क्वांटम कम्प्यूटिंग
क्वांटम कम्प्यूटिंग से बैंकों की सुरक्षा पर नया खतरा, आखिर क्यों अभी से तैयारी में जुटे हैं बैंक और RBI?
Raghvendra Singh Rathore | Oct 08, 2026, 17:11 IST
क्वांटम कम्प्यूटर भविष्य में बैंकों के मजबूत एन्क्रिप्शन तोड़ सकते हैं।
अभी साइबर सुरक्षा के लिए AI को बड़ा खतरा माना जा रहा है, लेकिन भविष्य में क्वांटम कम्प्यूटिंग बैंकों के लिए इससे भी बड़ी चुनौती बन सकती है। जानें यह तकनीक क्या है और खतरा आने से पहले ही बैंक अपनी डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने में क्यों जुट गए हैं।
आपके बैंक खाते में जमा पैसा कितना सुरक्षित है? मोबाइल से यूपीआई पेमेंट करते समय आपकी जानकारी कोई चुरा सकता? क्या भविष्य में ऐसी तकनीक आ सकती है, जो बैंकों के मजबूत डिजिटल ताले भी खोल दे? ये सवाल अब दुनिया भर के बैंकों के सामने हैं। इसकी वजह है क्वांटम कम्प्यूटिंग। यह ऐसी तकनीक है, जो भविष्य में कुछ मुश्किल कैलकुलेशन बहुत तेजी से कर सकती है लेकिन इसी ताकत से बैंकों की डिजिटल सुरक्षा को खतरा भी हो सकता।
फिलहाल क्वांटम कम्प्यूटर बैंकों के सुरक्षा सिस्टम नहीं तोड़ रहे लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि तैयारी में देरी महंगी पड़ सकती। भारत में रिजर्व बैंक, केंद्र सरकार और नीति आयोग इस चुनौती से निपटने के साथ क्वांटम तकनीक का फायदा उठाने की तैयारी कर रहे।
आइए इसे समझते हैं कि कैसे भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बैंकिंग सिस्टम के लिए खतरा बन सकता, कैसे क्वांटम कम्प्यूटिंग भी चुनौती पेश कर सकता। इन सब बातों को समझने से पहले ये जान लेते हैं कि क्वांटम कम्प्यूटिंग है क्या।
सबसे पहले इसे आसान भाषा में समझते हैं। हमारे मोबाइल और सामान्य कम्प्यूटर जानकारी को 0 और 1 के रूप में समझते हैं। इसे बिट (Bit) कहते हैं। एक बिट किसी समय पर या तो 0 होता है या 1। क्वांटम कम्प्यूटर में बिट की जगह क्यूबिट (Qubit) होता है। यह क्वांटम फिजिक्स के नियमों पर काम करता। इसकी खासियत है कि यह 0 और 1 के मिले-जुले रूप में भी रह सकता। इसे सुपरपोजिशन (Superposition) कहते हैं।
![क्वांटम कम्प्यूटिंग]()
मान लीजिए आपके सामने एक सिक्का रखा है। जमीन पर गिरने के बाद वह हेड या टेल दिखाता है। सामान्य कम्प्यूटर के बिट को इससे समझ सकते हैं। अब उसी सिक्के को हवा में घूमता हुआ सोचिए। घूमते समय उसे केवल हेड या टेल कहना मुश्किल है। क्यूबिट को समझने के लिए यह एक उदाहरण है। हालांकि, असल क्वांटम कम्प्यूटिंग सिक्के के घूमने से अलग है। इसकी एक और खासियत एंटैंगलमेंट (Entanglement) है। इसमें दो या ज्यादा क्यूबिट इस तरह जुड़े होते हैं कि उनकी स्थिति को अलग-अलग समझना आसान नहीं होता।
इन खूबियों की मदद से क्वांटम कम्प्यूटर कुछ खास गणितीय सवाल सामान्य कम्प्यूटर से कहीं तेजी से हल कर सकते। क्वांटम कम्प्यूटिंग से कई बड़े काम आसान हो सकते हैं, लेकिन इसके कुछ खतरे भी हैं। सबसे बड़ी चिंता ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर है।
