22 मई का इतिहास: मुगल सम्राट ने राजा राममोहन राय को क्यों दी थी राजा की उपाधि, जानें पूरी कहानी

Kaushiki | May 22, 2026, 08:00 IST
raja ram mohan roy
आधुनिक भारत के जनक राजा राममोहन राय का जन्म 22 मई 1772 को हुआ था। उन्होंने समाज से सती प्रथा और बाल विवाह जैसी कुरीतियों को खत्म किया। उन्होंने ब्रह्म समाज की स्थापना की और शिक्षा के क्षेत्र में बहुत बड़े बदलाव किए।

आज के दिन की कहानी: आज का दिन हमारे देश के इतिहास में बहुत ही ज्यादा खास है। आज हम एक ऐसे महान इंसान के बारे में बात कर रहे हैं। इस महान नायक का नाम राजा राममोहन राय है। इनका जन्म 22 मई 1772 को बंगाल के राधानगर में हुआ था।



उनका जन्म एक बहुत ही संस्कारी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन से ही वे बहुत ही तेज बुद्धि के बालक थे। उन्होंने कम उम्र में ही कई भाषाएं सीख ली थीं। उन्हें अरबी, फारसी, संस्कृत और अंग्रेजी का बहुत अच्छा ज्ञान था।



Raja Ram Mohan Roy: 22 मई को राजा राम मोहन राय की जयंती, आधुनिक भारत के जनक के बारे में 10 अनसुनी ब


कौन थे राजा राममोहन राय

राजा राममोहन राय भारत के एक महान सोशल रिफॉर्मर और एडुकेशनिस्ट थे। उन्हें आधुनिक भारत का जनक (Father of Modern India) और भारतीय पुनर्जागरण का अग्रदूत (Pioneer of Indian Renaissance) कहा जाता है। उनका जन्म 22 मई 1772 को बंगाल में हुआ था।



राजा राममोहन राय का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक योगदान समाज से सती प्रथा जैसी दर्दनाक और अमानवीय कुप्रथा को हमेशा के लिए खत्म करवाना था। उनके कड़े संघर्षों और प्रयासों के कारण ही साल 1829 में ब्रिटिश सरकार को इस पर पूरी तरह रोक लगाने का कानून बनाना पड़ा।



इसके अलावा उन्होंने समाज में फैले अंधविश्वास, बाल विवाह और जातिवाद को दूर करने के लिए साल 1828 में ब्रह्म समाज (Brahmo Samaj) की स्थापना की। वह महिलाओं की शिक्षा, उनके अधिकारों और विधवा पुनर्विवाह के बहुत बड़े समर्थक थे। उन्होंने देश में अंग्रेजी और विज्ञान की आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा दिया। साल 1833 में इंग्लैंड में उनका निधन हुआ था।



Raja Ram Mohan Roy B'day: राममोहन राय क्यों माने जाते हैं आधुनिक भारत के जनक? - Raja Ram Mohan Roy


क्यों कहा जाता है इन्हें आधुनिक भारत का जनक

उस जमाने में भारतीय समाज में बहुत सारी कुरीतियां थीं। लोग अंधविश्वास और पुरानी रूढ़ियों में जकड़े हुए थे। राजा राममोहन राय ने इस सोच को बदलने का काम किया। उन्होंने लोगों को तर्क और विज्ञान की राह दिखाई।



उन्होंने समाज को एक नई दिशा देने की शुरुआत की थी। इसीलिए उन्हें भारतीय पुनर्जागरण (Indian Renaissance) का अग्रदूत कहा जाता है। उन्हें आधुनिक भारत का पिता भी माना जाता है। उन्होंने समाज को नया रूप देने के लिए बहुत संघर्ष किया।



Age of Revolution: Brahmo and Arya Samaj


सती प्रथा के खिलाफ जंग

उस समय समाज में सती प्रथा (Status of Women in Indian Society)जैसी दर्दनाक परंपरा थी। पति की मौत के बाद पत्नी को जिंदा जला दिया जाता था। राजा राममोहन राय के भाई की मृत्यु के बाद यह हुआ। उनकी भाभी को उनकी आंखों के सामने सती होना पड़ा।



