21 मई का इतिहास: राजीव गांधी हत्याकांड, जब फूलों का हार पहनने के बाद दहल उठा था पूरा देश

Kaushiki | May 21, 2026, 08:00 IST
rajiv gandhi assassination
साल 1991 में 21 मई की रात तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एक आत्मघाती बम धमाके में हत्या कर दी गई थी। उनकी इसी पुण्यतिथि की याद में हर साल पूरे देश में राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया जाता है।

Rajiv Gandhi Assassination: भारत के इतिहास में 21 मई का दिन एक बेहद काले और दर्दनाक अध्याय के रूप में दर्ज है। इसी दिन देश ने अपने एक बड़े नेता को खोया था। साल 1991 में तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एक सोची-समझी साजिश के तहत बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।



यह कोई साधारण हमला नहीं था। बल्कि यह देश में हुआ पहला सबसे बड़ा आत्मघाती हमला था जिसने सबको चौंका दिया। राजीव गांधी उस समय आम चुनाव के लिए पूरे देश में ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे थे।



वे तमिलनाडु में कांग्रेस उम्मीदवार के लिए प्रचार करने पहुंचे थे। उनकी इसी शहादत को याद करते हुए हर साल 21 मई के दिन को पूरे भारत में राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाता है। आइए इसे जानें...



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राजीव गांधी कौन थें

राजीव गांधी भारत के इतिहास में एक बहुत ही महत्वपूर्ण नाम हैं। वे हमारे देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री थे। उनका जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था। वे देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे और पंडित जवाहरलाल नेहरू के पोते थे।



शुरुआती दिनों में राजीव गांधी को राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी। वे एक कमर्शियल पायलट के रूप में काम करते थे। लेकिन 1980 में उनके भाई संजय गांधी की अचानक मृत्यु। फिर 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, उन्हें देश की कमान संभालनी पड़ी। केवल 40 साल की उम्र में उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।



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राजीव गांधी को भारत में कंप्यूटर और डिजिटल क्रांति का जनक (Father of Information Technology) माना जाता है। उन्होंने देश में कंप्यूटर, टेलीकॉम और मॉडर्न टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दिया।



इसके अलावा, उन्होंने युवाओं को वोटिंग का अधिकार देने के लिए उम्र सीमा को 21 से घटाकर 18 साल किया। 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक दुखद आत्मघाती हमले में उनकी मृत्यु (राजीव गांधी पुण्यतिथि) हो गई।



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कैसे हुआ था वो भीषण बम धमाका

21 मई 1991 की रात करीब दस बजकर दस मिनट पर राजीव गांधी का काफिला श्रीपेरंबदूर की चुनावी जनसभा के मैदान में पहुंचा था। कार से उतरने के बाद वे मंच की तरफ आगे बढ़ रहे थे।



रास्ते में बहुत सारे शुभचिंतक और कांग्रेस कार्यकर्ता उनका स्वागत कर रहे थे। तभी भीड़ में से लिट्टे (LTTE) की एक महिला आतंकवादी धनु आगे बढ़ी। उसने बेहद शातिराना तरीके से राजीव गांधी को फूलों का हार पहनाया।



हार पहनाने के बाद वह सम्मान दिखाने के बहाने राजीव गांधी के पैर छूने के लिए नीचे की तरफ थोड़ा झुकी। पैर छूते ही उसने अपनी कमर पर बंधे आरडीएक्स (RDX) से भरे बेल्ट के बटन को दबा दिया। इसके बाद वहां एक जोरदार धमाका हुआ।



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श्रीपेरंबदूर के मैदान में मची चीख-पुकार

वह धमाका इतना ज्यादा भीषण था कि उसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक साफ सुनाई दी थी। पूरे मैदान में धुएं का गुबार छा गया। धमाके की चपेट में आने से राजीव गांधी, आत्मघाती हमलावर धनु और लगभग चौदह अन्य लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी। इस भयानक विस्फोट में कई सुरक्षाकर्मी और पुलिस अधिकारी भी शहीद हो गए थे।



वहां मौजूद दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। विस्फोट की तीव्रता इतनी खतरनाक थी कि आस-पास के शव पूरी तरह क्षत-विक्षत हो गए थे। चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार मची हुई थी। वहां मौजूद एक स्थानीय फोटोग्राफर की भी इस धमाके में मौत हो गई। लेकिन उसका कैमरा इस पूरे खौफनाक मंजर का सबूत बन गया।



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क्यों की गई थी राजीव गांधी की हत्या

पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या के पीछे श्रीलंका के आतंकवादी संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम यानी लिट्टे का हाथ था। दरअसल साल 1987 में जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने एक बड़ा ऐतिहासिक फैसला लिया था।



उन्होंने श्रीलंका में शांति सेना भेजी थी। इस भारतीय शांति सेना (IPKF) का मकसद श्रीलंका सरकार और लिट्टे के बीच चल रहे गृहयुद्ध को पूरी तरह शांत करना था।



