संघर्ष, बीमारी और सपने की उड़ान, आईएएस प्रतिभा वर्मा की सफलता की कहानी

Jageshwar prasad | Jun 09, 2026, 17:19 IST
आईएएस प्रतिभा वर्मा की सफलता की कहानी
प्रतिभा वर्मा ने IIT दिल्ली के बाद IRS की नौकरी छोड़ी और लगातार बीमारियों के बावजूद UPSC 2019 में ऑल इंडिया रैंक 3 हासिल की। उनका सफर साहस, धैर्य और स्पष्ट विजन का उदाहरण है, जो युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता पाना केवल बुद्धिमत्ता का खेल नहीं है, बल्कि यह आपके मानसिक जुझारूपन, विपरीत परिस्थितियों में टिके रहने के धैर्य और खुद को बार-बार साबित करने के जुनून की परीक्षा है।



अक्सर लोग एक बार सरकारी नौकरी (जैसे IRS) मिलने के बाद संतुष्ट हो जाते हैं और आगे का जोखिम नहीं लेते। लेकिन कुछ विरले ऐसे होते हैं, जिन्हें अपनी मनचाही मंजिल यानी आईएएस की कुर्सी से कम कुछ भी मंजूर नहीं होता।



ऐसी ही एक जीवंत मिसाल पेश की है उत्तर प्रदेश की बेटी प्रतिभा वर्मा ने। उन्होंने न केवल आईआईटी दिल्ली के बाद मिलने वाले लाखों के प्राइवेट पैकेज को ठुकराया, बल्कि भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की सम्मानित नौकरी मिलने के बाद भी अपने कदम नहीं रोके।



लगातार तीन सालों तक जानलेवा बीमारियों से जूझने के बावजूद उन्होंने साल 2019 की यूपीएससी परीक्षा में पूरे भारत में तीसरी रैंक हासिल कर महिला वर्ग में देश में टॉप किया था। आइए जानते हैं सुल्तानपुर से जयपुर तक के उनके इस असाधारण सफर को।



सुल्तानपुर की माटी और शिक्षा का संस्कारी माहौल

प्रतिभा वर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के एक बेहद प्रतिष्ठित और सुशिक्षित परिवार में हुआ था। कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही नजर आ जाते हैं- यह कहावत प्रतिभा पर पूरी तरह सटीक बैठती है। उनके पिता सुल्तानपुर के एक सरकारी इंटर कॉलेज के रिटायर्ड प्रिंसिपल हैं और उनकी मां एक स्कूल शिक्षिका हैं।



घर में शुरुआत से ही शिक्षा और अनुशासन का बेहतरीन माहौल था। प्रतिभा बचपन से ही अपनी क्लास में अव्वल आती थीं और स्कूल के दिनों से ही उनके भीतर कुछ बड़ा करने की ललक साफ दिखाई देती थी।



स्कूल के दौरान वे राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की सक्रिय सदस्य रहीं, जिसने उनके भीतर समाज के शोषित और वंचित तबके के लिए कुछ करने की नींव रखी।



आईआईटी दिल्ली का सफर और लाखों की नौकरी

स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद प्रतिभा ने देश की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में से एक आईआईटी-जेईई की परीक्षा दी। अपनी कुशाग्र बुद्धि और कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने शानदार रैंक हासिल की और देश के शीर्ष संस्थान आईआईटी दिल्ली में दाखिला लिया।



आईआईटी दिल्ली से बी.टेक की डिग्री पूरी करते ही कॉलेज प्लेसमेंट ड्राइव में एक नामी मोबाइल फोन निर्माता कंपनी ने उन्हें लाखों रुपए सालाना के शानदार पैकेज पर नौकरी दी। प्रतिभा ने इस प्राइवेट कंपनी में दो सालों तक काम किया और कॉर्पोरेट जगत की बारीकियों को समझा।



लेकिन, इस आलीशान और आरामदायक नौकरी के बीच भी उनका मन संतुष्ट नहीं था। कॉलेज के दिनों में एनएसएस (NSS) के दौरान समाज सेवा का जो बीज उनके दिल में बोया गया था, वह अब एक वटवृक्ष बनने के लिए मचल रहा था।



आखिरकार, उन्होंने अपने दिल की सुनी, समाज में जमीनी स्तर पर बदलाव लाने का संकल्प लिया और लाखों की नौकरी से इस्तीफा देकर दिल्ली के मुखर्जी नगर में यूपीएससी की तैयारी के लिए कदम रख दिया।



पहले प्रयास में असफलता से लेकर आईआरएस तक की यात्रा

प्रतिभा ने मुख्य परीक्षा के लिए भौतिक विज्ञान को अपना वैकल्पिक विषय चुना, जो कि यूपीएससी के सबसे कठिन और कम चुने जाने वाले विषयों में से एक माना जाता है। उनकी यह यात्रा इतनी आसान नहीं थी:



