मास्टरमाइंड दलाल समेत 3 डमी कैंडिडेट गिरफ्तार, सरकारी शिक्षक ही निकले युवाओं के भविष्य के दुश्मन

Jageshwar prasad | May 02, 2026, 18:42 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान SOG ने पेपर लीक और डमी कैंडिडेट मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य दलाल अशोक बिश्नोई सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में दो सरकारी शिक्षक भी शामिल हैं। यह गिरोह लाखों रुपए लेकर डमी कैंडिडेट बिठाने का काम करता था।

News In Short

  • SOG ने भर्ती परीक्षाओं में धांधली करने वाले सिंडिकेट के 4 सदस्यों को किया गिरफ्तार।
  • मास्टरमाइंड दलाल अशोक सरकारी शिक्षकों को डमी अभ्यर्थी के रूप में बिठाता था।
  • गिरफ्तार आरोपियों में मनोहर लाल और सुनील शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं।
  • यह गिरोह डमी कैंडिडेट बिठाने के लिए 5 से 10 लाख रुपए तक वसूलता था।
  • SOG अब आरोपियों की खुद की भर्ती प्रक्रिया की भी गहनता से जांच कर रही है।

News In Detail

Jaipur: राजस्थान स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली करने वाले सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी कामयाबी हासिल की है। एसओजी की कार्रवाई में एक दलाल और तीन डमी अभ्यर्थियों को दबोच लिया गया है।



इस गिरोह का सबसे काला चेहरा यह है कि पकड़े गए आरोपियों में दो सरकारी शिक्षक शामिल हैं, जो खुद शिक्षा विभाग का हिस्सा होकर इस भ्रष्टाचार की नींव मजबूत कर रहे थे।



3 डमी और 1 मास्टरमाइंड दलाल गिरफ्तार

SOG की टीम ने खुफिया जानकारी के आधार पर छापेमारी कर अलग-अलग प्रकरणों में शामिल चार प्रमुख किरदारों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:



अशोक बिश्नोई: इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड और मुख्य दलाल, जो सौदेबाजी और नेटवर्क का संचालन करता था।



मनोहर लाल: द्वितीय श्रेणी शिक्षक, जो दूसरों की जगह डमी कैंडिडेट बनकर परीक्षा देने का काम करता था।



सुनील: तृतीय श्रेणी शिक्षक, जो दूसरों की जगह डमी कैंडिडेट बनकर परीक्षा देने का काम करता था।



अशोक ज्याणी: जो दूसरों की जगह डमी कैंडिडेट बनकर परीक्षा देने का काम करता था।



दलाल अशोक बिश्नोई की मॉडस ऑपरेंडी

SOG की जांच में यह खुलासा हुआ है कि मास्टरमाइंड अशोक बिश्नोई का नेटवर्क बेहद शातिराना तरीके से काम करता था। उसका मुख्य काम असली अभ्यर्थी के चेहरे से मिलती-जुलती शक्ल वाले टैलेंटेड युवाओं को खोजना था। अशोक बिश्नोई मनोहर लाल और सुनील जैसे सरकारी शिक्षकों को मोटी रकम का लालच देकर डमी अभ्यर्थी के रूप में तैयार करता था।



यह गिरोह आधार कार्ड और प्रवेश पत्र में फोटो और पहचान के साथ छेड़छाड़ करने में माहिर था, ताकि परीक्षा केंद्र पर किसी को शक न हो। एक परीक्षार्थी को डमी कैंडिडेट के जरिए पास कराने के लिए यह गिरोह 5 से 10 लाख रुपये तक की भारी-भरकम वसूली करता था।



सरकारी नौकरी की आड़ में धोखाधड़ी

इस पूरे प्रकरण का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आरोपी मनोहर लाल और सुनील पहले से ही सरकारी शिक्षक के रूप में सेवा दे रहे थे। SOG अब इस दिशा में जांच कर रही है कि क्या इन आरोपियों ने खुद की भर्ती परीक्षा भी डमी कैंडिडेट की मदद से पास की थी। यदि जांच में यह तथ्य पुष्ट होता है, तो शिक्षा विभाग में तैनात कई अन्य कर्मचारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।



सरकार का जीरो टॉलरेंस

SOG की यह कार्रवाई माफियाओं के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि पेपर लीक और डमी अभ्यर्थियों के माध्यम से सिस्टम में घुसने वाले अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। ADG SOG के नेतृत्व में जारी पूछताछ में REET, सब-इंस्पेक्टर (SI) और पिछली शिक्षक भर्तियों से जुड़े कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है।



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