पैरोल के बाद भी कैदी हिरासत में, सुप्रीम कोर्ट ने दिया 11 लाख के मुआवजे के आदेश

Ashish Bhardwaj | May 30, 2026, 18:40 IST
Photograph: (the sootr)
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के एक दोषी को 11 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। जो वैध पैरोल रिहाई आदेश के बावजूद 24 दिनों तक जेल में रहा। कोर्ट ने इसे अवैध हिरासत और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया।

News In Short

  • सुप्रीम कोर्ट ने 24 दिन जेल में रखे गए कैदी को 11 लाख रुपए मुआवजा देने का दिया आदेश।
  • हाईकोर्ट के पैरोल आदेश के बावजूद प्रशासन ने कैदी को रिहा नहीं किया।
  • कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक देरी किसी की स्वतंत्रता का हनन नहीं कर सकती।
  • आदेश का पालन अनिवार्य है, चाहे कोई चुनौती या बाधा क्यों न हो।
  • अवैध हिरासत के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार ठहराई गई।

News In Detail

सुप्रीम कोर्ट ने पैरोल के आदेश के बावजूद 24 दिन तक जेल में रहने वाले कैदी के मामले में 11 लाख रुपए मुआवजे का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रशासनिक देरी किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन नहीं कर सकती।



जस्टिस संजय करोल और अगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने दाऊदयाल बनाम राजस्थान सरकार केस में 29 मई को यह आदेश दिया था।



क्या था पूरा मामला

अपीलकर्ता ने कुल 4 साल की सजा में से 3 साल, 2 महीने और 20 दिन जेल में काट लिए थे। उसे अभी 9 महीने और 10 दिन की सजा शेष थी। इसके बावजूद, राजस्थान हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने 5 नवंबर 2024 को दिए गए रिहाई आदेश के बाद भी उसे रिहा नहीं किया गया।



सभी दस्तावेजों का सत्यापन और आवश्यक औपचारिकताएं 13 नवंबर 2024 तक पूरी हो गईं, फिर भी अपीलकर्ता को जेल में रखा गया। इसके बाद उन्होंने अदालत में फिर से अपील दायर की। कोर्ट की डिवीजन बेंच (Division Bench) के आदेश पर 6 दिसंबर 2024 को उन्हें रिहा किया गया। इस तरह अपीलकर्ता को हाईकोर्ट के आदेश के बाद 24 दिन तक अवैध रूप से जेल में बंद रखा गया।



सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता (Personal Liberty) कोई मामूली मामला नहीं है। राज्य सरकार को आदेश (Court Order) के पालन में विलंब करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं की धीमी गति किसी भी व्यक्ति की आजादी को सीमित नहीं कर सकती।



मुआवजा आदेश और निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने अपीलकर्ता को 11 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि जेल से रिहाई के आदेश का पालन अनिवार्य है, चाहे कोई बाधा या कानूनी चुनौती क्यों न हो।



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