पहला प्रयास (2017): प्रतिभा को शुरुआती झटका लगा। वे अपने पहले प्रयास में यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा भी पास नहीं कर पाईं। इस असफलता ने उन्हें निराश नहीं किया, बल्कि उन्होंने अपनी कमियों को सुधारा।



दूसरा प्रयास (2018): उनकी मेहनत रंग लाई। उन्होंने शानदार अंकों के साथ परीक्षा क्रैक की और पूरे देश में 489वीं रैंक हासिल की। इस रैंक के आधार पर उन्हें भारतीय राजस्व सेवा (IRS) आवंटित की गई और उनकी पहली पोस्टिंग नागपुर में बतौर इनकम टैक्स कमिश्नर (ट्रेनी) हुई।



डेंगू, टाइफाइड और कोरोना को दी मात

नागपुर में आईआरएस अधिकारी के रूप में सरकारी नौकरी मिलना किसी भी आम परिवार के लिए अंतिम मंज़िल हो सकती थी, लेकिन प्रतिभा का सपना आईएएस (IAS) बनकर सीधे जनता से जुड़ना था। उन्होंने हार नहीं मानी और आईआरएस की ट्रेनिंग के दौरान ही लंबी छुट्टी ली और अपने तीसरे अटेंप्ट की तैयारी में जुट गईं।



लेकिन इस बार नियति उनकी सबसे कड़ी परीक्षा लेने वाली थी। साल 2018 से 2020 के बीच प्रतिभा तीन बीमारियां हुईं। 2018 में उन्हें खतरनाक डेंगू हो गया, जिससे वे शारीरिक रूप से बेहद कमजोर हो गईं।



2019 में मुख्य परीक्षा के ठीक आसपास वे टाइफाइड की चपेट में आ गईं, जिससे कई दिनों तक वे किताब भी नहीं उठा सकीं। 2020 में जब वे इंटरव्यू की तैयारी कर रही थीं, तब देश में महामारी फैली और वे खुद कोरोना वायरस (Covid-19) से संक्रमित हो गईं।



लगातार इन तीन जानलेवा और थका देने वाली बीमारियों के कारण वे कई महीनों तक पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रही थीं। शारीरिक दर्द और मानसिक तनाव चरम पर था। लेकिन प्रतिभा के भीतर एक मजबूत इरादा था। उन्होंने शारीरिक कमजोरी को अपने हौसलों पर हावी नहीं होने दिया।



इसी बीच, साल 2020 में कोरोना महामारी के कारण यूपीएससी के इंटरव्यू कुछ समय के लिए टाल दिए गए। प्रतिभा ने इस संकट को एक अवसर के रूप में देखा। ठीक होने के बाद उन्होंने मिले हुए अतिरिक्त समय का पूरा सदुपयोग किया और इंटरव्यू की तैयारी को धार दी।



देश में AIR 3 लाकर रचा इतिहास

जब साल 2019 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा का अंतिम परिणाम आया, तो इसमें उन्होंने अविश्वसनीय प्रदर्शन किया। उन्होंने न केवल परीक्षा पास की, बल्कि ऑल इंडिया रैंक 3 हासिल कर पूरे भारत में महिलाओं में शीर्ष स्थान प्राप्त किया।



उनकी यह सफलता उन तमाम युवाओं के लिए एक करारा जवाब थी जो छोटी-मोटी बीमारियों या विपरीत परिस्थितियों का बहाना बनाकर पढ़ाई छोड़ देते हैं। प्रतिभा को उनका पसंदीदा आईएएस पद मिला। वर्तमान में वे राजस्थान कैडर की एक बेहद काबिल अधिकारी के रूप में जयपुर में अपनी सेवाएं दे रही हैं।



आईएएस प्रतिभा वर्मा


आईएएस प्रतिभा वर्मा के जीवन से छात्रों के लिए 5 अमूल्य सूत्र

यदि आप यूपीएससी या किसी भी अन्य प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो प्रतिभा वर्मा का जीवन आपको ये 5 बड़े सबक सिखाता है:



आईएएस प्रतिभा वर्मा के जीवन से छात्रों के लिए 5 अमूल्य सूत्र


कल तक जो प्रतिभा वर्मा सुल्तानपुर की गलियों से निकलकर किताबों के बोझ और बीमारियों के दर्द से कराह रही थीं, आज वे देश की गुलाबी नगरी जयपुर में प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ कर रही हैं।



प्रतिभा वर्मा का यह सफर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, यदि आपके इरादों में सच्चाई और मेहनत में ईमानदारी है, तो भाग्य को भी आपके सामने घुटने टेकने ही पड़ते हैं।



उनकी यह कहानी देश की हर उस बेटी और युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो अभावों और अस्वस्थता के बीच अपने सपनों को हकीकत में बदलने की जंग लड़ रहे हैं।



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