इस घटना ने उनके दिल और दिमाग को झकझोर दिया था। इसके बाद उन्होंने सती प्रथा के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। उन्होंने समाज के ठेकेदारों से बहुत लंबी लड़ाई लड़ी। इस काम में उन्हें बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।



आखिरकार साल 1829 में उन्हें बड़ी सफलता मिली। उनके प्रयासों से गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक ने कानून बनाया। इस कानून के तहत सती प्रथा पर पूरी तरह रोक लग गई। यह भारतीय इतिहास का बहुत बड़ा बदलाव था।



Raja Ram Mohan Roy Birth anniversary who stopped the practice of Sati । सती प्रथा बंद कराने वाले रा


ब्रह्म समाज की स्थापना

समाज को सुधारने के लिए उन्होंने एक संस्था बनाई। साल 1828 में उन्होंने ब्रह्म समाज की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य समाज से अंधविश्वास को दूर करना था। वह मूर्ति पूजा और जाति व्यवस्था के सख्त खिलाफ थे।



वह मानते थे कि ईश्वर केवल एक ही है। उन्होंने सभी धर्मों की अच्छी बातों को अपनाने की सलाह दी। ब्रह्म समाज ने बाल विवाह के खिलाफ भी आवाज उठाई थी। इसने विधवा पुनर्विवाह का पूरा समर्थन किया था।



उन्होंने महिलाओं को समाज में बराबर का हक दिलाने की वकालत की। उनका मानना था कि समाज महिलाओं के बिना आगे नहीं बढ़ सकता। महिलाओं को संपत्ति में अधिकार दिलाने के लिए भी उन्होंने प्रयास किए।



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शिक्षा के क्षेत्र में राममोहन राय का योगदान

राजा राममोहन राय देश में आधुनिक शिक्षा लाना चाहते थे। उनका मानना था कि सिर्फ पारंपरिक शिक्षा से देश नहीं बदलेगा। इसके लिए युवाओं को विज्ञान और अंग्रेजी पढ़ना बहुत जरूरी है। उन्होंने वेस्टर्न एजुकेशन का पूरा समर्थन किया था।



उन्होंने साल 1817 में कोलकाता में हिंदू कॉलेज की स्थापना की। इसके लिए उन्होंने डेविड हेयर के साथ मिलकर काम किया था। इस कॉलेज ने देश को कई महान बुद्धिजीवी दिए। उन्होंने कई स्कूल और पत्रिकाएं भी शुरू की थीं।



वह पत्रकारिता के क्षेत्र में भी बहुत आगे थे। उन्होंने 'संवाद कौमुदी' और 'मिरात-उल-अखबार' जैसे पत्र निकाले। इनके जरिए वह देशवासियों को जागरूक करते थे। वह अपनी बात खुलकर और बिना डरे लिखते थे।



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राजा राममोहन राय को राजा की उपाधि

बहुत से लोग सोचते हैं कि वह किसी राज्य के राजा थे। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था। उनका असली नाम राममोहन राय ही था। उन्हें 'राजा' की उपाधि मुगल सम्राट Akbar II ने दी थी।



Akbar II ने उन्हें अपनी पेंशन के मामले के लिए इंग्लैंड भेजा था। साल 1831 में वह इंग्लैंड के दौरे पर गए थे। वहां के लोगों ने भी उनके विचारों का बहुत सम्मान किया था। वह विदेश जाने वाले पहले भारतीय नेताओं में से थे।



साल 1833 में इंग्लैंड के ब्रिस्टल में उनका निधन हो गया। भले ही वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन विचार अमर हैं। उनका जीवन आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने हमें एक बेहतर समाज की सीख दी है।



22 मई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं

आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 22 मई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।



