एक ताना, एक जिद और फिर... आईपीएस रतन लाल डांगी की प्रेरणादायक कहानी
हर सफलता के पीछे एक संघर्ष छिपा होता है, लेकिन कुछ कहानियों में संघर्ष के साथ एक ऐसी घटना भी जुड़ी होती है जो पूरी दिशा बदल देती है। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आईजी डॉ. रतन लाल डांगी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जहां एक ताने ने उन्हें हार मानने के बजाय खुद को साबित करने की जिद दे दी।
छोटे पद पर नौकरी, लेकिन लक्ष्य बड़ा
आज जिन डॉ. रतन लाल डांगी को लोग आईपीएस अधिकारी के रूप में जानते हैं, कभी वे एक साधारण सरकारी कर्मचारी थे। साल 1995-97 में वे राजस्थान के नागौर जिले के कुचामन सिटी स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) में लैब असिस्टेंट के पद पर काम कर रहे थे। नौकरी के साथ-साथ वे सिविल सेवा की तैयारी भी कर रहे थे। सीमित साधनों के बावजूद उनका सपना बड़ा था।
रात दिन मेहनत से बिगड़ी तबीयत
डांगी देर रात तक पढ़ाई करते थे। एक रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए। मकान मालिक ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। अगली सुबह जब उन्हें होश आया तो वे अस्पताल के वार्ड में थे। उसी दौरान उनके दफ्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी उनसे मिलने पहुंचे और उन्होंने जो कहा वो दिल दिमाग में अटक गया।
तुम्हारे बस की बात नहीं है
बातचीत के दौरान उस अधिकारी ने उनसे पूछा कि वे इन दिनों क्या कर रहे हैं। डांगी ने बताया कि वे आरएएस और आईएएस (संघ लोक सेवा आयोग) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। यह सुनते ही उस व्यक्ति ने निराशा भरे लहजे में कहा कि तुम जैसे लोग ऐसी परीक्षाएं पास नहीं कर सकते, अपना समय और सेहत क्यों खराब कर रहे हो। यह बात डांगी के लिए किसी झटके से कम नहीं थी।
ताने को बना लिया चुनौती
उस दिन के बाद रतन लाल डांगी ने ठान लिया कि वे अपने प्रयासों से यह साबित करेंगे कि किसी की राय से किसी की क्षमता तय नहीं होती। उन्होंने पूरी मेहनत और लगन से पढ़ाई जारी रखी और अंततः प्रतियोगी परीक्षा पास कर प्रशासनिक सेवा में चयनित हो गए। आगे चलकर उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा में जगह बनाई।
वक्त ने दिया जवाब
करीब चार साल बाद वही व्यक्ति किसी काम से डांगी के कार्यालय पहुंचे। तब तक डांगी अधिकारी बन चुके थे। जब उन्होंने उस व्यक्ति को पुरानी घटना याद दिलाई तो वह कुछ क्षणों के लिए मौन हो गया। डांगी ने मुस्कुराते हुए कहा कि शायद उस दिन का ताना ही उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बन गया।
डांगी की कहानी की असली सीख
आईजी रतनलाल डांगी की कहानी यह बताती है कि जिंदगी में मिलने वाली आलोचना भी कभी-कभी सबसे बड़ी ताकत बन जाती है। उनका मानना है कि दूसरों की राय से ज्यादा जरूरी है अपने लक्ष्य पर विश्वास और लगातार मेहनत।
कैरियर पाथ
डांगी छत्तीसगढ़ के आधा दर्जन जिलों में एसपी, तीन रेंज डीआईजी एवं चार रेंज में आईजी के पद पर पदस्थ रहे हैं। सबसे अति संवेदनशील नक्सल प्रभावित जिला बीजापुर में भी वह 2006-2007 तक रहे हैं।
पोस्टिंग डिटेल्स
| क्र.सं. | पद / स्थान | साल |
| 1. | कांकेर | 2007 - 2008 |
| 2. | कोरबा | 2008 - 2011 |
| 3. | बस्तर | 2011 - 2012 |
| 4. | बिलासपुर | 2012 - 2013 |
| 5. | कोरबा | 2013 - 2014 |
| 6. | सेनानी, रायपुर | 2014 - 2016 |
| 7. | डीआईजी (DIG), कांकेर | 2016 - 2017 |
| 8. | डीआईजी (DIG), दंतेवाड़ा | 2017 - 2018 |
| 9. | आईजी (IG), दुर्ग | 2019 |
| 10. | आईजी (IG), सरगुजा | 2019 - 2020 |
| 11. | आईजी (IG), बिलासपुर | 2021 - 2022 |
| 12. | निदेशक, पुलिस अकादमी | 2023 - 2025 |
| 13. | अतिरिक्त प्रभार, आईजी (IG) रायपुर | 2023 - 2024 |
वर्तमान में वह आईजी नारकोटिक्स पुलिस मुख्यालय ,रायपुर में पदस्थ हैं।
दो बार राष्ट्रपति वीरता पदक से एवं एक बार राष्ट्रपति सराहनीय सेवा पुलिस पदक से भी सम्मानित हो चुके हैं। डांगी ने नक्सल उन्मूलन में सहायक पुलिस आरक्षकों की भूमिका पर PHD भी की है। इतना ही नहीं डांगी ने पुलिस से संबंधित विषयों पर 16 पुस्तकें भी लिखी है। डांगी ने योग के लगभग 900 से भी ज्यादा विभिन्न आसन भी किए हैं जो उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (X, Facebook)पर देखे जा सकते हैं।
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