18 जुलाई का इतिहास: कैसे पास हुआ था भारत की आजादी का कानून, बंटवारे की स्टोरी
Indian Independence Act 1947: भारत की आजादी की कहानी बहुत बड़ी और बलिदानों से भरी हुई है। हम सब जानते हैं कि भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था। लेकिन क्या आपको पता है कि इसकी कानूनी शुरुआत कब हुई थी? आज से कई साल पहले 18 जुलाई को लंदन में एक बड़ा फैसला हुआ था।
वहां की ब्रिटिश संसद ने भारत की आजादी के प्रस्ताव को हरी झंडी दी थी। इस कानून के पास होने के ठीक 28 दिन बाद हमारा देश आजाद हो गया। आइए इस बेहद रोचक और ऐतिहासिक कहानी को आज बिल्कुल आसान शब्दों में विस्तार से समझते हैं।
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम का इतिहास
भारतीय इतिहास में 18 जुलाई का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। साल 1947 में इसी तारीख को एक बड़ा बदलाव हुआ था। ब्रिटिश हुकूमत ने भारत को छोड़ने का कानूनी फैसला कर लिया था।
लंदन की संसद ने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 को पास किया था। इस एक्ट को ब्रिटिश राजा जॉर्ज छठवें की मंजूरी भी मिल गई थी। यह भारत के लिए एक बड़ी जीत थी।
आजादी से ठीक 28 दिन पहले
इस कानून के पास होने के ठीक 28 दिन बाद एक नया सवेरा हुआ। भारत को ब्रिटिश शासन की दो सौ साल की गुलामी से मुक्ति मिली। देश के लोगों ने खुली हवा में सांस ली।
लंदन में बैठे नेताओं ने भारत के भविष्य का फैसला कर दिया था। इस एक्ट को लाने के पीछे एक लंबी राजनीतिक पृष्ठभूमि काम कर रही थी। देश में आंदोलन बहुत उग्र हो चुके थे।
माउंटबेटन योजना 1947 क्या थी
इस पूरे कानून की नींव लॉर्ड माउंटबेटन ने रखी थी। वह भारत के आखिरी ब्रिटिश वायसराय बनकर दिल्ली आए थे। उन्होंने यहां आकर सभी बड़े नेताओं से मुलाकात की थी।
माउंटबेटन ने 3 जून 1947 को एक खास प्लान पेश किया था। इस प्लान को इतिहास में माउंटबेटन योजना के नाम से जाना जाता है। इसी प्लान में आजादी का पूरा खाका था।
भारत और पाकिस्तान का बंटवारा
माउंटबेटन योजना के तहत ही भारत के विभाजन की बात तय हुई थी। कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने इस योजना को स्वीकार कर लिया था। इसके बाद ही कानून का ड्राफ्ट बना।
ब्रिटिश सरकार ने इस ड्राफ्ट को अपनी संसद में पेश किया था। जुलाई के पहले हफ्ते में ही इसे संसद के सामने रखा गया। वहां इस पर लंबी बहस भी हुई थी।
ब्रिटिश संसद में तुरंत मंजूरी
लंदन की संसद में इस बिल को बहुत जल्दी मंजूरी मिल गई। 4 जुलाई 1947 को यह बिल ब्रिटिश संसद में लाया गया था। इसके बाद यह बहुत तेजी से पास हुआ।
सिर्फ दो हफ्ते के भीतर इसे दोनों सदनों ने पास कर दिया। 18 जुलाई को ब्रिटिश सम्राट ने इस पर अपने हस्ताक्षर कर दिए। इसके बाद यह आधिकारिक कानून बन गया।
ब्रिटिश साम्राज्य के शासन का अंत
इस कानून के बनते ही ब्रिटिश साम्राज्य का भारत पर अंत तय हो गया। कानून में साफ लिखा था कि 15 अगस्त को भारत आजाद हो जाएगा। ब्रिटिश सेना वापस लौट जाएगी।
इस एक्ट ने भारत को दो डोमिनियन राज्यों में बांटने का आदेश दिया। एक हिस्सा भारत बना और दूसरा हिस्सा पाकिस्तान कहलाया। यह बंटवारा बहुत ही दर्दनाक साबित हुआ।
