानी
सरिस्का एक समय पूरी तरह बाघ विहीन हो गया था। यह देश का पहला टाइगर रिजर्व था जहां बाघों का पूरी तरह सफाया हो गया था। इसके बाद रणथंभौर से बाघों को लाकर यहां पुनर्वास किया गया।
यह देश में पहली बार हुआ टाइगर ट्रांसलोकेशन (Tiger Translocation) था। आज सरिस्का में 56 बाघ हैं और यह पुनर्वास की एक वैश्विक सफलता की कहानी बन चुकी है।
कौन हैं नल्ला मुथु?
सुब्बैय्या नल्ला मुथु वाइल्डलाइफ की दुनिया में जाना-माना नाम है। उनके 20 साल के करियर में कई टाइगर रिजर्व पर फिल्में बन चुकी हैं। रणथंभौर पर 5 फिल्में, तड़ोबा टाइगर रिजर्व पर 3 फिल्में और सरिस्का व पन्ना टाइगर रिजर्व पर एक-एक फिल्म बना चुके हैं।
रणथंभौर की मशहूर बाघिन मछली की फैमिली पर बनी उनकी फिल्म को करीब 5 साल में पूरा किया गया था। वे सरिस्का के पहले टाइगर ट्रांसलोकेशन के गवाह भी रहे हैं।
क्या होगा डॉक्यूमेंट्री में?
नल्ला मुथु ने बताया कि इस डॉक्यूमेंट्री में कई पहलू शामिल किए जाएंगे। बाघों के पुनर्वास के बाद की संरक्षण यात्रा दिखाई जाएगी। विस्थापन प्रक्रिया और उससे समुदाय ने क्या सीखा, यह भी सामने आएगा।
टाइगर के व्यवहार में बदलाव और वन्यजीव-मानव संघर्ष के पहलू भी दर्शाए जाएंगे। विभिन्न ऋतुओं में सरिस्का के जंगल की प्राकृतिक खूबसूरती को भी कैमरे में कैद किया जाएगा। इसके साथ ही वनकर्मियों की चुनौतियां और संघर्ष को भी पर्दे पर दिखाया जाएगा।
दो साल में हर गतिविधि होगी कैप्चर
फिल्म मेकर नल्ला मुथु आगामी 2 साल तक सरिस्का में रहकर हर गतिविधि को बारीकी से फिल्माएंगे। सरिस्का के बघानी क्षेत्र का फिल्मांकन वे पहले भी कर चुके हैं। इस बार पूरे रिजर्व को नए नजरिए से कैमरे में उतारा जाएगा। जंगल में बाघों का विचरण, पक्षियों की दुनिया और प्रकृति के हर रंग को दर्ज किया जाएगा।
मुथु बोले, सरिस्का सबसे अलग है
नल्ला मुथु ने कहा कि उन्होंने देश के कई टाइगर रिजर्व देखे हैं लेकिन सरिस्का की केस स्टडी सबसे अलग है। उनके अनुसार सरिस्का इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि अगर जंगल में बाघ न हो तो क्या होता है। और यह भी कि अगर संकल्प हो तो बाघों को वापस लाया जा सकता है। इस ऐतिहासिक सफलता को दुनिया के सामने रखना जरूरी है।
2028 में होगा प्रदर्शन
यह डॉक्यूमेंट्री सरिस्का में बाघ पुनर्वास के 20 साल पूरे होने पर प्रदर्शित की जाएगी। इसमें सरिस्का प्रशासन, एनटीसीए, भारत सरकार और राजस्थान सरकार सहयोग करेंगी।
FAQ
- सरिस्का टाइगर रिजर्व पर बनने वाली डॉक्यूमेंट्री कब रिलीज होगी?
यह डॉक्यूमेंट्री अगले 2 साल में तैयार होगी और 2028 में सरिस्का में बाघ पुनर्वास के 20 साल पूरे होने पर प्रदर्शित की जाएगी। इसे बनाने में सरिस्का प्रशासन, NTCA, भारत सरकार और राजस्थान सरकार सहयोग करेंगी। - सरिस्का में बाघ पुनर्वास की कहानी क्या है?
सरिस्का देश का पहला टाइगर रिजर्व था जहां बाघ पूरी तरह खत्म हो गए थे। करीब 18 साल पहले रणथंभौर से बाघों को लाकर यहां पुनर्वास शुरू किया गया। यह भारत में पहला टाइगर ट्रांसलोकेशन था। आज सरिस्का में 56 बाघ हैं।
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