आज के दिन महात्मा गांधी ने शुरू किया था Non Cooperation Movement, जानें इतिहास
Non-cooperation movement:01 अगस्त 1920 का दिन भारत के इतिहास में दर्ज है। इसी दिन महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन की शुरुआत की थी। यह अंग्रेजों के खिलाफ पहला बड़ा देशव्यापी जन आंदोलन था। इस आंदोलन का विचार बहुत ही सीधा और असरदार था।
गांधी जी का मानना था कि अंग्रेज भारतीयों के सहयोग से राज कर रहे हैं। अगर भारतीय सहयोग बंद कर दें तो अंग्रेज सरकार गिर जाएगी। इसी सोच के साथ पूरे देश में असहयोग आंदोलन शुरू हुआ। लाखों लोग एक साथ गांधी जी के साथ खड़े हो गए।
आंदोलन शुरू करने के मुख्य कारण
अंग्रेजों ने भारत में रोलट एक्ट जैसा काला कानून लागू किया था। इस कानून के तहत किसी को भी बिना मुकदमे जेल भेजा जा सकता था। 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ। इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।
अंग्रेज सरकार के इस क्रूर कदम से लोग बहुत गुस्से में थे। मुसलमान भी खिलाफत आंदोलन को लेकर अंग्रेजों से नाराज थे। गांधी जी ने इन सभी मुद्दों को एक साथ जोड़ने का फैसला किया। फिर उन्होंने 01 अगस्त 1920 को इस आंदोलन का ऐलान कर दिया।
आंदोलन की शुरुआत और लोकमान्य तिलक
01 अगस्त 1920 की सुबह देश के लिए एक दुखी खबर लाई। इसी दिन महान स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का निधन हुआ। पूरा देश अपने इस महान नेता के जाने से शोक में डूब गया। गांधी जी ने तिलक जी की याद में फंड बनाने का फैसला लिया। इसे तिलक स्वराज फंड का नाम दिया गया था।
देशभर के लोगों ने इस फंड में दिल खोलकर पैसा दान किया। कुछ ही महीनों में एक करोड़ रुपए (चौरी चौरा कांड) से ज्यादा इकट्ठा हो गए। इस पैसे का इस्तेमाल आंदोलन को आगे बढ़ाने में किया गया।
देशव्यापी बहिष्कार की अनोखी रणनीति
असहयोग आंदोलन में बहिष्कार को सबसे बड़ा हथियार बनाया गया। भारतीयों ने सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में जाना छोड़ दिया। वकीलों ने अंग्रेजों की अदालतों का पूरी तरह बहिष्कार किया। सरकारी कर्मचारियों ने अपनी अच्छी नौकरियों से इस्तीफे दे दिए।
विदेशी कपड़ों की जगह-जगह होली जलाई जाने लगी। लोगों ने खद्दर और चरखे को अपनाना शुरू कर दिया। गांधी जी ने अपनी कैसर-ए-हिंद की उपाधि भी वापस लौटा दी। अंग्रेजी सरकार इस एकजुटता को देखकर पूरी तरह घबरा गई थी।
समाज के हर वर्ग की भागीदारी
इस आंदोलन में देश के हर वर्ग ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। छात्रों ने अपनी पढ़ाई छोड़कर आंदोलन का रास्ता चुना। महिलाओं ने पहली बार इतनी बड़ी संख्या में सड़कों पर कदम रखा। किसानों ने अंग्रेजों को लगान देने से साफ मना कर दिया।
मजदूरों ने कारखानों में काम करना बंद कर दिया था। व्यापारियों ने विदेशी सामान बेचना पूरी तरह बंद कर दिया। पूरा देश एक झंडे के नीचे एकजुट नजर आ रहा था। भारत के कोने-कोने में केवल इंकलाब के नारे गूंज रहे थे।
असहयोग आंदोलन का बड़ा प्रभाव
इस आंदोलन ने ब्रिटिश हुकूमत की आर्थिक कमर तोड़ दी थी। विदेशी कपड़ों का आयात आधे से भी कम रह गया था। अंग्रेजी सामानों की बिक्री में भारी गिरावट देखने को मिली। देश में जामिया मिलिया और काशी विद्यापीठ जैसे संस्थान बने।
भारतीयों के दिल से अंग्रेजों का डर पूरी तरह खत्म हो गया। लोगों में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी की भावना मजबूत हुई। कांग्रेस पार्टी एक जन-आंदोलन की ताकत बन चुकी थी। आजादी की लड़ाई अब चंद नेताओं तक सीमित नहीं रही थी।
चौरी चौरा की घटना और अंत
यह आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक तरीके से चल रहा था। लेकिन 5 फरवरी 1922 को एक दुखद घटना घट गई। उत्तर प्रदेश के चौरी चौरा में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई।
गुस्साई भीड़ ने पुलिस थाने में आग लगा दी। इस हिंसा में 22 पुलिसकर्मियों की जान चली गई थी। गांधी जी हिंसा के इस रूप से बहुत दुखी हुए। उन्होंने 12 फरवरी 1922 को आंदोलन वापस ले लिया। कई युवा नेता गांधी जी के इस फैसले से दुखी भी हुए।
इतिहास में असहयोग आंदोलन की सीख