दरअसल, आज बैंकों और दूसरी वेबसाइटों की जानकारी सुरक्षित रखने के लिए खास गणितीय तरीकों का इस्तेमाल होता है। सामान्य कम्प्यूटर के लिए इन तरीकों को तोड़ना बेहद मुश्किल होता है। लेकिन भविष्य में बहुत ताकतवर क्वांटम कम्प्यूटर इन गणितीय पहेलियों को कहीं ज्यादा तेजी से सुलझा सकते। इससे डिजिटल जानकारी को सुरक्षित रखने वाली कुछ मौजूदा तकनीकें कमजोर पड़ सकती हैं।
बैंकों की डिजिटल सुरक्षा में कई तरह की तकनीक इस्तेमाल होती हैं। इनमें कुछ ऐसे गणित पर आधारित हैं, जिनके सवाल सामान्य कम्प्यूटर के लिए हल करना बेहद मुश्किल होता है लेकिन भविष्य में ताकतवर क्वांटम कम्प्यूटर इनमें से कुछ सवाल तेजी से हल कर सकते हैं। इसी खतरे को क्रिप्टोग्राफिक थ्रेट (Cryptographic Threat) कहा जाता। आसान भाषा में इसका मतलब है कि डिजिटल ताले की सुरक्षा कमजोर पड़ जाए।
साइबर सुरक्षा कंपनी Mitigata के को-फाउंडर और COO सार्थक दुबे के मुताबिक, अभी AI से जुड़े खतरों की ज्यादा चर्चा हो रही। लेकिन आने वाले सालों में क्वांटम कम्प्यूटिंग से डिजिटल सुरक्षा को होने वाला खतरा भी बड़ी चिंता बन सकता। उन्होंने 2029-2030 के आसपास जोखिम बढ़ने की आशंका जताई है।
मान लीजिए आपने मोबाइल से किसी दोस्त को 20 हजार रुपए भेजे। इस दौरान आपके फोन, बैंक और पेमेंट सिस्टम के बीच जानकारी भेजी जाती है। यह किसी गलत व्यक्ति के हाथ न लगे, इसलिए इसे खास कोड में बदला जाता। इसी तरीके को एनक्रिप्शन (Encryption) कहते हैं।
इसे ऐसे समझिए कि आपने जरूरी कागज एक बॉक्स में बंद कर दिए। बॉक्स को खोलने के लिए सही चाबी चाहिए। बैंकिंग में भी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए डिजिटल चाबियां इस्तेमाल होती हैं। इन चाबियों और कोड को बनाने की तकनीक क्रिप्टोग्राफी (Cryptography) कहलाती है।
डिजिटल सुरक्षा में RSA और ECC जैसी तकनीकें काफी अहम हैं। इन्हें पब्लिक-की क्रिप्टोग्राफी कहा जाता है। इसमें दो डिजिटल चाबियां होती हैं। एक पब्लिक-की, जिसे दूसरों के साथ साझा किया जा सकता है। दूसरी प्राइवेट-की, जिसे गुप्त रखा जाता है। मान लीजिए आपके पास ऐसा बॉक्स है, जिसमें कोई भी आपके लिए संदेश बंद कर सकता है लेकिन उसे खोलने की चाबी सिर्फ आपके पास है।
भारत में UPI (Unified Payment Interface), NEFT (National Electronic Fund Transfer), RTGS और इंटरनेट बैंकिंग जैसे सिस्टम रोजाना बड़ी संख्या में लेनदेन संभालते हैं। इनमें जानकारी सुरक्षित भेजने, बैंक के सिस्टम की पहचान जांचने और डिजिटल सिग्नेचर की पुष्टि करने के लिए कई तरह की सुरक्षा तकनीकें इस्तेमाल होती हैं।
क्वांटम कम्प्यूटिंग से जुड़ा एक बड़ा खतरा Harvest Now, Decrypt Later है। इसका आसान मतलब है कि आज कोड में बंद जानकारी चुराकर रख लो और भविष्य में उसे पढ़ने की कोशिश करो। मान लीजिए किसी हैकर ने आज बैंक से जुड़ी कुछ गोपनीय जानकारी चुरा ली। वह इसे अभी नहीं पढ़ सकता, क्योंकि जानकारी सुरक्षित कोड में बंद है लेकिन भविष्य में उसके पास ताकतवर क्वांटम कम्प्यूटर आ जाए, तो वह पुरानी सुरक्षा तकनीक को तोड़कर उस जानकारी को पढ़ने की कोशिश कर सकता है। यही वजह है कि बैंकों को खतरा सामने आने से पहले अपने सुरक्षा सिस्टम बदलने होंगे।
