राजस्थान के दो नेताओं का भाजपा में बढ़ा कद, 4 राज्यों के बनें प्रभारी

Ashish Bhardwaj | Sept 23, 2026, 17:55 IST
राजस्थान भाजपा
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भाजपा में सतीश पूनिया का कद लगातार बढ़ रहा है। पंजाब का प्रभारी रहने के बाद अब उन्हें जम्मू-कश्मीर का प्रभारी बनाया गया है, जो उनकी राजनीतिक अहमियत को दिखाता है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सतीश पूनिया को पंजाब-जम्मू कश्मीर की मिली जिम्मेदारी।
  • सुनील बंसल बने तेलंगाना और बंगाल के प्रभारी।
  • भाजपा संगठन में राजस्थान के नेताओं का बढ़ा कद।
  • पूनिया और बंसल को मिली बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी।

जयपुर। भारतीय जनता पार्टी में राजस्थान के दो नेता सतीश पूनिया और सुनील बंसल का कद लगातार बढ़ता जा रहा है। पार्टी ने सतीश पूनिया को पंजाब और जम्मू-कश्मीर का प्रभारी नियुक्त किया है। बंसल को तेलंगाना और पश्चिम बंगाल का प्रभारी बनाया है। अल्का गुर्जर को भी पंजाब की सह-प्रभारी बनाया गया है।



सतीश पूनिया राजस्थान की राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं। वे जुलाई 2019 में राजस्थान भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष बनाए गए थे। वे आमेर विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रह चुके हैं, हालांकि 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में वे अपनी सीट नहीं बचा पाए थे। इसके बाद पार्टी ने उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारियों में सक्रिय रखा और हरियाणा का प्रभारी बनाया था। उनके नेतृत्व में भाजपा ने 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार जीत हासिल की थी, जिसके बाद उनकी संगठनात्मक क्षमता की खूब चर्चा हुई थी।



अगस्त में मिली थी पूनियाा को महामंत्री की जिम्मेदारी

इसी साल अगस्त में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का गठन किया था, जिसमें सतीश पूनिया को महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद उन्हें पंजाब का प्रभारी बनाया गया। अब पार्टी ने उन्हें एक और बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए जम्मू-कश्मीर का प्रभारी भी नियुक्त किया है। इस तरह एक महीने में ही सतीश पूनिया की जिम्मेदारी बढ़ा दी गई है। इससे साफ हो रहा कि भाजपा संगठन के भीतर राजस्थान के इस नेता का कद लगातार बढ़ रहा।



कौन हैं सुनील बंसल?

राजस्थान के कोटपूतली से ताल्लुक रखने वाले सुनील बंसल को पार्टी ने तेलंगाना और पश्चिम बंगाल का प्रभारी बनाया है। सुनील ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत एबीवीपी से की थी। उन्होंने 1989 में राजस्थान विश्वविद्यालय के महासचिव पद के लिए चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। इसके बाद वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस से जुड़ गए और 1990 में आरएसएस प्रचारक के तौर पर काम शुरू किया था।



अमित शाह के साथ काम करने का मिला मौका

सुनील बसंल को 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश का सह संगठन मंत्री बनाया गया था। उस समय अमित शाह राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर यूपी के प्रभारी थे। बाद में उन्हें उत्तर प्रदेश का संगठन मंत्री बना दिया गया। 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की बड़ी जीत में भी उनकी अहम भूमिका रही थी।



2019 और 2022 के चुनावों में भी बंसल ने यूपी में भाजपा की जीत पक्की करने में योगदान दिया था। लगातार 8 साल तक यूपी में संगठन मंत्री रहते हुए उन्होंने योगी सरकार और पार्टी संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखा था। 2022 में योगी सरकार की वापसी के बाद उन्हें दिल्ली बुलाया गया और जेपी नड्डा की टीम में राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। इसके बाद उन्हें ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे अहम राज्यों की जिम्मेदारी दी गई।



ओडिशा में तोड़ा नवीन पटनायक का किला

ओडिशा प्रभारी के तौर पर बंसल ने नवीन पटनायक की लंबे समय से चली आ रही सत्ता को चुनौती दी और पार्टी संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत किया। इसका नतीजा यह रहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 21 में से 20 सीटें जीतीं और विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल कर राज्य में पहली बार अपनी सरकार बनाई थी।



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