लेकिन भारतीय सेना के इस कदम से लिट्टे का कमांडर प्रभाकरन बहुत ज्यादा नाराज हो गया था। वह भारत से बदला लेना चाहता था। लिट्टे को डर था कि अगर राजीव गांधी दोबारा प्रधानमंत्री बन गए, तो वे फिर से लिट्टे के खिलाफ सख्त एक्शन ले सकते हैं।



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राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस का महत्व

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मृत्यु के बाद भारत सरकार ने 21 मई को राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस घोषित करने का फैसला लिया। इस विशेष दिन को मनाने का सबसे बड़ा उद्देश्य देश के युवाओं को उग्रवाद और आतंकवाद के खतरों के प्रति जागरूक करना है।



इस दिन सभी सरकारी दफ्तरों, स्कूलों और कॉलेजों में आतंकवाद के खिलाफ डटकर खड़े होने की एक पवित्र शपथ ली जाती है। देश के सभी नागरिक अहिंसा और शांति को बढ़ावा देने का पूरा संकल्प लेते हैं।



यह दिन समाज में एकता बनाए रखने की सीख देता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि आतंकवाद किसी भी देश की तरक्की और मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है। कब हुई थी राजीव गांधी की हत्या



हमें मिलकर इसे मिटाना होगा। इस दिन को मनाने का उद्देश्य समाज में शांति और सद्भाव को बढ़ावा देना, युवाओं को आतंकवाद के खतरों के प्रति सचेत करना और देश की एकता व संप्रभुता की रक्षा के लिए नागरिकों को एकजुट करना है।



Reference Links:

21 मई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं

आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 21 मई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।



आइए जानते हैं 21 मई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-



विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

  • 1502: पुर्तगाल के खोजकर्ता जोआओ दा नोवा ने दक्षिण अटलांटिक महासागर में ऐतिहासिक 'सेंट हेलेना द्वीप' की खोज की थी।
  • 1819: अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर की सड़कों पर पहली बार साइकिल देखी गई, जिसे उस जमाने में 'स्विफ्ट वॉकर' कहा जाता था।
  • 1840: प्रशांत महासागर में स्थित खूबसूरत द्वीप देश न्यूजीलैंड को आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन का उपनिवेश घोषित किया गया था।
  • 1851: दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया के इतिहास में एक बड़ा मानवीय सुधार हुआ और वहां गुलामी प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।
  • 1881: दुनिया भर में मानवीय सहायता के लिए मशहूर 'अमेरिकी रेड क्रॉस संस्था' (American Red Cross) की स्थापना की गई थी।
  • 1904: फ्रांस की राजधानी पेरिस में फुटबॉल की सबसे बड़ी ग्लोबल संस्था 'अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ' (FIFA) की स्थापना हुई थी।
  • 1918: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (US House of Representatives) ने एक ऐतिहासिक फैसले के तहत महिलाओं को मतदान करने की अनुमति दी थी।
  • 1927: अमेरिकी पायलट चार्ल्स लिंडनबर्ग ने अकेले और बिना रुके न्यूयॉर्क से पेरिस के बीच पहली बार विमान से अटलांटिक महासागर पार किया था।
  • 1935: क्वेटा शहर (जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है) में आए भीषण भूकंप में 30 हजार से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
  • 1961: दक्षिण अफ्रीका के मोंटगुमरी शहर में डॉ. मार्टिन लूथर किंग की सभा के दौरान श्वेत और अश्वेत लोगों के बीच हिंसक रंगभेद टकराव हुआ था।
  • 1991: तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक आत्मघाती बम धमाके में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की बेहद दुखद हत्या कर दी गई थी।
  • 1994: भारत की सुष्मिता सेन ने मनीला में आयोजित 43वीं मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता का खिताब जीतकर देश का नाम रोशन किया था।
  • 1996: मशहूर सॉफ्ट ड्रिंक कंपनी पेप्सी ने दुनिया में पहली बार अंतरिक्ष (Space) में एक विज्ञापन फिल्म बनाने की बड़ी घोषणा की थी।
  • 1998: इंडोनेशिया देश पर लगातार 32 वर्षों तक तानाशाही शासन करने वाले राष्ट्रपति सुहार्तों ने भारी विरोध के बाद अपना त्यागपत्र दिया था।
  • 2002: बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति एच.एम. इरशाद को कोर्ट द्वारा एक मामले में दोषी पाते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी।
  • 2003: दुनिया के 190 से भी अधिक देशों ने जिनेवा में इकट्ठा होकर तंबाकू के इस्तेमाल के खिलाफ एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय संधि को मंजूरी दी थी।
  • 2021: भारत के प्रसिद्ध पर्यावरणविद और ऐतिहासिक 'चिपको आंदोलन' के प्रमुख नेता सुंदरलाल बहुगुणा का कोरोना काल के दौरान निधन हो गया था।

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