12 घंटे में दूसरा हादसा, रात को फिर गिरा लेंटर, जर्जर भवन पर उठे गंभीर सवाल

Jageshwar prasad | Jul 07, 2026, 13:25 IST
12 घंटे में दूसरा हादसा, रात को गिरा लेंटर, 1995 में बना जर्जर भवन
अलवर के सैटेलाइट अस्पताल में 12 घंटे के अंदर दूसरी बार छत गिरने का हादसा हुआ। सोमवार सुबह ओपीडी रूम में पंखा-प्लास्टर गिरने से डॉक्टर और मरीज घायल हुए थे।

समझें क्या है पूरा मामला

  • अलवर सैटेलाइट अस्पताल में 12 घंटे में दूसरा हादसा, रात को फिर गिरा लेंटर।
  • सुबह डॉक्टर-मरीज पर गिरा था पंखा-प्लास्टर, रात को दूसरे कमरे की छत गिरी।
  • 1995 में बना भवन, 2013 में विस्तार, अब जर्जर, पीडब्ल्यूडी को लिखे 7 पत्र।
  • मरम्मत के लिए 15 लाख का अनुमान, 9.7 लाख जमा, फिर भी नहीं हुई मरम्मत।
  • सरकार ने मांगी रिपोर्ट, पीडब्ल्यूडी अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश।

सुनील जैन @ अलवर



Alwar: अलवर शहर के काला कुआं स्थित राजकीय सैटेलाइट अस्पताल में सोमवार को एक और बड़ा हादसा होते-होते टल गया। सुबह ओपीडी के दौरान डॉक्टर और महिला मरीज पर पंखे सहित लेंटर का हिस्सा गिर गया था।



गिरने की घटना के कुछ ही घंटों बाद सोमवार रात करीब 8:30 बजे अस्पताल के एक अन्य कमरे की छत (लेंटर) का हिस्सा भरभराकर गिर गया। राहत की बात यह रही कि उस समय कमरा बंद था और उसमें कोई मौजूद नहीं था, जिससे जनहानि नहीं हुई।



अस्पताल में कहां हुई घटना

जानकारी के अनुसार यह कमरा, कमरा नंबर-7 के ठीक सामने स्थित है। इसी कमरे में सामान्य दिनों में डॉ. विकास भारद्वाज मरीजों को देखते हैं। रात में उनकी ड्यूटी नहीं होने के कारण कमरा बंद था।



अचानक तेज आवाज आने पर अस्पताल के स्टाफ ने कमरा खोलकर देखा तो छत का प्लास्टर और लेंटर का हिस्सा नीचे गिरा हुआ मिला। इसके बाद तत्काल जिला प्रशासन को सूचना दी गई और सुरक्षा की दृष्टि से कमरे को बंद कर दिया गया।



12 घंटे में दूसरा हादसा, रात को गिरा लेंटर, 1995 में बना जर्जर भवन


जर्जर भवन बना मरीजों और डॉक्टरों के लिए खतरा

लगातार दो घटनाओं ने सैटेलाइट अस्पताल की भवन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल के कई हिस्सों में सीलन, उखड़ता प्लास्टर और कमजोर हो चुकी छतें यह संकेत दे रही हैं कि भवन अब पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है।



अस्पताल में प्रतिदिन 500 से अधिक मरीजों की आवाजाही रहती है और 24 घंटे चिकित्सा सेवाएं संचालित होती हैं। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।



12 घंटे में दूसरा हादसा, रात को गिरा लेंटर, 1995 में बना जर्जर भवन


सुबह ही हुआ था हादसा

सोमवार सुबह करीब 10 बजे ओपीडी के दौरान कमरा नंबर-7 में डॉक्टर सीताराम अग्रवाल मरीजों को देख रहे थे। इसी दौरान चलते पंखे सहित छत का प्लास्टर और लेंटर का हिस्सा नीचे गिर गया।



हादसे में डॉक्टर सीताराम अग्रवाल और महिला मरीज टीना घायल हो गई थीं। दोनों के सिर में चोट आई, हालांकि प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत खतरे से बाहर बताई गई।



सरकार ने मांगा जवाब

लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने जिला कलेक्टर से तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है।



साथ ही अतिरिक्त मुख्य सचिव, सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को अस्पताल की शीघ्र मरम्मत कराने तथा लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।



उन्होंने स्पष्ट कहा कि मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों के भवनों की नियमित समीक्षा कर आवश्यक मरम्मत समयबद्ध तरीके से कराई जाए।



कई बार लिखे गए पत्र, फिर भी नहीं हुई मरम्मत

प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल भवन का निर्माण वर्ष 1990 से 2023 के बीच अलग-अलग चरणों में हुआ। भवन के पुराने हिस्से की जर्जर स्थिति को लेकर अस्पताल प्रशासन लगातार पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखता रहा।



प्रमुख चिकित्सा अधिकारी द्वारा 4 अगस्त 2025, 25 अगस्त 2025, 4 सितम्बर 2025, 24 फरवरी 2026, 18 मई 2026, 8 जून 2026 और 29 जून 2026 को मरम्मत के लिए अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी को पत्र भेजे गए। मरम्मत के लिए आवश्यक राशि भी चिकित्सा विभाग ने जमा करा दी थी, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका।



1995 में बना था भवन, बाद में बढ़ाया गया अस्पताल

सैटेलाइट अस्पताल का मूल भवन वर्ष 1995 में एक मंजिला बनाया गया था। उस समय यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र था। वर्ष 2011-12 में इसे सैटेलाइट अस्पताल का दर्जा मिला।



जिस ओपीडी कक्ष नंबर-7 में सोमवार को हादसा हुआ, वह पहले शौचालय था, जिसे बाद में ओपीडी में परिवर्तित किया गया। वर्ष 2013 में एलएचवी शारदा गुप्ता ने सेवानिवृत्ति पर अपने सहयोग से नया कमरा बनवाया, जिसके बाद अन्य कमरे और दूसरी मंजिल का निर्माण हुआ।



वर्ष 2025 में अस्पताल के विभिन्न कार्यों के लिए पीडब्ल्यूडी को 48 लाख रुपए दिए गए। इनमें से लगभग 41.57 लाख रुपए के कार्य किए गए, जबकि करीब 6.45 लाख रुपए शेष रहे। इसके बाद जर्जर कमरों की मरम्मत के लिए नया प्रस्ताव बनाया गया।



पीडब्ल्यूडी ने मई 2025 में लगभग 15 लाख रुपए का अनुमान तैयार किया, जिसमें मरम्मत, रंग-रोगन और आयुष्मान योजना के लोगो का कार्य शामिल था। अस्पताल प्रशासन ने 18 मई को लगभग 9.7 लाख रुपए और जमा करा दिए, लेकिन इसके बावजूद विभाग ने टेंडर जारी नहीं किए।



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