आइए जानते हैं 22 मई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-



विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

  • 1805: गवर्नर जनरल लॉर्ड वेलेजली के आदेश पर दिल्ली के मुगल बादशाह के लिए एक स्थायी व्यवस्था (प्रोविजन) तय की गई।
  • 1972: पाकिस्तान ने राष्ट्रमंडल (Commonwealth) की सदस्यता से अपना इस्तीफा दे दिया।
  • 1990: उत्तरी और दक्षिणी यमन का आपस में विलय (Merger) हुआ और एक संयुक्त यमन गणराज्य बना।
  • 1992: बोस्निया, स्लोवेनिया और क्रोएशिया देश संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) के नए सदस्य बने।
  • 1996: माइकल कैमडेसस को अगले 5 सालों के लिए तीसरी बार अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का मैनेजिंग डायरेक्टर चुना गया।
  • 2001: बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने तिब्बत के लिए पूरी तरह आजादी की अपनी पुरानी मांग को छोड़ दिया।
  • 2002: नेपाल के राजनीतिक संकट के बीच वहां की संसद को पूरी तरह भंग कर दिया गया।
  • 2003: अल्जीरिया में आए एक भयानक और विनाशकारी भूकंप में 2,000 से भी ज्यादा लोगों की जान चली गई।
  • 2007: भारत के मशहूर गणितज्ञ श्रीनिवास वर्धन को नॉर्वे का प्रतिष्ठित 'अबेल पुरस्कार' (Abel Prize) दिया गया।
  • 2008: केंद्र सरकार ने बड़े शिक्षण संस्थानों में ओबीसी (OBC) छात्रों को 27% कोटा देने के लिए 10,328 करोड़ रुपये का फंड दिया।
  • 2008: कर्नाटक विधान सभा चुनाव का तीसरा और आखिरी दौर (Phase) शांति से पूरा हुआ।
  • 2008: मुंशी प्रेमचंद की मशहूर किताब 'निर्मला' समेत हिंदी की 5 किताबों के ट्रांसलेटर को 2007 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
  • 2008: केंद्र सरकार ने गुजरात दंगा पीड़ितों की मदद के लिए एक बड़े आर्थिक पैकेज का ऐलान किया।
  • 2008: संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) की 47 सदस्यों वाली मानवाधिकार समिति (Human Rights Committee) में पाकिस्तान को जगह मिली।
  • 1774: भारत के महान समाज सुधारक और आधुनिक सोच के जनक राजा राममोहन राय का जन्म हुआ।
  • 1878: दुनिया के सबसे महान 'गामा पहलवान' का जन्म हुआ, जो अपने पूरे जीवन में एक भी कुश्ती नहीं हारे।
  • 1925: हिंदी और रूसी साहित्य (Russian Literature) को आपस में जोड़ने वाले लेखक मदन लाल मधु का जन्म हुआ।
  • 1959: जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और राजनेता महबूबा मुफ्ती का जन्म हुआ।
  • 1545: भारत में 'सूर साम्राज्य' की नींव रखने वाले महान योद्धा शेरशाह सूरी का निधन हुआ।
  • 1946: आजादी से पहले भारत के सबसे कामयाब और बड़े बिजनेसमैन में से एक गोविंदराम सेकसरिया का निधन हुआ।
  • 1991: भारत के शुरुआती कम्युनिस्ट नेताओं और बड़े चेहरों में से एक श्रीपाद अमृत डांगे का निधन हुआ।
  • 2000: मशहूर भारतीय बिजनेसमैन और गोदरेज ग्रुप के पूर्व चेयरमैन सोहराब फिरोजशाह गोदरेज का निधन हुआ।
  • 2011: 20वीं सदी के महान इतिहासकार, संस्कृत के विद्वान और चिंतक गोविंद चंद्र पांडे का निधन हुआ।
  • 2012: मेघालय राज्य के आठवें मुख्यमंत्री रहे एफ. ए. खोंगलाम का निधन हुआ।
  • 2021: हिंदी सिनेमा (बॉलीवुड) के बहुत ही मशहूर संगीतकार (Music Director) रामलक्ष्मण का निधन हुआ।
  • 2021: काशी (वाराणसी) के बहुत बड़े संस्कृत विद्वान और ज्ञानी रेवा प्रसाद द्विवेदी का निधन हुआ।

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