15 हजार की कमाई, 6.79 करोड़ का टैक्स नोटिस! अब जूती कारीगर के खाते पर रोक

Jageshwar prasad | Jul 30, 2026, 14:54 IST
15 हजार कमाने वाले जूती कारीगर को मिला 6.79 करोड़ रुपए का जीएसटी टैक्स नोटिस।
राजस्थान में बालोतरा के जूती कारीगर को 6.78 करोड़ रुपए का जीएसटी बकाया नोटिस मिला। इसके चलते उनका बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया है। आशंका जताई जा रही है कि पैन कार्ड का दुरुपयोग हुआ।

समझें क्या है पूरा मामला

  • 15 हजार कमाने वाले के नाम पर मिला करोड़ों का GST बकाया।
  • जूती कारीगर को मिला 6.79 करोड़ रुपए का जीएसटी नोटिस।
  • बैंक ने बकाया GST के चलते फ्रीज कर दिया था खाता।
  • पैन कार्ड का दुरुपयोग कर तमिलनाडु में बनाई फर्जी फर्म।
  • साइबर ठगी की आशंका, साइबर थाने में शिकायत दर्ज।

रोहित पारीक @ बालोतरा



राजस्थान के बालोतरा जिले के गुड़ामालानी निवासी जितेंद्र कुमार जीनगर चमड़े की पारंपरिक जूतियां बनाकर अपने परिवार का गुजारा करते हैं। उनकी मासिक आय महज 10 से 15 हजार रुपए है। वे वर्तमान में प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त से एक कमरा बनवा रहे हैं।



25 जुलाई को जब वे बैंक पहुंचे तो उन्हें अपना बैंक खाता फ्रीज होने की जानकारी मिली। इसके बाद 28 जुलाई को भारतीय स्टेट बैंक की गुड़ामालानी शाखा में अधिकारियों ने उन्हें तमिलनाडु के वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा जारी एक नोटिस सौंपा। जिसमें उन पर करीब 6.79 करोड़ (6,78,97,357) रुपए का भारी-भरकम जीएसटी बकाया दर्शाया गया है।



15 हजार की कमाई, 6.79 करोड़ का टैक्स नोटिस! जूती कारीगर के खाते पर लगी रोक


तमिलनाडु में रजिस्टर्ड मिली फर्जी कंपनी

तमिलनाडु के कृष्णगिरी-2 असेसमेंट सर्किल की ओर से 5 मई 2026 को जारी इस नोटिस के अनुसार, श्री शिवम एक्सपोर्ट्स नामक फर्म पर वर्ष 2017-18 से 2019-20 तक का यह जीएसटी बकाया निकाला गया है।



इसी आधार पर जितेंद्र के पैन नंबर (PAN) से जुड़े बैंक खातों और एफडी को तत्काल प्रभाव से रोक (फ्रीज) दिया गया। पीड़ित जितेंद्र का कहना है कि उन्होंने कभी कोई कंपनी नहीं बनाई और न ही कभी उनका तमिलनाडु से कोई संबंध रहा है।



लोन के दस्तावेजों के दुरुपयोग की आशंका

घटनाक्रम के पीछे पहचान की चोरी और साइबर ठगी की गंभीर आशंका व्यक्त की जा रही है। पीड़ित ने बताया कि वर्ष 2018 में पिता के निधन के बाद उन्होंने बाड़मेर की एक निजी फाइनेंस कंपनी से ऋण लेने के लिए अपने पहचान संबंधी दस्तावेज दिए थे।



उस दौरान सिबिल (CIBIL) स्कोर जांच के नाम पर उनसे मोबाइल पर आए ओटीपी (OTP) भी साझा करवाए गए थे। आशंका है कि उसी दौरान उनके पैन और अन्य दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर फर्जी एक्सपोर्ट कंपनी खड़ी कर दी गई।



अधिकारियों ने दी साइबर थाने में एफआईआर की सलाह

वाणिज्यिक कर विभाग के सहायक कर अधिकारी बिहारीलाल ने मामले में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह पैन कार्ड और व्यक्तिगत दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी फर्म बनाने का केस लगता है। उन्होंने पीड़ित को तुरंत साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की सलाह दी है।



अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि नोटिस मिलने पर विभाग यह जांचने में सहयोग करेगा कि तमिलनाडु में फर्जी कंपनी के पंजीकरण के वक्त किस मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और सहायक दस्तावेजों का प्रयोग किया गया था।



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