CERT-In, CSIRT-Fin और SISA की डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, बड़े क्वांटम खतरे को अभी पूरी तरह से महसूस नहीं किया गया है, लेकिन HNDL (Harvest Now, Decrypt Later) स्ट्रेटेजी पहले से ही एक्टिव हैं। इसलिए, पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC)- क्वांटम कंप्यूटर से होने वाले हमलों से बचाने वाले एन्क्रिप्शन एल्गोरिदम-में बदलाव खतरे के सामने आने से पहले शुरू होना चाहिए।
बैंकों के लिए यह तैयारी इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि उनका पूरा कामकाज किसी एक कंप्यूटर सिस्टम पर नहीं चलता। कई बैंक आज भी पुराने सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा ग्राहकों की जानकारी और दूसरी सेवाओं के लिए क्लाउड यानी इंटरनेट पर मौजूद सर्वर, बाहरी टेक्नोलॉजी कंपनियों और ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म की मदद लेते हैं। इन सभी जगहों पर सुरक्षा के अलग-अलग इंतजाम होते हैं। ऐसे में क्वांटम कम्प्यूटिंग के खतरे से बचने के लिए बैंकों को अपने साथ इन सभी जुड़े सिस्टम की सुरक्षा भी मजबूत करनी होगी।
RBI ने मई 2026 में क्वांटम कम्प्यूटिंग से जुड़े खतरों की जांच के लिए आठ सदस्यों की Q-SAFE कमेटी बनाई। इसकी जिम्मेदारी आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर अनिल प्रभाकर को दी गई है।
कमेटी पता लगाएगी कि बैंकों में अभी कौन-कौन सी डिजिटल सुरक्षा तकनीकें इस्तेमाल हो रही हैं और भविष्य में इन्हें कैसे मजबूत किया जा सकता है। वहीं, RBI ने जुलाई 2026 में बैंकों की साइबर सुरक्षा के लिए नए नियम जारी किए। इनके तहत बैंकों को अपने सिस्टम की कमियां दूर करनी होंगी और साइबर हमले या तकनीकी खराबी से बंद हुई सेवाओं को जल्द शुरू करने की तैयारी रखनी होगी।
![Q-SAFE कमेटी]()
नया खतरा भले ही डरावना लगे, लेकिन यह अभी कम से कम कुछ साल दूर है। भारत में कुछ ही क्वांटम कंप्यूटर हैं, हालांकि यह टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स, एकेडेमिक्स और सरकारी कोशिशों जैसे कि 2023 में 6003.65 करोड़ रुपये के खर्च से शुरू किए गए नेशनल क्वांटम मिशन के ज़रिए तेज़ी से बढ़ रही। मिशन के तहत क्वांटम कम्प्यूटर, सुरक्षित संचार और जरूरी उपकरणों पर रिसर्च हो रही है। शुरुआती चरण में 20 से 50 फिजिकल क्यूबिट वाले सिस्टम बनाने का लक्ष्य है। आगे इससे ज्यादा क्षमता वाले सिस्टम विकसित किए जाने हैं।
दुनिया में अभी क्वांटम कम्प्यूटर से साइबर हमलों का खतरा बड़े स्तर पर सामने नहीं आया है। फिर भी बड़ी टेक कंपनियां इसे लेकर अभी से तैयारी कर रही। वे ऐसी नई सुरक्षा तकनीक पर काम कर रही हैं, जिसे भविष्य के ताकतवर क्वांटम कम्प्यूटर भी आसानी से न तोड़ सकें। इसे पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी कहते हैं। कंपनियों ने अपने कुछ प्रोडक्ट्स में इसका इस्तेमाल भी शुरू कर दिया है।
