13 जुलाई का इतिहास: मुंबई ब्लास्ट, जब तिहरे धमाकों से दहली थी देश की आर्थिक राजधानी
Mumbai Serial Blasts: वह 13 जुलाई 2011 की एक आम और व्यस्त शाम थी। मुंबई अपनी तेज रफ्तार से दौड़ रही थी। लोग दफ्तरों से निकलकर अपने घरों की तरफ भाग रहे थे। तभी अचानक एक के बाद एक तीन धमाके हुए। इन धमाकों की गूंज ने पूरी मुंबई को हिलाकर रख दिया था।
पल भर में ही हंसता-खेलता शहर मातम में डूब गया। हर तरफ सिर्फ चीख-पुकार और अपनों को ढूंढते बदहवास लोग थे। इस हमले ने देश के सुरक्षा तंत्र को बड़ा झटका दिया था।
आतंकियों ने एक बार फिर मुंबई के हौसले को तोड़ना चाहा था। लेकिन मुंबई ने फिर से खड़े होकर अपनी हिम्मत दिखाई थी। आइए जानते हैं उस खौफनाक दिन की पूरी कहानी।
पहला धमाका: झवेरी बाजार में मची तबाही
शाम के करीब 6 बजकर 45 मिनट हो रहे थे। दक्षिण मुंबई का प्रसिद्ध झवेरी बाजार पूरी तरह व्यस्त था। लोग गहनों की खरीदारी और खाने-पीने में मशगूल थे।
तभी वहां एक खाऊ गली में भयंकर विस्फोट हुआ। यह बम एक मोटरसाइकिल में छिपाकर रखा गया था। धमाका इतना तेज था कि आसपास की इमारतें हिल गईं।
कई लोग इस धमाके की चपेट में सीधे आ गए। चारों तरफ खून और मलबे का ढेर लग गया था। चीखते-चिल्लाते लोग सुरक्षित जगहों की तलाश में भागने लगे। स्थानीय दुकानदारों ने तुरंत राहत का काम शुरू कर दिया था।
दूसरा धमाका: ओपेरा हाउस का वो खौफनाक मंजर
अभी झवेरी बाजार के लोग संभल भी नहीं पाए थे। ठीक एक मिनट बाद दूसरा धमाका ओपेरा हाउस में हुआ। समय करीब 6 बजकर 46 मिनट का था। ओपेरा हाउस हीरों के व्यापार का बहुत बड़ा केंद्र है। शाम के समय वहां व्यापारियों की भारी भीड़ मौजूद थी।
बम एक छाते के अंदर छिपाकर रखा गया था। इस धमाके की तीव्रता बहुत ज्यादा खतरनाक थी। विस्फोट होते ही कई गाड़ियां हवा में उछल गईं। आसपास की दुकानों के कांच टूटकर बिखर गए थे। कई निर्दोष राहगीर इस हमले का शिकार बन गए।
तीसरा धमाका: दादर में बस स्टॉप को बनाया निशाना
आतंकियों की क्रूरता अभी यहीं पर शांत नहीं हुई थी। ठीक 7 बजकर 5 मिनट पर तीसरा धमाका हुआ। इस बार निशाना बना मध्य मुंबई का दादर इलाका। दादर वेस्ट में एक बस स्टॉप के पास विस्फोट हुआ। बम को एक इलेक्ट्रिक पोल के ऊपर लगाया गया था।
उस समय लोग बस पकड़ने के लिए कतार में थे। धमाके के बाद वहां चारों तरफ धुएं का गुबार छा गया। बस स्टॉप पूरी तरह से टूटकर बिखर चुका था। इस तीसरे धमाके ने पूरी मुंबई को खौफ से भर दिया। पूरे शहर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया था।
मुंबई धमाकों के बाद का मंजर
विस्फोटों के तुरंत बाद पूरे शहर में अफरा-तफरी मच गई थी। पुलिस और सुरक्षा बल तुरंत हरकत में आ गए। एंबुलेंस के सायरन से सड़कें गूंजने लगी थीं। लोकल ट्रेनों और बसों को तुरंत रोक दिया गया था। मोबाइल नेटवर्क जाम होने से लोग परेशान हो रहे थे।
हर कोई अपने परिजनों की कुशलता जानना चाहता था। अस्पतालों में घायलों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। डॉक्टरों की टीमें घायलों को बचाने में जुट गईं। रात भर मुंबई के अस्पतालों में अफरा-तफरी रही। पूरा देश मुंबई के लिए दुआएं मांग रहा था।
खूफिया एजेंसियों की जांच की शुरुआत
धमाकों के अगले ही दिन जांच तेजी से शुरू हुई। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विशेष टीमों को मुंबई भेजा था। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने घटनास्थलों से मलबे के सैंपल जुटाए। जांच में पता चला कि अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल हुआ था।
बमों को बनाने में काफी आधुनिक तकनीक अपनाई गई थी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया था। संदिग्ध मोटरसाइकिलों और गाड़ियों के मालिकों की तलाश शुरू हुई। कई राज्यों की पुलिस मिलकर इस केस पर काम कर रही थी। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसियां सबूत जुटा रही थीं।
इंडियन मुजाहिदीन का हाथ
जांच एजेंसियों के रडार पर सबसे पहले इंडियन मुजाहिदीन आया। इस आतंकी संगठन पर पहले भी कई हमलों के आरोप थे। जांच में यासीन भटकल का नाम मुख्य साजिशकर्ता के रूप में उभरा। आतंकियों ने इस हमले की प्लानिंग बहुत पहले ही कर ली थी। उन्होंने मुंबई में किराए के मकान लेकर रेकी की थी।
पुलिस ने देश के अलग-अलग हिस्सों से गिरफ्तारियां कीं। कोर्ट में इन आतंकियों के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश किए गए। इस लंबी कानूनी लड़ाई में कई दोषियों को कड़ी सजा मिली। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी कामयाबी साबित हुई।
