श्रीगंगानगर में ड्रोन से हथियार-विस्फोटक की खेप पाकिस्तान से किसने भेजी, जयपुर एटीएस करेगी जांच

Ashish Bhardwaj | Oct 15, 2026, 12:05 IST
श्रीगंगानगर ड्रोन हथियार मामला
श्रीगंगानगर ड्रोन हथियार मामले की जांच अब Rajasthan ATS करेगी। रावला ड्रोन केस में सोमवार रात गिराए गए तीन पैकेटों से 7.75 किलो संदिग्ध विस्फोटक, दो पिस्तौल और 600 से ज्यादा कारतूस मिले थे। पुलिस ने इस मामले में पंजाब के दो युवक गिरफ्तार किया हैं। एटीएस पता लगाएगी कि पाकिस्तान से ड्रोन से हथियार किसने भेजे और किसे सौंपने थे।

श्रीगंगानगर जिले में ड्रोन से हथियार और संदिग्ध विस्फोटक गिराने का मामला सामने आने के बाद इसकी जांच अब जयपुर एटीएस करेगी। रावला क्षेत्र में सोमवार रात ड्रोन से तीन पैकेट गिराए गए थे। इनमें करीब 7.75 किलो संदिग्ध विस्फोटक, दो पिस्तौल, चार मैगजीन और 600 से ज्यादा कारतूस मिले थे। पैकेटों में बैटरियां और रिमोट भी बरामद हुए थे।



मामले की जांच अब जयपुर एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) करेगी। पुलिस ने पंजाब के जालंधर और फिरोजपुर निवासी सुखविंदर सिंह और लखविंदर सिंह को गिरफ्तार किया है। दोनों संदिग्ध परिस्थितियों में तस्करी का सामान लेने पहुंचे थे।



एडीजी एटीएस दिनेश एमएन के मुताबिक, आरोपियों से पूछताछ कर पता लगाया जाएगा कि पाकिस्तान से खेप किसने भेजी थी और इसे राजस्थान में किसे सौंपना था। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।



ATS के सामने 5 बड़े सवाल

इस मामले में जांच एजेंसियों के सामने कई अहम सवाल हैं। सबसे पहले यह पता लगाया जाएगा कि हथियार और संदिग्ध विस्फोटक भेजने के पीछे कौन है और राजस्थान में इसे किस व्यक्ति या नेटवर्क तक पहुंचाया जाना था।



दूसरा सवाल यह है कि इससे पहले सीमा पार से ड्रोन के जरिए कितनी खेप गिराई गईं और उनमें से कितनी तस्करों तक पहुंच सकीं। एजेंसियां यह भी पता करेंगी कि ड्रोन से पैकेट गिराने और जमीन से उन्हें उठाने का काम कौन करता है।



आरोपियों के मोबाइल की होगी जांच

जांच में खेप गिराने की जगह तय करने, लोकेशन साझा करने और सामान की रिकवरी के तरीके की पड़ताल भी होगी। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों और दूसरे राज्यों में उनके संपर्कों की जांच की जाएगी।



इसके अलावा, सुरक्षा एजेंसियां घटनास्थल के आसपास के इलाके की तलाशी लेंगी। यह भी देखा जाएगा कि ड्रोन से पैकेट गिराए जाने के दौरान आसपास के गांवों, किसानों और आम लोगों की आवाजाही पर कोई असर पड़ा या नहीं।



पहले ड्रोन से पहुंचाई जा रही थी हेरोइन

श्रीगंगानगर और आसपास के सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन से नशे की तस्करी के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 और 2025 के दौरान श्रीगंगानगर जिले में अलग-अलग जगहों पर ड्रोन से कुल 68.9 किलो हेरोइन गिराई गई थी।



सीमावर्ती अनूपगढ़, करणपुर और गजसिंहपुर सहित आसपास के इलाकों में ऐसी खेप मिलने के मामले सामने आए थे। मार्च 2026 में भी श्रीगंगानगर के समेजा कोठी थाना क्षेत्र में ड्रोन से गिराई गई 6.462 किलो हेरोइन बरामद हुई थी।



विस्फोटकों के पीछे कौन

अब हथियार और संदिग्ध विस्फोटक मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि क्या इन घटनाओं के पीछे एक ही नेटवर्क काम कर रहा है या अलग-अलग गिरोह सक्रिय हैं।




2025 में तीन सीमावर्ती राज्यों में ड्रोन से तस्करी के 305 मामले

NCB के अनुसार, वर्ष 2025 में राजस्थान, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थ गिराने के कुल 305 मामले सामने आए थे। इनमें पंजाब में 298, जम्मू-कश्मीर में 4 और राजस्थान में 3 मामले दर्ज किए गए।



इन घटनाओं में करीब 468 किलो मादक पदार्थ जब्त किए गए थे। राजस्थान से लगती पाकिस्तान सीमा पर दर्ज तीन मामलों में 2.168 किलो हेरोइन बरामद हुई थी।



ये आंकड़े बताते हैं कि सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन का इस्तेमाल तस्करी के लिए एक सुरक्षा चुनौती बना हुआ है। हालांकि, नशे की तस्करी के इन मामलों और मौजूदा हथियार बरामदगी के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।




मोबाइल और बैंक खातों से खुलेगा नेटवर्क का राज

एटीएस अब गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्कों और बैंकिंग लेन-देन की जांच करेगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि आरोपियों को निर्देश कौन दे रहा था और खेप की डिलीवरी के लिए किस तरह संपर्क किया जाता था।



बरामद 7.75 किलो संदिग्ध विस्फोटक की वास्तविक पहचान और उसके खतरे का स्तर फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, FSL रिपोर्ट दो दिन में मिलने की उम्मीद जताई गई थी। आरोपियों की रिमांड प्रक्रिया और सीमा सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय की कार्रवाई भी की जा रही है।



फिलहाल जांच का मुख्य फोकस खेप भेजने वालों, इसे लेने वाले नेटवर्क और पहले हुई संभावित डिलीवरी का पता लगाने पर है। फॉरेंसिक रिपोर्ट और पूछताछ के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।



Tags:
  • श्रीगंगानगर ड्रोन हथियार मामला
  • एटीएस करेगी जांच
  • पाकिस्तान से ड्रोन से हथियार
  • रावला ड्रोन केस
  • 7.75 किलो संदिग्ध विस्फोटक
  • एटीएस के 5 बड़े सवाल
  • Rajasthan ATS
  • drone smuggling