अमेरिका और यूरोप में भी तैयारी शुरू हो चुकी। अमेरिका की सरकारी संस्था NIST (National Institute of Standards and Technology) ने क्वांटम कम्प्यूटर से बचाव के लिए नई डिजिटल सुरक्षा के नियम तय कर दिए हैं। उसने कंपनियों और दूसरी संस्थाओं से पुराने सुरक्षा सिस्टम को धीरे-धीरे नई तकनीक से बदलने को कहा है। वहीं, यूरोपीय संघ ने अपने सदस्य देशों से 2026 के आखिर तक इसकी तैयारी शुरू करने को कहा है। जिन कंप्यूटर सिस्टम पर साइबर हमले का ज्यादा खतरा है, उन्हें जल्द से जल्द और हर हाल में 2030 के आखिर तक क्वांटम कम्प्यूटर से सुरक्षित रखने वाली तकनीक अपनाने का लक्ष्य दिया गया है।
भारत में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के क्वांटम-सुरक्षा रोडमैप में बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा क्षेत्र के लिए चरणों में तैयारी की बात कही गई है। इसके मुताबिक 2027 तक पुराने सुरक्षा सिस्टम की पहचान और नई तकनीक की तैयारी पर जोर है। 2028 तक सबसे जरूरी सिस्टम में क्वांटम-सुरक्षित तकनीक अपनाने और 2029 तक इसे बड़े स्तर पर लागू करने का लक्ष्य बताया गया है।
RBI के क्वांटम सिक्योर एंड अडैप्टिव फाइनेंशियल इकोसिस्टम (Q-SAFE) इनिशिएटिव के तहत मई में जारी एक्सपर्ट कमिटी का मकसद फाइनेंशियल सेक्टर के लिए क्वांटम टेक्नोलॉजी के असर की जांच करना और इसे क्वांटम-सिक्योर करने के लिए एक रोडमैप सुझाना है।
भारत केवल क्वांटम कम्प्यूटर से बचने की तैयारी नहीं कर रहा है। सरकार इस तकनीक से नए कारोबार और रोजगार के मौके भी बनाना चाहती है। नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब ने 4 दिसंबर 2025 को भारत को प्रमुख क्वांटम अर्थव्यवस्था बनाने का रोडमैप जारी किया। इसमें IBM नॉलेज पार्टनर है। इसका लक्ष्य 2035 तक भारत को दुनिया की शीर्ष तीन क्वांटम ताकतों में शामिल करना है। रोडमैप में कम से कम 10 ऐसे स्टार्टअप तैयार करने की बात है, जिनमें हर एक का सालाना कारोबार 10 करोड़ डॉलर से ज्यादा हो। क्वांटम सॉफ्टवेयर और सेवाओं के वैश्विक बाजार में भारत की बड़ी हिस्सेदारी बनाने का लक्ष्य भी रखा गया है।
क्वांटम कम्प्यूटिंग से फिलहाल बैंक खातों को सीधा खतरा नहीं है, लेकिन भविष्य में कुछ डिजिटल सुरक्षा तकनीकें कमजोर पड़ सकती हैं। इसीलिए RBI और दुनिया भर के वित्तीय संस्थान अभी से नए सुरक्षा सिस्टम तैयार कर रहे हैं। भारत के सामने पुराने बैंकिंग सिस्टम को सुरक्षित बनाने के साथ नई तकनीक का फायदा उठाने की चुनौती भी है। सबसे जरूरी बात यह है कि खतरा आने से पहले ही बैंकों की सुरक्षा मजबूत कर ली जाए।
फिलहाल क्वांटम कम्प्यूटर बैंकों के सुरक्षा सिस्टम नहीं तोड़ रहे लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि तैयारी में देरी महंगी पड़ सकती। भारत में रिजर्व बैंक, केंद्र सरकार और नीति आयोग इस चुनौती से निपटने के साथ क्वांटम तकनीक का फायदा उठाने की तैयारी कर रहे।
आइए इसे समझते हैं कि कैसे भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बैंकिंग सिस्टम के लिए खतरा बन सकता, कैसे क्वांटम कम्प्यूटिंग भी चुनौती पेश कर सकता। इन सब बातों को समझने से पहले ये जान लेते हैं कि क्वांटम कम्प्यूटिंग है क्या।
क्वांटम कम्प्यूटिंग क्या है?
