NIA ने भगोड़े के घर के आगे ढोल-बजवाया, पाकिस्तान से मंगवाता था हथियार-ड्रग्स
समझें क्या है पूरा मामला
- श्रीगंगानगर में NIA ने लॉरेंस गैंग से जुड़े विशाल पचार को सार्वजनिक किया भगोड़ा घोषित।
- उसके घर के बाहर ढोल बजवाकर और पोस्टर चिपकाकर कार्रवाई की गई।
- विशाल पर पाकिस्तान से हथियार और ड्रग्स तस्करी के गंभीर आरोप हैं।
- 2024 में नेपाल के रास्ते भारत छोड़ने और फरार होने की पुष्टि हुई है।
- आरोपी पर इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस और 25 हजार रुपए का इनाम घोषित है।
NIA ने राजस्थान के श्रीगंगानगर में लॉरेंस गैंग के लिए काम करने वाले वांटेड विशाल पचार के घर के आगे ढोल बजवाया। साथ ही पोस्टर चिपकाए गए। विशाल पर आरोप है कि वह पाकिस्तान से हथियार और ड्रग्स मंगवाता था। 2024 में नेपाल के रास्ते वह देश छोड़ चुका है। इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी है और 25 हजार रुपए का इनाम घोषित है।
घर के आगे ढोल, गली में पोस्टर
शुक्रवार को श्रीगंगानगर में एक अनोखी कार्रवाई हुई। NIA की जयपुर टीम विशाल पचार के घर पहुंची। वार्ड नंबर 14, शनि मंदिर के पास स्थित उसके घर के आगे ढोल बजवाया गया। घर पर उसका नाम और तस्वीर वाले पोस्टर चिपकाए गए।
पोस्टर में लिखा था कि न यह मिल रहा है और न ही कोर्ट में पेश हो रहा है। इसके बाद टीम बस स्टैंड, नगर परिषद और लीला चौक पर भी गई। इन सार्वजनिक जगहों पर भी पोस्टर लगाए गए। कार्रवाई देखने के लिए भीड़ जमा हो गई।
कोर्ट ने बताया भगोड़ा
NIA कोर्ट ने विशाल पचार के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। कोर्ट के अनुसार वह कई संगीन धाराओं में आरोपी है। लंबे समय से न कोर्ट में पेश हुआ है और न पुलिस को मिला है।
कोर्ट ने माना कि वह या तो छिपा हुआ है या देश छोड़कर भाग गया है। NIA के अनुसार 2024 में विशाल रोहित गोदारा के संपर्क से नेपाल के रास्ते भारत से फरार हो गया।
पाकिस्तान से आते थे हथियार और ड्रग्स
विशाल पचार श्रीगंगानगर के बॉर्डर इलाके को अच्छी तरह जानता था। लॉरेंस गैंग ने इसी कारण उसे बॉर्डर एरिया में नेटवर्क खड़ा करने की जिम्मेदारी दी। उसने पाकिस्तान के हथियार और ड्रग्स तस्करों से सीधा संपर्क बनाया।
सुनसान खेतों में पाकिस्तान की तरफ से पैकेट गिरवाए जाते थे। विशाल वहां से इन्हें उठवाता था। बाद में पंजाब के बॉर्डर इलाकों में भी नेटवर्क फैला दिया। शूटरों को बड़ी वारदात से पहले हथियार पहुंचाने का काम यही गैंग करती थी।
13 साल में शुरू हुआ अपराध का सफर
विशाल पचार की कहानी बचपन से ही शुरू होती है। उसके पिता इंद्राज पचार शराब के ठेके पर काम करते थे। विशाल भी वहां आता-जाता था। ठेके पर पंजाब और हरियाणा के गैंगस्टर आते थे। यहीं से उसकी दोस्ती बड़े अपराधियों से हुई।
2013 में पहली बार गंगानगर पुलिस ने उसे जुआ खेलते पकड़ा। तब वह नाबालिग था इसलिए कोर्ट ने केवल 100 रुपए जुर्माना लगाकर छोड़ दिया। उसके बाद एक-एक कर 11 वारदातों में उसका नाम आता गया।
कई नाम, कई चेहरे
लॉरेंस गैंग में विशाल को एलेक्स बुलाते हैं। इसके अलावा सरदार खान और एसके नाम से भी वह जाना जाता है। राजस्थान और पंजाब में धमकी देने और फिरौती मांगने के करीब 11 मुकदमे उस पर दर्ज हैं। कुछ मामलों में चालान पेश हो चुका है।
विशाल ने 11 मार्च 2020 को जयपुर से पासपोर्ट बनवाया था। 2022 के आसपास वह लॉरेंस गैंग से पूरी तरह जुड़ गया। NIA की चार्जशीट में उसका नाम पहली बार हाल ही में आया था।
अब इंटरपोल की मदद
विशाल को पकड़ने के लिए अब इंटरपोल की मदद ली जा रही है। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी हो चुका है। लुक आउट नोटिस भी जारी है। श्रीगंगानगर पुलिस ने 25 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया है।
उसके बचपन के दोस्त देवेंद्र भांभू, जो फायरमैन है, को भी गैंग में शामिल किया गया था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है।
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