फर्जी डिग्री मामले में एसओजी की बड़ी कार्रवाई, अब तक 15 गिरफ्तार

Ashish Bhardwaj | Jul 19, 2026, 19:12 IST
फर्जी डिग्री मामले
राजस्थान लोक सेवा आयोग की हिंदी लेक्चरर भर्ती में फर्जी डिग्री मामले में एसओजी ने जोधपुर निवासी अशोक विश्नोई को गिरफ्तार किया। अब तक 15 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • RPSC हिंदी लेक्चरर भर्ती फर्जी डिग्री मामले में SOG ने एक और आरोपी गिरफ्तार किया है।
  • जोधपुर निवासी अशोक विश्नोई पर फर्जी MA हिंदी डिग्री उपलब्ध कराने का आरोप है।
  • मेवाड़ यूनिवर्सिटी फर्जी डिग्री मामले में अब तक 15 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।
  • SOG फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
  • जांच में भर्ती प्रक्रिया में संगठित फर्जी डिग्री रैकेट का खुलासा हुआ है।

राजस्थान लोक सेवा आयोग यानी आरपीएससी (RPSC – Rajasthan Public Service Commission) की हिंदी लेक्चरर भर्ती परीक्षा में फर्जी डिग्री के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी एसओजी (SOG – Special Operations Group) ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है।



एसओजी ने जोधपुर निवासी अशोक विश्नोई उर्फ अशोक चोटिया को धर दबोचा है। आरोपी पर मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार, चित्तौड़गढ़ के नाम से फर्जी एमए हिंदी की डिग्री और मार्कशीट उपलब्ध कराने का आरोप है।



फिलहाल आरोपी को पूछताछ के लिए अजमेर लाया गया है। एसओजी अब उससे फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उन्हें उपलब्ध कराने वाले पूरे नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही है।



15 तक पहुंची गिरफ्तारियों की संख्या

इस गिरफ्तारी के साथ ही मेवाड़ यूनिवर्सिटी फर्जी डिग्री मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे रैकेट का दायरा कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही है।



मार्च 2024 में दर्ज हुई थी शिकायत

एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल के मुताबिक यह मामला साल 2022 की आरपीएससी हिंदी लेक्चरर यानी स्कूल शिक्षा भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक अभ्यर्थी की ओर से पेश की गई मेवाड़ यूनिवर्सिटी की एमए हिंदी डिग्री संदिग्ध पाई गई थी।



दस्तावेज सत्यापन के दौरान जांच में यह डिग्री फर्जी होने की पुष्टि हुई। इसके बाद मार्च 2024 में अजमेर के सिविल लाइंस थाने में इस मामले में शिकायत दर्ज कराई गई थी।



संगठित नेटवर्क के जरिए चल रहा था खेल

मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच एसओजी को सौंपी गई। जांच में सामने आया कि फर्जी डिग्री तैयार करने और उसे भर्ती प्रक्रिया में इस्तेमाल कराने के लिए एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था।



एसओजी अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि फर्जी डिग्री बनाने का यह काम आखिर कब से चल रहा था। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि अब तक कितने अभ्यर्थियों ने इस फर्जी डिग्री का इस्तेमाल किया।



विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों की भूमिका पर भी नजर

जांच में इस रैकेट में विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका होने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि इसे लेकर अभी जांच जारी है और कोई पुष्टि नहीं हुई है।



फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने वाले अभ्यर्थियों और उनके सहयोगियों की तलाश भी जारी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ऐसे सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।



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