सिक्के से समझें क्वांटम कम्प्यूटर
इन खूबियों की मदद से क्वांटम कम्प्यूटर कुछ खास गणितीय सवाल सामान्य कम्प्यूटर से कहीं तेजी से हल कर सकते। क्वांटम कम्प्यूटिंग से कई बड़े काम आसान हो सकते हैं, लेकिन इसके कुछ खतरे भी हैं। सबसे बड़ी चिंता ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर है।
दरअसल, आज बैंकों और दूसरी वेबसाइटों की जानकारी सुरक्षित रखने के लिए खास गणितीय तरीकों का इस्तेमाल होता है। सामान्य कम्प्यूटर के लिए इन तरीकों को तोड़ना बेहद मुश्किल होता है। लेकिन भविष्य में बहुत ताकतवर क्वांटम कम्प्यूटर इन गणितीय पहेलियों को कहीं ज्यादा तेजी से सुलझा सकते। इससे डिजिटल जानकारी को सुरक्षित रखने वाली कुछ मौजूदा तकनीकें कमजोर पड़ सकती हैं।
क्वांटम कंप्यूटिंग बैंकों के एन्क्रिप्शन के लिए खतरा क्यों?
साइबर सुरक्षा कंपनी Mitigata के को-फाउंडर और COO सार्थक दुबे के मुताबिक, अभी AI से जुड़े खतरों की ज्यादा चर्चा हो रही। लेकिन आने वाले सालों में क्वांटम कम्प्यूटिंग से डिजिटल सुरक्षा को होने वाला खतरा भी बड़ी चिंता बन सकता। उन्होंने 2029-2030 के आसपास जोखिम बढ़ने की आशंका जताई है।
बैंकों का एनक्रिप्शन क्या होता है?
इसे ऐसे समझिए कि आपने जरूरी कागज एक बॉक्स में बंद कर दिए। बॉक्स को खोलने के लिए सही चाबी चाहिए। बैंकिंग में भी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए डिजिटल चाबियां इस्तेमाल होती हैं। इन चाबियों और कोड को बनाने की तकनीक क्रिप्टोग्राफी (Cryptography) कहलाती है।
RSA और ECC क्या हैं?
भारतीय बैंकिंग से इनका क्या संबंध है?
बैंक क्वांटम कंप्यूटर का इंतज़ार क्यों नहीं कर सकते?
CERT-In, CSIRT-Fin और SISA की डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, बड़े क्वांटम खतरे को अभी पूरी तरह से महसूस नहीं किया गया है, लेकिन HNDL (Harvest Now, Decrypt Later) स्ट्रेटेजी पहले से ही एक्टिव हैं। इसलिए, पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC)- क्वांटम कंप्यूटर से होने वाले हमलों से बचाने वाले एन्क्रिप्शन एल्गोरिदम-में बदलाव खतरे के सामने आने से पहले शुरू होना चाहिए।
बैंकों के लिए यह तैयारी इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि उनका पूरा कामकाज किसी एक कंप्यूटर सिस्टम पर नहीं चलता। कई बैंक आज भी पुराने सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा ग्राहकों की जानकारी और दूसरी सेवाओं के लिए क्लाउड यानी इंटरनेट पर मौजूद सर्वर, बाहरी टेक्नोलॉजी कंपनियों और ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म की मदद लेते हैं। इन सभी जगहों पर सुरक्षा के अलग-अलग इंतजाम होते हैं। ऐसे में क्वांटम कम्प्यूटिंग के खतरे से बचने के लिए बैंकों को अपने साथ इन सभी जुड़े सिस्टम की सुरक्षा भी मजबूत करनी होगी।
RBI ने साइबर सुरक्षा के लिए क्या किया?
कमेटी पता लगाएगी कि बैंकों में अभी कौन-कौन सी डिजिटल सुरक्षा तकनीकें इस्तेमाल हो रही हैं और भविष्य में इन्हें कैसे मजबूत किया जा सकता है। वहीं, RBI ने जुलाई 2026 में बैंकों की साइबर सुरक्षा के लिए नए नियम जारी किए। इनके तहत बैंकों को अपने सिस्टम की कमियां दूर करनी होंगी और साइबर हमले या तकनीकी खराबी से बंद हुई सेवाओं को जल्द शुरू करने की तैयारी रखनी होगी।
Q-SAFE कमेटी
बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सामने खतरा कितना बड़ा है?