असहयोग आंदोलन भले ही बीच में रोक दिया गया था। लेकिन इसने भारत की आजादी की नींव को मजबूत कर दिया। इस आंदोलन ने दिखाया कि एकजुटता में कितनी बड़ी ताकत होती है। अंग्रेजों को समझ आ गया कि वे भारत पर ज्यादा दिन राज नहीं कर सकते।
गांधी जी देश के सबसे बड़े नेता बनकर उभरे थे। इस आंदोलन ने देश को स्वदेशी का असली मतलब सिखाया। 01 अगस्त 1920 का दिन आज भी हमें देशभक्ति की प्रेरणा देता है। यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक स्वर्णिम अध्याय है।
01 अगस्त की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 01 अगस्त का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 01 अगस्त (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1914: प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत हुई और जर्मनी ने रूस के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
- 1995: हब्बल अंतरिक्ष दूरबीन ने शनि ग्रह के एक और नए चंद्रमा की खोज की।
- 2000: ईरान के इतिहास में पहली बार महिलाओं को भी इमाम बनने का अधिकार मिला।
- 2004: श्रीलंका ने भारत को 25 रनों से हराकर एशिया कप जीता और सनत जयसूर्या 'मैन ऑफ द सीरीज' बने।
- 2005: सऊदी अरब के राजा फहद का निधन हुआ और शाहजादा अब्दुल्ला नए शासक बने।
- 2006: जापान ने विश्व की पहली 'भूकंप पूर्व चेतावनी सेवा' (Early Warning Service) की शुरुआत की।
- 2007: हनोई में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गणित ओलंपियाड में भारतीय दल ने तीन रजत पदक जीते।
- 2008: अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भारत के विशेष निगरानी समझौते को मंजूरी दी।
- 1869: उत्तर प्रदेश के प्रथम राज्यपाल हरकोर्ट बटलर का जन्म हुआ।
- 1882: महान स्वतंत्रता सेनानी पुरुषोत्तम दास टंडन का जन्म हुआ।
- 1899: देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू का जन्म हुआ।
- 1910: प्रसिद्ध भारतीय टेस्ट क्रिकेटर मुहम्मद निसार का जन्म हुआ।
- 1913: प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता और निर्माता-निर्देशक भगवान दादा का जन्म हुआ।
- 1924: वेस्ट इंडीज के दिग्गज क्रिकेटर फ्रैंक वोरेल का जन्म हुआ।
- 1924: सऊदी अरब के पूर्व राजा शाह अब्दुल्ला का जन्म हुआ।
- 1932: हिंदी सिनेमा की दिग्गज और प्रसिद्ध अभिनेत्री मीना कुमारी का जन्म हुआ।
- 1939: भारत के प्रसिद्ध साहित्यकार गोविंद मिश्र का जन्म हुआ।
- 1944: गोवा के प्रसिद्ध उपन्यासकार, कथाकार और निबंधकार दामोदर माऊज़ो का जन्म हुआ।
- 1949: उत्तराखंड से भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता बची सिंह रावत का जन्म हुआ।
- 1955: पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कमेंटेटर अरुण लाल का जन्म हुआ।
- 1957: उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख नेता रामवीर उपाध्याय का जन्म हुआ।
- 1993: भारतीय मुक्केबाज़ (बॉक्सर) रोहित टोकस का जन्म हुआ।
- 1591: मुग़ल सम्राट अकबर के दरबार के प्रसिद्ध कवि उर्फ़ी शीराजी का निधन हुआ।
- 1863: महाराजा रणजीत सिंह की रानी और दलीप सिंह की माँ महारानी ज़िन्दाँ रानी का निधन हुआ।
- 1913: हिंदी के प्रथम तिलिस्मी लेखक और 'चंद्रकांता' के रचयिता देवकीनंदन खत्री का निधन हुआ।
- 1920: महान स्वतंत्रता सेनानी, विद्वान और राष्ट्रवादी नेता बाल गंगाधर तिलक का निधन हुआ।
- 1969: भारत के विख्यात और महान तबला वादक पंडित कांठे महाराज का निधन हुआ।
- 1999: भारत के प्रसिद्ध बांग्ला और अंग्रेज़ी लेखक नीरद चंद्र चौधरी का निधन हुआ।
- 2000: ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध प्रगतिशील शायर अली सरदार जाफ़री का निधन हुआ।
- 2001: भारतीय संविधान सभा की एकमात्र मुस्लिम महिला सदस्य बेगम ऐज़ाज़ रसूल का निधन हुआ।
- 2008: भारतीय राजनीतिज्ञ और सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता हरकिशन सिंह सुरजीत का निधन हुआ।
- 2018: असम और मेघालय के पूर्व राज्यपाल व वरिष्ठ राजनेता भीष्म नारायण सिंह का निधन हुआ।
- 2020: समाजवादी पार्टी के पूर्व वरिष्ठ नेता और प्रसिद्ध राजनेता अमर सिंह का निधन हुआ।
- विश्व स्तनपान दिवस (सप्ताह): हर साल 1 अगस्त से विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत होती है।
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