राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट निकला फर्जी, UGC ने किया खुलासा
News In Short
- यूजीसी ने अलवर के राजीव गांधी इंस्टीट्यूट को फर्जी संस्थान घोषित किया।
- इस संस्थान की डिग्री उच्च शिक्षा या सरकारी नौकरी के लिए वैध नहीं।
- संस्थान भिवाड़ी में संचालित, यूजीसी अधिनियम का कर रहा था उल्लंघन।
- यूजीसी ने इस संस्थान को फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में भी शामिल किया।
- छात्रों और अभिभावकों से अपील कि वे ऐसे संस्थानों में एडमिशन न लें।
News In Detail
Alwar: राजस्थान के भिवाड़ी में एक ऐसे कॉलेज का खुलासा हुआ है, जो न सिर्फ अवैध रूप से चल रहा था, बल्कि छात्रों के करियर से खिलवाड़ भी कर रहा था। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने भिवाड़ी के राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट को फर्जी संस्थान घोषित कर दिया है। आयोग ने साफ किया है कि इस संस्थान की कोई भी डिग्री उच्च शिक्षा या सरकारी नौकरी के लिए वैध नहीं है।
यूजीसी ने साझा की जानकारी
यूजीसी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर आधिकारिक हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यूजीसी ने राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट भिवाड़ी को फर्जी संस्थान घोषित किया है। यह संस्थान मान्यता प्राप्त नहीं है और किसी भी यूजी या पीजी डिग्री देने का अधिकार नहीं रखता। इस संस्थान द्वारा दी गई कोई भी डिग्री उच्च शिक्षा या सरकारी नौकरी के लिए वैध नहीं है। आयोग ने छात्रों, अभिभावकों और आम जनता से अपील की है कि वे ऐसे संस्थानों में एडमिशन न लें और केवल मान्यता प्राप्त संस्थानों को ही चुनें।
छात्रों को बांट रहा था डिग्री
यूजीसी के एक पत्र के अनुसार यह फर्जी संस्थान भिवाड़ी में मनसा चौक पर संचालित था। आयोग को सूचना मिली थी कि यह संस्थान यूजीसी अधिनियम, 1956 का उल्लंघन करते हुए डिग्रियां बांट रहा है। इस संस्थान को न तो यूजीसी की धारा 2(f) या न ही धारा 3 के तहत कोई मान्यता प्राप्त है। यानी यह न तो किसी विश्वविद्यालय से संबद्ध है और न ही इसे डिग्री देने का कोई अधिकार है।
फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में किया शामिल
आयोग ने इस संस्थान का नाम फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल कर लिया है। इस सूची में शामिल होने का मतलब है कि अब यह संस्थान कानूनी रूप से किसी भी प्रकार की डिग्री प्रदान नहीं कर सकता।
छात्रों के लिए चेतावनी
यूजीसी ने स्पष्ट कहा है कि यदि कोई छात्र इस संस्थान में एडमिशन लेता है तो उसकी डिग्री कहीं भी मान्य नहीं होगी। न तो वह आगे की पढ़ाई कर पाएगा और न ही सरकारी नौकरी के लिए आवेदन कर सकेगा। यानी उसकी मेहनत और फीस दोनों बेकार हो सकती है। आयोग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों का एडमिशन कराने से पहले संस्थान की मान्यता की जांच जरूर करें।
क्या है यूजीसी?
यूजीसी शिक्षा मंत्रालय के तहत 1956 में स्थापित वैधानिक निकाय है। इसका काम उच्च शिक्षा में मानकों को बनाए रखना, विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा, परीक्षा और शोध को समन्वित करना है। यह मान्यता प्राप्त संस्थानों को अनुदान भी प्रदान करता है और उच्च शिक्षा के विकास के लिए केंद्र और राज्यों को सलाह देता है।
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