वीआईपी वाहनों के नाम पर फर्जी फ्यूल बिल, स्टेट मोटर गैराज में बड़ा घपला
समझें क्या है पूरा मामला
- स्टेट मोटर गैराज में वीआईपी गाड़ियों के ईंधन में 2.5 करोड़ का घोटाला।
- 10 लीटर को 100 लीटर दिखाकर ब्लैक मार्केट में बेचा गया ईंधन।
- मामूली खराबी पर चहेते गैराजों को NOC देकर फर्जी बिल पास किए गए।
- ऑडिट में 1 करोड़ गबन की पुष्टि, दो कर्मचारी निलंबित, 40 लाख रिकवर।
- अफसरों ने FIR दर्ज नहीं कराई, डर है कि जांच में उनके नाम आएंगे।
राजस्थान के स्टेट मोटर गैराज में वीआईपी गाड़ियों के ईंधन भरने में बड़ा घोटाला सामने आया है। पिछले दो साल में 2.5 करोड़ रुपए का गबन किया गया।
जयपुर की विशेष ऑडिट टीम ने मार्च से मई के बीच उदयपुर डिपो की जांच की। ऑडिट में 1 करोड़ रुपए के गबन की पुष्टि हो गई।
दो कर्मचारियों को निलंबित किया गया और 40 लाख रिकवर किए गए। लेकिन अफसर अभी भी एफआईआर दर्ज कराने से कतरा रहे हैं।
10 को 100 कैसे बना दिया
घोटाले का तरीका चालाक था। वीआईपी गाड़ियों में जितना ईंधन भरा जाता, बिल वाउचर बनाते वक्त उसमें चालाकी से एक जीरो जोड़ दिया जाता। यानी 10 लीटर की एंट्री को 100 लीटर बना दिया जाता था।
रिकॉर्ड में कई गाड़ियों को एक ही दिन में दो-दो बार फुल टैंक दिखाया गया जबकि हकीकत में वह तेल सीधे ब्लैक मार्केट में जा रहा था।
कमीशन वाली NOC और फर्जी बिल
घोटाले का दूसरा तरीका भी उतना ही शातिर था। गाड़ियों की मामूली खराबी पर चहेते निजी गैराजों को आसानी से एनओसी (No Objection Certificate) दी जाती थी।
इन प्राइवेट गैराजों ने लाखों के फर्जी बिल बनाए। अफसरों ने बिना जांच के उन पर दस्तखत कर दिए।
तीन संभागों का चार्ज एक ही अफसर को
विभाग ने उदयपुर, जोधपुर और जयपुर जैसे तीन भारी-भरकम संभागों का चार्ज एक ही अफसर सुरेश चंद्र शर्मा को सौंप रखा था। वे जयपुर में बैठते थे।
मुख्य आरोपी बाबू दीपक श्रीवास्तव को कई बार नोटिस मिले लेकिन रसूख के दम पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। तब तक पानी सिर से ऊपर नहीं गया था।
ऑडिट में खुली पोल, 40 लाख रिकवर
मार्च से मई 2026 के बीच जयपुर की विशेष ऑडिट टीम ने उदयपुर डिपो पर जांच की। रिकॉर्ड खंगालने पर 1 करोड़ रुपए के सीधे गबन की पुष्टि हुई।
आनन-फानन में दो कर्मचारियों से 40 लाख रुपए रिकवर किए गए। दोनों को निलंबित कर दिया गया। एक संविदा कर्मचारी को हटाया गया।
FIR से क्यों कतरा रहे अफसर
मोटर गैराज विभाग के शीर्ष अधिकारी ने निलंबन और रिकवरी की बात स्वीकारी लेकिन आधिकारिक बयान देने से मना कर दिया। सूत्रों के अनुसार पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने से अफसर इसलिए कतरा रहे हैं क्योंकि जांच होने पर उन्हें खुद के नाम उजागर होने का डर है।
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की निगरानी में रहने वाले इस महकमे में इस स्तर का घपला इस विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है।
ये भी पढ़ें:-
एसीबी को बीज निगम के निदेशक से मिले 1.59 करोड़, भांजे से 85 लाख बरामद
फलोदी विधायक के पीए ने किसे दिए 60 लाख, एसीबी अब खोलेगी राज
बीज में रिश्वतखोरी: रिमांड के बाद आरोपियों को भेजा जेल, एसीबी को मिले अहम सबूत
सलमान को वारंट देने वाले जज पर भ्रष्टाचार का आरोप, सरकार ने किया निलंबित