कोर्ट डेडलाइन पर चुनाव नहीं होने पर राज्य चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट में मांगी माफी

Mukesh Sharma | May 26, 2026, 13:23 IST
Photograph: (the sootr)
राज्य चुनाव आयोग ने हाई कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगी। आयोग ने बताया कि सरकार से आवश्यक डाटा समय पर नहीं मिला, इसलिए 15 अप्रैल की डेडलाइन पर चुनाव कराना संभव नहीं हो पाया।

News In Short

  • राज्य चुनाव आयोग ने हाई कोर्ट में चुनाव में देरी को लेकर बिना शर्त माफी मांगी।
  • आयोग ने कहा- सरकार से समय पर जरूरी डाटा नहीं मिला, इसलिए देरी हुई।
  • आयोग ने साफ किया- कोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवहेलना नहीं की है।
  • राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया- 31 मई 2026 तक चुनाव कराने की डेडलाइन है।
  • हाईकोर्ट ने पूर्व विधायकों की अवमानना याचिका को किया खारिज।

News In Detail

राज्य चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट की 15 अप्रैल की डेडलाइन पर चुनाव नहीं कराने को लेकर बिना शर्त माफी मांगी है। आयोग ने सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार की ओर से जरूरी डेटा समय पर नहीं मिला, इसलिए चुनाव कराने में देरी हुई है।



चुनाव आयोग के अध्यक्ष राजेश्वर सिंह और सचिव राजेश वर्मा ने अदालत में पेश जवाब में कहा कि देरी के लिए आयोग सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं है और न ही उसने कोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवहेलना की है।



अवमानना याचिका क्यों दायर हुई थी?

राजस्थान हाई कोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही सरकार को 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा था।



लेकिन इस आदेश के बाद भी चुनाव आयोग ने मतदाता सूची जारी करने का कार्यक्रम 22 अप्रैल तक तय कर दिया। इस पर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा ने अवमानना याचिका दायर करके कहा था कि आयोग के इस कार्यक्रम से साफ है कि निकाय चुनाव किसी भी हाल में 15 अप्रैल की समय सीमा में पूरे नहीं हो सकते हैं। उन्होंने इसे हाईकोर्ट की जानबूझकर की गई अवमानना बताया था।





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चुनाव आयोग ने क्या कहा?

चुनाव आयोग ने अपने जवाब में कहा कि पंचायतों और नगर निकायों की सीमाएं तय करना, वार्डों का परिसीमन करना और आरक्षण की अंतिम सूची जारी करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। जब तक सरकार यह जानकारी नहीं देती, तब तक आयोग चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकता।



आयोग ने यह भी कहा कि उसने समय सीमा बढ़ाने के लिए 15 अप्रैल से पहले ही अदालत में आवेदन दायर कर दिया था, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि आयोग ने आदेश की अवहेलना की। साथ ही, जिस पुराने केस का हवाला देकर अवमानना याचिका लगाई गई है, उसमें राज्य चुनाव आयोग पक्षकार भी नहीं था। आयोग को न तो नोटिस मिला था और न ही आदेश की प्रति, इसलिए आयोग पर अवमानना लागू नहीं होती।



सरकार ने क्या बताया कोर्ट को?

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि डिवीजन बेंच पहले ही चुनाव कराने के लिए 31 मई 2026 तक की नई समय सीमा तय कर चुकी है। ऐसे में चुनाव में देरी को लेकर दायर अवमानना याचिका अब सारहीन हो गई है। सरकार के अनुसार अब चुनाव नई निर्धारित समय सीमा के अनुसार कराए जाएंगे।



कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल उपमन की खंडपीठ ने पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा की अवमानना याचिका को निस्तारित कर दिया। कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग द्वारा बिना शर्त माफी मांगने के बयान को नोट कर लिया।



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