खींवसर बोले - क्रिटिकल केस आते हैं सरकारी हॉस्पिटल में, सर्वाइवल रेट कम होती है
Jageshwar prasad | Jun 20, 2026, 18:09 IST
कोटा-बीकानेर प्रसूता मौतों पर खींवसर ने दी सफाई
राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कोटा-बीकानेर प्रसूता मौत मामले में कहा कि सरकारी हॉस्पिटल में क्रिटिकल और बिगड़े मरीज आते हैं इसलिए सर्वाइवल रेट कम होती है। जेके लोन की मृत्यु दर 0.01 फीसदी बताई।
समझें क्या है पूरा मामला
- चिकित्सा मंत्री बोले- सरकारी अस्पतालों में क्रिटिकल केस, सर्वाइवल रेट कम।
- कोटा के जेके लोन अस्पताल में सालाना 6 हजार डिलीवरी, मृत्यु दर 0.01 प्रतिशत।
- खींवसर ने कहा- अगर सरकारी अस्पताल खराब होते तो लोग यहां नहीं आते।
- कहा - 299 डिलीवरी सामान्य, एक में समस्या तो उसे मीडिया हाइलाइट करता है।
- खींवसर ने आगे कहा- दौड़ते घोड़े को चाबुक मारो तो दर्द होगा ही।
उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में क्रिटिकल और बिगड़े हुए मरीज आते हैं, ऐसे में सर्वाइवल रेट का कम होना स्वाभाविक है। उन्होंने कोटा के जेके लोन अस्पताल की मृत्यु दर मात्र 0.01 फीसदी बताई। साथ ही कहा कि नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बनाने वाली फैक्ट्री को तुरंत बंद करवा दिया गया है।
बिगड़े मरीज आते हैं, इसलिए मौतें होती हैं
उन्होंने कहा कि यहां बिगड़े हुए केस, इमरजेंसी के केस और क्रिटिकल मरीज आते हैं। जब मरीज की हालत पहले से ही गंभीर है तो सर्वाइवल रेट स्वाभाविक रूप से सामान्य मरीजों से कम होगी।
खींवसर ने मीडिया पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मीडिया को इसमें भी खबर चाहिए होती है। उन्होंने कहा कि सरकारी डॉक्टरों में ज्यादा अनुभव है लेकिन कभी होने वाली मौतें नाकामी नहीं हैं। यदि दौड़ते घोड़े को चाबुक मारोगे तो उसे दर्द और चोट तो लगेगी ही।
कोटा प्रसूता मौत पर बोले
उन्होंने कहा कि वेंटिलेटर पर रखने का मतलब ही होता है कि मामला अत्यंत गंभीर है। ऐसे मरीज के बचने की संभावना वैसे भी बहुत कम होती है।
जेके लोन अस्पताल में मृत्यु दर सिर्फ 0.01 फीसदी
जयपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में रोज करीब 300 डिलीवरी होती हैं। यदि 299 सामान्य होती हैं और एक में दिक्कत आती है तो उसे बड़ा बनाना उचित नहीं है।
नकली इंजेक्शन फैक्ट्री बंद
अस्पतालों को 25 फीसदी बजट की छूट के तहत स्थानीय स्तर पर खरीद की अनुमति दी जाती है। उसी के तहत यह खरीद हुई थी।
उन्होंने कहा कि संबंधित फैक्ट्री को तुरंत बंद करवा दिया गया है। साथ ही स्पष्ट किया कि RMSCL (Rajasthan Medical Services Corporation Limited) के माध्यम से आने वाली दवाइयां पूरी तरह टेस्टेड होती हैं और उनकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होती है।
राजस्थान में 23 हजार स्वास्थ्य इकाईयां
उन्होंने कहा कि सरकार सब कुछ मुफ्त उपलब्ध कराती है - दवाइयां, इलाज, ऑपरेशन। अगर अस्पताल खराब होते तो लोग आते ही नहीं। SOPs (Standard Operating Procedures) को और सख्त किया गया है।
FAQ
- स्वास्थ्य मंत्री खींवसर ने कोटा मौत पर क्या कहा?
खींवसर ने कहा कि कोटा में जिस प्रसूता की मौत हुई वह पहले से क्रिटिकल हालत में अस्पताल आई थी और वेंटिलेटर पर रखी गई थी। वेंटिलेटर पर जाने के बाद बचने की संभावना बहुत कम हो जाती है। जेके लोन अस्पताल की मृत्यु दर मात्र 0.01 फीसदी है। - नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन मामले में राजस्थान सरकार ने क्या किया?
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि जिस फैक्ट्री का इंजेक्शन नकली पाया गया, उसे तुरंत बंद करवा दिया गया है। यह इंजेक्शन लोकल खरीद के तहत आया था। RMSCL के माध्यम से आने वाली दवाइयाँ पूरी तरह टेस्टेड होती हैं।
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