अवैध लिंग जांच रैकेट का खुलासा, 35 हजार में बताते थे गर्भ में बेटा या बेटी
News In Short
- राजस्थान-हरियाणा सीमा पर भ्रूण लिंग जांच रैकेट का भंडाफोड़।
- गिरोह 35,000 रुपये लेकर बताता था गर्भ में लड़का है या लड़की।
- सुनसान मुर्गीफार्म में अल्ट्रासाउंड मशीन से होती थी जांच।
- डिकॉय ऑपरेशन में एक आरोपी धंतर गिरफ्तार, तीन फरार।
- गिरोह हरियाणा के नारनौल क्षेत्र में राजस्थान के लोगों को बना रहा था निशाना।
News In Detail
राजस्थान के झुंझुनूं जिले और हरियाणा के नारनौल क्षेत्र में सक्रिय अवैध भ्रूण लिंग जांच करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। यह गिरोह गर्भवती महिलाओं से 35,000 रुपए वसूल कर उनके गर्भ में पल रहे शिशु का लिंग बताता था। पीसीपीएनडीटी (PC&PNDT) टीम ने डिकॉय ऑपरेशन के दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जबकि तीन अन्य अभी फरार हैं।
कैसे हुआ भंडाफोड़?
पीसीपीएनडीटी टीम को सूचना मिली थी कि हरियाणा के नारनौल क्षेत्र के कुछ गांवों में राजस्थान के लोगों को निशाना बनाकर अवैध भ्रूण लिंग जांच की जा रही है। सूचना के आधार पर टीम ने एक गर्भवती महिला और केयरटेकर को अपने साथ शामिल कर डिकॉय ऑपरेशन की योजना बनाई।
केयरटेकर विकास ने बड़बर निवासी शीशराम से मोबाइल पर संपर्क किया। बातचीत के दौरान 35,000 रुपए में भ्रूण लिंग जांच कराने का सौदा तय हुआ।
सुनसान मुर्गीफार्म में जांच का खेल
आरोपी ने डिकॉय टीम को शाम करीब साढ़े सात बजे गांव गोद के पास फ्लाईओवर के नीचे बुलाया। वहां मोटरसाइकिल पर पहुंचे धंतर ने गर्भवती महिला से 35,000 रुपए लिए और उसे अपने साथ मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले गया।
रेड टीम ने पीछा किया, लेकिन अंधेरे और यातायात के कारण आरोपी नजरों से ओझल हो गए। बाद में डिकॉय महिला ने टीम को बताया कि उसे एक सुनसान मुर्गीफार्म में ले जाया गया, जहां पहले से दो व्यक्ति मौजूद थे।
मुर्गीफार्म के अंदर का राज
डिकॉय महिला के अनुसार, मुर्गीफार्म में उसने दो लोगों को देखा, जिनके नाम रवि (निवासी भैंसावता कलां) और अंतर (निवासी पिचानवा) बताए गए। वहां एक कमरे में अल्ट्रासाउंड मशीन लगी हुई थी। महिला ने आगे बताया कि वहां मशीन और अन्य उपकरणों से मेरी जांच की गई। जांच के बाद उन्होंने बताया कि मेरे गर्भ में लड़की है।
जांच के बाद धंतर ने 35,000 रुपए कथित डॉक्टर रवि को सौंप दिए। इसके बाद आरोपियों ने आपस में राशि बांट ली और महिला को वापस गांव गोद फ्लाईओवर के पास छोड़ दिया।
लौटते समय दबोचा गया आरोपी
रेड टीम ने पहले से जाल बिछा रखा था। रात करीब 11 बजे जैसे ही धंतर महिला को वापस छोड़ने पहुंचा, टीम ने उसे दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान हरियाणा के नारनौल जिला के कलगांव, बुहाना में रहने वाले धंतर पुत्र बनवारीलाल के रूप में हुई।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से सबूत के रूप में मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन और 1500 रुपये की चिन्हित राशि (मिलावटी नोट) को जब्त किया है। इसके अलावा, डिकॉय मरीज के बयान और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) भी सबूत के तौर पर रखे गए।
तीन आरोपी अभी फरार
बड़बर (झुंझुनूं) निवासी शीशराम इस गिरोह का मुख्य डीलर था, जो फोन पर ग्राहकों से संपर्क कर रेट और पूरी डील तय करता था, वह फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर तलाश कर रही है।
भैंसावता कलां का रहने वाला रवि इस पूरे खेल में कथित डॉक्टर बना हुआ था जो अवैध पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन संचालित करता था, वह भी कार्रवाई के भनक लगते ही मशीन सहित मौके से फरार हो गया और उसने अपना ठिकाना बदल लिया है।
इसके अलावा, पिचानवा निवासी अंतर इस गिरोह में सहयोगी की भूमिका में था, जो सुनसान मुर्गीफार्म पर सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं संभालता था; वह भी फिलहाल पुलिस की पकड़ से दूर है और उसकी तलाश में छापेमारी की जा रही है।
PC&PNDT एक्ट के तहत कार्रवाई
गिरफ्तार आरोपी धंतर को सदर थाना नारनौल पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। उसके खिलाफ PC&PNDTएक्टके तहत मामला दर्ज किया गया है। यह कानून भ्रूण का लिंग जानने और लिंग चयन पर रोक लगाता है। अपराध साबित होने पर 3 से 5 साल की जेल और जुर्माने की सजा होती है।
क्या है PC&PNDT एक्ट?
PC&PNDT (प्री-कॉन्सेप्शन और प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स) एक्ट, 1994 एक कानून है जो भ्रूण के लिंग की पहचान करने पर रोक लगाता है। इसका मकसद कन्या भ्रूण हत्या रोकना और लिंगानुपात को संतुलित करना है।
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