दुनिया में अभी क्वांटम कम्प्यूटर से साइबर हमलों का खतरा बड़े स्तर पर सामने नहीं आया है। फिर भी बड़ी टेक कंपनियां इसे लेकर अभी से तैयारी कर रही। वे ऐसी नई सुरक्षा तकनीक पर काम कर रही हैं, जिसे भविष्य के ताकतवर क्वांटम कम्प्यूटर भी आसानी से न तोड़ सकें। इसे पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी कहते हैं। कंपनियों ने अपने कुछ प्रोडक्ट्स में इसका इस्तेमाल भी शुरू कर दिया है।
अमेरिका और यूरोप में भी तैयारी शुरू हो चुकी। अमेरिका की सरकारी संस्था NIST (National Institute of Standards and Technology) ने क्वांटम कम्प्यूटर से बचाव के लिए नई डिजिटल सुरक्षा के नियम तय कर दिए हैं। उसने कंपनियों और दूसरी संस्थाओं से पुराने सुरक्षा सिस्टम को धीरे-धीरे नई तकनीक से बदलने को कहा है। वहीं, यूरोपीय संघ ने अपने सदस्य देशों से 2026 के आखिर तक इसकी तैयारी शुरू करने को कहा है। जिन कंप्यूटर सिस्टम पर साइबर हमले का ज्यादा खतरा है, उन्हें जल्द से जल्द और हर हाल में 2030 के आखिर तक क्वांटम कम्प्यूटर से सुरक्षित रखने वाली तकनीक अपनाने का लक्ष्य दिया गया है।
भारत का क्वांटम-सेफ रोडमैप क्या है?
RBI के क्वांटम सिक्योर एंड अडैप्टिव फाइनेंशियल इकोसिस्टम (Q-SAFE) इनिशिएटिव के तहत मई में जारी एक्सपर्ट कमिटी का मकसद फाइनेंशियल सेक्टर के लिए क्वांटम टेक्नोलॉजी के असर की जांच करना और इसे क्वांटम-सिक्योर करने के लिए एक रोडमैप सुझाना है।
नीति आयोग भारत को क्वांटम ताकत कैसे बनाएगा?
क्वांटम कम्प्यूटिंग से फिलहाल बैंक खातों को सीधा खतरा नहीं है, लेकिन भविष्य में कुछ डिजिटल सुरक्षा तकनीकें कमजोर पड़ सकती हैं। इसीलिए RBI और दुनिया भर के वित्तीय संस्थान अभी से नए सुरक्षा सिस्टम तैयार कर रहे हैं। भारत के सामने पुराने बैंकिंग सिस्टम को सुरक्षित बनाने के साथ नई तकनीक का फायदा उठाने की चुनौती भी है। सबसे जरूरी बात यह है कि खतरा आने से पहले ही बैंकों की सुरक्षा मजबूत कर ली जाए।
- क्वांटम कम्प्यूटिंग क्या है और यह कैसे काम करती है?
क्वांटम कम्प्यूटिंग एक नई तकनीक है जो क्वांटम फिजिक्स के नियमों पर काम करती है। इसमें सामान्य बिट की जगह क्यूबिट (Qubit) होता है, जो सुपरपोजिशन और एंटैंगलमेंट जैसे गुणों की मदद से गणितीय समस्याओं को सामान्य कम्प्यूटर्स से कहीं तेजी से हल कर सकता है। - क्वांटम कम्प्यूटिंग बैंकों की सुरक्षा को कैसे प्रभावित कर सकती है?
क्वांटम कम्प्यूटिंग बैंकों की सुरक्षा को प्रभावित करते हुए क्रिप्टोग्राफिक थ्रेट पैदा कर सकती है, जिससे वर्तमान में सुरक्षित माने जाने वाले एन्क्रिप्शन तंत्र कमजोर पड़ सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि 2029-2030 के आसपास इसकी चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं। - भारत ने क्वांटम तकनीक से संबंधित सुरक्षा मुद्दों के लिए क्या कदम उठाए हैं?
भारत ने रिजर्व बैंक की ओर से क्वांटम कम्प्यूटिंग से जुड़े खतरों की जांच के लिए Q-SAFE कमेटी बनाई है। इसके अलावा, सरकार ने साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए नए नियम और तरीकों की तैयारी शुरू की है, जिससे वित्तीय संस्थान क्वांटम खतरे से सुरक्षित रह सकें।
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