सीमा आयोग का गठन
देश की सीमाओं को तय करने के लिए एक आयोग बनाया गया था। इस सीमा आयोग के अध्यक्ष सर सिरिल रेडक्लिफ बनाए गए थे। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच नक्शा खींचा।
रेडक्लिफ ने पंजाब और बंगाल को दो भागों में विभाजित कर दिया। इस विभाजन के कारण लाखों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा। इतिहास का यह सबसे बड़ा विस्थापन था।
पावर ट्रांसफर की प्रक्रिया समझाइए
इस कानून के तहत सत्ता के हस्तांतरण की प्रक्रिया बहुत सरल रखी गई। दोनों नए देशों को अपनी खुद की संविधान सभा बनाने का अधिकार मिला। वे अपना कानून खुद लिख सकते थे।
जब तक नया संविधान नहीं बनता तब तक पुराना नियम चलना था। साल 1935 का गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट ही अस्थायी रूप से लागू रहा। इससे प्रशासनिक काम चलते रहे।
भारत में आम लोगों की प्रतिक्रिया
भारत के आम लोगों (British rule)के लिए यह खबर मिली-जुली भावनाओं जैसी थी। एक तरफ दो सौ साल की गुलामी खत्म होने की भारी खुशी थी। लोग सड़कों पर जश्न मना रहे थे।
दूसरी तरफ देश के बंटवारे का एक गहरा और बड़ा गम भी था। दंगों और हिंसा की खबरों ने लोगों को बहुत दुखी किया था। फिर भी आजादी का स्वागत हुआ।
18 जुलाई की तारीख का महत्व
आज के समय में हमें 18 जुलाई की इस तारीख को नहीं भूलना चाहिए। यह वही दिन है जब भारत की आजादी पर अंतिम मुहर लगी थी। कानूनी रूप से हम स्वतंत्र हो चुके थे।
यह दिन हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्षों की याद दिलाता है। महात्मा गांधी, नेहरू और पटेल जैसे नेताओं ने इसके लिए बहुत मेहनत की थी। यह दिन बेहद ऐतिहासिक है।
Reference Links:
- ब्रिटिश पार्लियमेंट का आधिकारिक ऐतिहासिक रिकॉर्ड: https://www.parliament.uk/
- भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India) के दस्तावेज: https://nationalarchives.nic.in/
18 जुलाई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 18 जुलाई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 18 जुलाई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1947: भारतीय स्वाधीनता अधिनियम को शाही स्वीकृति मिली।
- 1973: अफ़ग़ानिस्तान में राजशाही का अंत हुआ और गणराज्य की स्थापना की गई।
- 1980: स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण वाहन एस.एल.वी.-3 की मदद से 'रोहिणी' उपग्रह को उसकी कक्षा में सफलतापूर्वक भेजा गया।
- 1980: भारत में टेलीविजन से पहला रंगीन प्रसारण मद्रास (अब चेन्नई) से शुरू किया गया।
- 1994: ब्राजील ने फाइनल जीतकर चौथी बार विश्व कप फ़ुटबाल चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया।
- 1999: विश्व इतिहास में सबसे ज्यादा घंटे तक विमान उड़ाने का रिकॉर्ड बनाने वाले पायलट एडलोग का निधन हुआ।
- 1999: इस्रायल ने फ़िलिस्तीन के ओसामा बरहाम को करीब 6 साल की लंबी क़ैद के बाद आज़ाद किया।
- 2000: रातू जोसेफा इलोइलो ने आधिकारिक तौर पर फिजी के नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की।
- 2002: तेल अवीव में हुए एक भयानक बम विस्फोट में 6 लोगों की मौत हो गई और 40 लोग घायल हुए।
