सुप्रीम कोर्ट ने पलटा राजस्थान हाई कोर्ट का आदेश, पॉक्सो के दोषी की सजा बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के नाबालिग से रेप के दोषी व्यक्ति की सजा निलंबित करने के आदेश को रद्द कर दिया है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथ की बेंच ने यह आदेश नाबालिग पीड़िता के पिता की अपील पर दिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाई कोर्ट को सजा निलंबन पर सुनवाई के दौरान दोष सिद्धि को रद्द होने की संभावनाओं को रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों के आधार पर परखकर फैसला लेना चाहिए था।
यूट्यूबर एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत, ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक
ट्रायल कोर्ट से हुई थी 20 साल कैद की सजा
ट्रायल कोर्ट ने दोषी को 20 साल की कैद की सजा और 50 हजार रुपए के जुर्माने की सजा से दंडित किया था। आरोपी ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने सजा निलंबन की अर्जी पर सुनवाई के दौरान कहा कि डॉक्टर की रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न के कोई संकेत नहीं है और ना ही एफएसएल या डीएनए रिपोर्ट रिकॉर्ड पर है।
जमानत तभी दी जाए, जबकि...
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश से नाइत्तफाकी जताते हुए कहा है कि सीआरपीसी की धारा 389 के तहत दोष सिद्धि के बाद जमानत तभी दी जाए, जबकि रिकॉर्ड पर स्पष्ट व गंभीर तथ्य हों और जिनके आधार पर अदालत प्रथम दृष्टया इस निष्कर्ष पर पहुंच सके कि अंतत: दोष सिद्धि टिकने वाली नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट का अनोखा फैसला : जज बोले- तलाक के लिए ज्योतिष से पूछें सही समय
यौन उत्पीड़न नहीं होने का निष्कर्ष सही नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रकरण के सबूतों की प्रकृति पर समग्र रूप से विचार किए बिना यौन उत्पीड़न नहीं होने का निष्कर्ष सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की सजा निलंबित करने के राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए उसे 20 अक्टूबर तक करौली की स्पेशल पॉक्सो अदालत में सरेंडर करने और सरेंडर नहीं करने पर पुलिस को उसे हिरासत में लेकर जेल भेजने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य बिंदु
- सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के सजा निलंबन का आदेश पलटा।
- आरोपी को 20 अगस्त तक सरेंडर करने का आदेश दिया गया।
- दोष सिद्धि के बाद जमानत का नियम स्पष्ट किया गया।
- कोर्ट ने यौन उत्पीड़न के निष्कर्ष को सही नहीं माना।
FAQ
- 1. सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश को क्यों रद्द किया?
सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला लिया क्योंकि उच्च न्यायालय ने सजा निलंबन के दौरान आरोपों की गंभीरता और साक्ष्यों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया था। - 2. क्या सुप्रीम कोर्ट का फैसला आरोपी के पक्ष में था?
नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की सजा निलंबित करने के फैसले को रद्द कर दिया और उसे 20 अगस्त तक सरेंडर करने का आदेश दिया। - 3. इस मामले में हाई कोर्ट ने क्या निर्णय लिया था?
हाई कोर्ट ने डॉक्टर की रिपोर्ट और साक्ष्यों की कमी के आधार पर आरोपी की सजा निलंबित करते हुए उसे जमानत पर रिहा कर दिया था।
thesootr links
- मध्यप्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- राजस्थान की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
- जॉब्स और एजुकेशन की खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें
- निशुल्क वैवाहिक विज्ञापन और क्लासिफाइड देखने के लिए क्लिक करें
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩👦👨👩👧👧