घायलों परिवारों का कभी न भूलने वाला गम
इस तिहरे बम धमाके ने कई परिवारों को उजाड़ दिया। हमले में कुल 26 लोगों की जान चली गई थी। करीब 130 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। कई लोगों ने हमेशा के लिए अपने हाथ-पैर गंवा दिए। किसी ने अपना इकलौता बेटा खोया, तो किसी का सुहाग उजड़ गया।
सालों बाद भी पीड़ित परिवारों का दर्द कम नहीं हुआ है। वे आज भी उस काली शाम को याद कर सिहर उठते हैं। सरकार ने पीड़ितों को आर्थिक मदद देने का एलान किया था। लेकिन अपनों को खोने का गम पैसों से कम नहीं होता।
मुंबई का जज्बा और फिर से मुस्कुराती जिंदगी
मुंबई (मुंबई बम धमाकों)को उसकी कभी न हार मानने वाली भावना के लिए जाना जाता है। इस हमले के अगले ही दिन मुंबई फिर काम पर लौट आई। लोकल ट्रेनें फिर से खचाखच भरकर चलने लगीं। झवेरी बाजार के व्यापारियों ने अपनी दुकानें दोबारा खोल दीं।
लोगों ने आतंकियों को साफ संदेश दिया कि वे डरने वाले नहीं हैं। मोमबत्तियां जलाकर शहीदों और मृतकों को श्रद्धांजलि दी गई। एकजुटता दिखाकर लोगों ने नफरत फैलाने वालों को करारा जवाब दिया। यही इस मायानगरी की सबसे बड़ी और असली ताकत है।
13 जुलाई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 13 जुलाई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 13 जुलाई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1803: राजा राम मोहन राय और अलेक्जेंडर डफ ने पांच छात्रों के साथ स्कॉटिश चर्च कॉलेज की शुरुआत की थी.
- 1905: कलकत्ता के साप्ताहिक अखबार 'संजीवनी' ने पहली बार ब्रिटिश सामानों के बहिष्कार का सुझाव दिया था.
- 1929: देश के महान क्रांतिकारी जतिंद्रनाथ ने जेल में अपनी ऐतिहासिक भूख हड़ताल शुरू की थी.
- 1977: भारत सरकार ने भारत रत्न सहित अन्य सभी नागरिक सम्मानों को वापस लेने का एलान किया था.
- 1998: टेनिस स्टार लिएंडर पेस ने अपना पहला एटीपी खिताब जीता और ब्राजील ने सीटीबीटी व एनपीटी पर दस्तखत किए.
- 2000: फिजी देश में तख्तापलट के दौरान बंधक बनाए गए महेंद्र चौधरी सहित 18 लोग रिहा हुए थे.
- 2001: अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने वर्ष 2008 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी चीन के बीजिंग शहर को सौंपी थी.
- 2004: रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने साइबेरिया के विकास के लिए भारत से और मजबूत रिश्ते बनाने की इच्छा जताई थी.
- 2006: परमाणु बम बनाने से जुड़े ईरान के विवादित मसले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को सौंप दिया गया था.
- 2008: अमेरिका में ग्रीन पार्टी ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए पूर्व डेमोक्रेट सिंथिया मैक्किनी को उम्मीदवार बनाया था.
- 2011: मुंबई के तीन अलग-अलग इलाकों में बम विस्फोट हुए, जिसमें 20 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी.
- 1947: विश्व भर में प्रसिद्ध भारतीय समकालीन नर्तक और बेहतरीन कोरियोग्राफर अस्ताद देबू का जन्म हुआ था.
- 1944: मिजो नेशनल फ्रंट के प्रमुख और पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम के दिग्गज राजनीतिज्ञ जोरामथंगा का जन्म हुआ था.
- 1941: देश की प्रतिष्ठित राजनीतिज्ञ और आठवीं लोकसभा की सम्मानित सदस्य टी. कल्पना देवी का जन्म हुआ था.
- 1941: हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं की आधुनिक कहानीकार और जानी-मानी उपन्यासकार सुनीता जैन का जन्म हुआ था.
- 1933: भारतीय राजनीति के दिग्गज नेता भीष्म नारायण सिंह का जन्म हुआ, जो असम-मेघालय के राज्यपाल रहे.
- 1932: हिंदी सिनेमा के पुराने दौर की बेहद खूबसूरत और प्रसिद्ध मुख्य अभिनेत्री बीना राय का जन्म हुआ था.
- 1892: पद्म भूषण सम्मान से नवाजी गईं भारत की बेहद मशहूर शास्त्रीय गायिका केसरबाई केरकर का जन्म हुआ था.
- 2021: साल 1983 में पहली बार विश्वकप जीतने वाली टीम के सदस्य और दिग्गज क्रिकेटर यशपाल शर्मा का निधन हुआ.
- 1995: भारतीय साहित्य जगत की बेहद लोकप्रिय और प्रसिद्ध महिला उपन्यासकार आशापूर्णा देवी का निधन हुआ था.
सोर्स क्रेडिट:
- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की आधिकारिक चार्जशीट और केस डायरी रिपोर्ट (https://www.nia.gov.in)
- Mumbai Serial Blastमहाराष्ट्र पुलिस और मुंबई क्राइम ब्रांच की वार्षिक सुरक्षा समीक्षा रिपोर्ट (https://www.mahapolice.gov.in)
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