- 2002: मिसाइल मैन डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम भारी मतों से देश के 12वें राष्ट्रपति चुने गए।
- 2002: छत्तीसगढ़ में सड़कों के सुधार और विस्तार के लिए एशियाई विकास बैंक ने 20 करोड़ डालर की सहायता मंजूर की।
- 2003: प्रसिद्ध अर्थशास्त्री वाई. वेणुगोपाल रेड्डी को भारतीय रिजर्व बैंक का नया गर्वनर नियुक्त किया गया।
- 2004: अमेरिका ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पाकिस्तान का 50 करोड़ डालर का पुराना कर्जा पूरी तरह माफ किया।
- 2005: मनमोहन-बुश ऐतिहासिक वार्ता के बाद अमेरिकी प्रशासन ने भारत पर लगे परमाणु ऊर्जा और उच्च प्रौद्योगिकी आपूर्ति के प्रतिबंध हटाने का फैसला किया।
- 2007: हरित क्रान्ति के जनक अमेरिकी कृषि वैज्ञानिक नार्मन बोरलॉग को प्रतिष्ठित क्रांग्रेसनल गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।
- 2008: भारतीय मूल के लेखक सलमान रुश्दी ने प्रमोशन टूर के दौरान महज 57 मिनट में 1000 पुस्तकों पर दस्तखत करने का अनोखा रिकार्ड बनाया।
- 1861: भारत की पहली महिला स्नातक और पहली महिला फ़िजीशियन कादम्बिनी गांगुली का जन्म हुआ।
- 1918: नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित दक्षिण अफ़्रीका के महान भूतपूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला का जन्म हुआ।
- 1927: सुरों के सरताज और विश्व प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक मेहदी हसन का जन्म हुआ था।
- 1931: आंध्र प्रदेश के भूतपूर्व आठवें मुख्यमंत्री भावानम वेंकटरामी रेड्डी का जन्म हुआ था।
- 1935: कांचीपुरम (तमिलनाडु) के कामकोटि पीठ के प्रसिद्ध शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती का जन्म हुआ था।
- 1946: समकालीन हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध और लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार राजेश जोशी का जन्म हुआ।
- 1970: पूर्व आईएएस अधिकारी और वर्तमान भारतीय राजनीतिज्ञ (केंद्रीय मंत्री) अश्विनी वैष्णव का जन्म हुआ।
- 1982: मिस वर्ल्ड और हिंदी सिनेमा की ग्लोबल सुपरस्टार अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा का जन्म हुआ।
- 1996: भारतीय महिला क्रिकेट टीम की धाकड़ और प्रसिद्ध खिलाड़ी स्मृति मंधाना का जन्म हुआ।
- 1948: भारतीय सेना के जांबाज और वीर अमर शहीदों में से एक पीरू सिंह का निधन हुआ।
- 1998: भारत की आजादी की लड़ाई के प्रसिद्ध क्रांतिकारियों में शामिल अब्दुल हमीद कैसर का निधन हुआ।
- 2011: पटियाला घराने के जाने-माने भारतीय शास्त्रीय गायक जगदीश प्रसाद का निधन हुआ था।
- 2012: हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार और बेहद लोकप्रिय अभिनेता राजेश खन्ना का निधन हुआ।
- 2016: सुनहरे दौर की हिंदी फ़िल्मों की सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका मुबारक बेगम का निधन हुआ।
- 2017: सुप्रसिद्ध भारतीय कवि, संस्मरणकार, कहानीकार और उपन्यासकार अजित शंकर चौधरी का निधन हुआ।
- 2022: अपनी मखमली आवाज के लिए ख्याति प्राप्त प्रसिद्ध बॉलीवुड पार्श्वगायक और ग़ज़ल गायक भूपिंदर सिंह का निधन हुआ।
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