द सूत्र की खबर का असर: 9 महीने से बंद SMS की टॉक्सिकोलॉजी लैब होगी शुरू, प्रिंसिपल ने दिए आदेश

Raghvendra Singh Rathore | Sept 19, 2026, 19:06 IST
जहर-ओवरडोज की जांच।
द सूत्र की खबर के बाद SMS मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने 9 महीने से बंद टॉक्सिकोलॉजी लैब को शुरू करने के आदेश दिए हैं। जनवरी में उद्घाटन के बावजूद फीस तय न होने से लैब बंद पड़ी थी।

समझें क्या है मामला

  • द सूत्र की खबर का असर, 9 महीने बाद खुलेगी लैब
  • प्रिंसिपल ने दिए आदेश, टॉक्सिकोलॉजी लैब होगी शुरू
  • जनवरी में उद्घाटन, अब जाकर मिली जांच की मंजूरी
  • रोज 25-30 मरीजों को अब मिलेगी सटीक जांच
  • सवाल उठाने का असर, प्रशासन ने लिया एक्शन

सवाई मानसिंह अस्पताल में करीब नौ महीने से बंद पड़ी राजस्थान की सबसे बड़ी टॉक्सिकोलॉजी लैब को लेकर द सूत्र की खबर का असर हुआ है। SMS मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने लैब को चालू करने के आदेश दिए हैं। अब जहर, ड्रग्स और दवाओं के ओवरडोज समेत विषाक्तता से जुड़े गंभीर मामलों की जांच के लिए बनाई गई इस लैब को मरीजों के लिए शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।



द सूत्र ने 16 सितंबर को SMS अस्पताल पहुंचकर लैब की स्थिति की पड़ताल की थी। ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया था कि जनवरी 2026 में उद्घाटन होने के बावजूद सितंबर तक लैब में मरीजों की जांच शुरू नहीं हुई थी। मशीनें उपलब्ध थीं और चार कर्मचारियों का स्टाफ भी था, लेकिन अलग-अलग जांचों की फीस और जरूरी कोड की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से लैब बंद पड़ी थी।



द सूत्र ने उठाया था सवाल- उद्घाटन हुआ तो जांच क्यों नहीं?

द सूत्र की पड़ताल में सबसे बड़ा सवाल यही सामने आया था कि जब लैब शुरू करने के लिए जरूरी प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी तो जनवरी में इसका उद्घाटन क्यों किया गया?



करीब नौ महीने तक मशीनें इस्तेमाल का इंतजार करती रहीं। लैब के लिए मौजूद चार कर्मचारियों से भी दूसरे काम लिए जा रहे थे। दूसरी ओर जहर, ओवरडोज, स्नेक बाइट और विषाक्तता से जुड़े गंभीर मरीज लगातार SMS पहुंच रहे थे।



अस्पताल से जुटाई गई जानकारी के मुताबिक इस तरह के अलग-अलग मामलों को मिलाकर रोज करीब 25 से 30 मरीज SMS पहुंचते हैं।



खबर के बाद प्रिंसिपल ने दिए लैब शुरू करने के निर्देश

अब मामले में SMS मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कदम उठाया है। प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने टॉक्सिकोलॉजी लैब को शुरू करने के निर्देश दिए हैं।



इसके बाद लैब को मरीजों के लिए चालू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। हालांकि जांच वास्तव में किस तारीख से शुरू होगी और फीस तथा जांच कोड से जुड़ी प्रक्रिया किस तरह पूरी की जाएगी, इसकी स्थिति लैब के संचालन के साथ स्पष्ट होगी।



नोडल अधिकारी ने कहा था- कोड मिले तो तुरंत शुरू कर देंगे

द सूत्र ने अपनी पहली रिपोर्ट में लैब के नोडल अधिकारी डॉ. डीके शर्मा से भी बात की थी। उन्होंने बताया था कि लैब के स्तर पर सभी तैयारियां पूरी हैं और जरूरी कोड मिलने के बाद जांच तत्काल शुरू की जा सकती है।



उन्होंने स्पष्ट किया था कि अलग-अलग जांचों की दरें निर्धारित होने की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण संबंधित कोड नहीं मिल पाए थे। इसी वजह से तैयार लैब का इस्तेमाल मरीजों के लिए नहीं हो रहा था।



राजस्थान की पहली अत्याधुनिक पॉइजन डिटेक्शन लैब

SMS में इस लैब को प्रदेश की पहली पॉइजन डिटेक्शन एंड ड्रग लेवल टॉक्सिकोलॉजी लैब के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य शरीर में पहुंचे जहरीले पदार्थों, ड्रग्स और दवाओं की पहचान तथा उनकी मात्रा का पता लगाने में डॉक्टरों की मदद करना है।



विशेष रूप से उन मामलों में यह जांच महत्वपूर्ण हो सकती है, जहां मरीज यह बताने की स्थिति में नहीं होता कि उसने कौन-सा जहरीला पदार्थ या कितनी मात्रा में दवा ली है। ऐसे मरीजों के ब्लड, यूरिन और जरूरत के अनुसार अन्य सैंपल की जांच इलाज की दिशा तय करने में डॉक्टरों की मदद कर सकती है।



9 महीने बाद खुलने जा रहा लैब का ताला

जनवरी में उद्घाटन, मशीनें तैयार, स्टाफ मौजूद और गंभीर मरीजों की लगातार जरूरत—इसके बावजूद सितंबर तक लैब बंद थी। द सूत्र ने इस व्यवस्था को सामने लाते हुए सवाल उठाया था कि सिर्फ जांच की कीमत और कोड तय नहीं होने के कारण मरीजों को नौ महीने से इस सुविधा का लाभ क्यों नहीं मिल रहा?



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