सॉरी! मैं सिफारिश नहीं कर पाऊंगा, पूर्व मंत्री के नोट से समर्थक मायूस
समझें क्या है पूरा मामला
- तबादला सीजन में विश्वेंद्र सिंह की एक अपील ने समर्थकों को किया मायूस।
- पूर्व मंत्री विश्वेंद्र ने यह अपील बाकायदा सोशल मीडिया पर जारी की है।
- अपील में स्पष्ट कहा, मैं तबादलों के लिए सिफारिश नहीं कर पाऊंगा।
- सरकार ने पांच जुलाई तक कर्मचारियों के तबादलों से पाबंदी हटा रखी है।
- तबादलों के लिए राज्य कर्मचारी डिजायर के लिए नेताओं के चक्कर लगा रहे हैं।
Jaipur: राजस्थान में इन दिनों बादल बरसें या न बरसें, लेकिन तबादलों की बारिश पूरी रफ्तार में है। नेताओं के बंगलों के बाहर सुबह की चाय से लेकर देर रात के डिनर तक सिर्फ एक ही शब्द गूंज रहा है - डिजायर (यानी सिफारिशी चिट्ठी)।
इस तबादला सीजन में जहां हर नेता अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए ट्रांसफर की अर्जियां बटोरने में मशगूल है, वहीं पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह की एक अपील ने समर्थकों को निराश कर दिया है। उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में तबादलों चाहने वालों की कोई मदद नहीं करने की अपील की है।
नो एंट्री का वो बोर्ड, जिसने तोड़ा दिल
तबादला सीजन में नेताओं के घरों पर मेला लगना लाजिमी है। कोई अपना ट्रांसफर गृह जिले में चाहता है तो कोई मनपसंद सीट के लिए मनुहार कर रहा है।
भरतपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर बेहद सपाट नोट जारी किया है। उन्होंने साफ लिखा कि राज्य सरकार वर्तमान सांसद व विधायकों की डिजायर पर तबादले मान्य करेगी।
ऐसे में जनता जनार्दन को बताना चाहता हूं कि मैं आपके तबादलों की सिफारिश करने में असमर्थ हूं। कृपया तबादलों के लिए मुलाक़ात करने ना आएं।
दर्द मजबूरी का या तंज?
पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह के इस कदम के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह केवल एक सूचना नहीं, बल्कि मौजूदा व्यवस्था पर करारा तंज भी है।
सरकार ने यह व्यवस्था की है कि तबादलों में विधायकों और सांसदों की सिफारिश को ही तवज्जो दी जाएगी। आम तौर पर यह व्यवस्था सत्तारूढ़ भाजपा से जुड़े विधायक और सांसदों के लिए है।
विश्वेंद्र सिंह फिलहाल कांग्रेस में हैं। वे 2023 के पिछले विधानसभा चुनाव में डीग - कुम्हेर सीट से पराजित हो गए थे। जानकारों का कहना है कि ऐसे में तबादलों में उनकी डिजायर का कोई महत्व नहीं है।
नेताओं के लिए आफत बना तबादला सीजन
प्रदेश में तबादलों का दौर किसी त्योहार से कम नहीं होता, लेकिन नेताओं के लिए यह सिरदर्दी भी लेकर आता है। एक अनार और सौ बीमार वाली स्थिति होती है।
एक ही सीट पर ट्रांसफर के लिए पांच चहेते लाइन में खड़े होते हैं। ऐसे में किसी एक की सिफारिश करो, तो बाकी चार नाराज हो जाते हैं।
करीबियों का कहना है कि विश्वेंद्र सिंह ने अपील के जरिए इस सिरदर्दी का इलाज ढूंढ निकाला है। इससे उनका समय भी बचेगा और समर्थकों को झूठा आश्वासन भी नहीं देना पड़ेगा।
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