24 जुलाई का इतिहास: चेस बोर्ड पर भारत की पहली महिला स्टार एस विजयलक्ष्मी की कहानी
Subbaraman Vijayalakshmi: साल 2000 का समय भारतीय खेल इतिहास के लिए बेहद खास और ऐतिहासिक था। उस दौर में शतरंज के खेल को केवल पुरुषों का वर्चस्व माना जाता था। लेकिन चेन्नई की एक युवा लड़की ने इस पुरानी सोच को पूरी तरह बदल दिया। उनका नाम है सुब्बारामन विजयलक्ष्मी, जिन्हें दुनिया सुब्बारामन विजयलक्ष्मी के नाम से जानती है।
मात्र 21 साल की उम्र में उन्होंने वो कर दिखाया जो उनसे पहले किसी भारतीय महिला ने नहीं किया था। साल 2000 में उन्होंने इंटरनेशनल फिडे रेटिंग में शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद वे भारत की पहली महिला ग्रैंडमास्टर यानी वुमन ग्रैंडमास्टर (WGM) बन गईं।
उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय खेल जगत में तहलका मचा दिया था। उन्होंने साबित कर दिया कि सही दिशा, मेहनत और जुनून से हर सपना सच हो सकता है। चेस बोर्ड की 64 चौकियों पर उनकी चालों का जवाब किसी विरोधी के पास नहीं था।
उनकी यह सफलता केवल एक मेडल या टाइटल तक सीमित नहीं थी। इस ऐतिहासिक कदम ने भारत की हजारों बेटियों के लिए शतरंज के दरवाजे खोल दिए। आइए जानते हैं मद्रास की इस बेटी की शुरुआती जिंदगी, उनके संघर्ष और इस महान मुकाम तक पहुंचने की पूरी कहानी।
विजयलक्ष्मी का बचपन
विजयलक्ष्मी ने बहुत कम उम्र में खेलना शुरू किया। उनके पिता उनके पहले कोच बने थे। वे रोज कई घंटे अभ्यास करती थीं। उनकी मेहनत जल्द ही रंग लाने लगी।
उन्होंने कई स्थानीय टूर्नामेंट जीते। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कदम रखा। हर मैच के साथ उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया। वे विरोधियों को आसानी से हरा देती थीं।
साल 1995 में उन्होंने पहली बड़ी ट्रॉफी जीती। वे पहली बार नेशनल वूमेन चैंपियन बनीं। उस समय उनकी उम्र बहुत कम थी। यह उनकी बड़ी सफलताओं की शुरुआत थी।
इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे लगातार 6 बार नेशनल चैंपियन बनीं। यह अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड था। उनके खेल की चर्चा हर तरफ होने लगी।
साल 2000 का वो ऐतिहासिक पल
साल 2000 भारत के लिए बेहद खास था। विजयलक्ष्मी ने फिडे से बड़ा खिताब हासिल किया। वे भारत की पहली वूमेन ग्रैंडमास्टर बनीं। यह भारतीय चेस के लिए ऐतिहासिक दिन था।
इस उपलब्धि से पूरे देश में खुशी छा गई। किसी भारतीय महिला ने यह मुकाम पहली बार पाया था। उनका सपना अब सच हो चुका था।
उनकी इस सफलता के पीछे सालों की मेहनत थी। उन्होंने दिन-रात एक कर दिया था। वे रोज नया अभ्यास करती थीं।
उनकी एकाग्रता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी। वे सिर्फ भारत में ही नहीं चमकीं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का मान बढ़ाया। चेस ओलंपिक में उन्होंने दो बार रजत पदक जीता। यह भारत के लिए बहुत बड़ी बात थी।
खेल के प्रति उनका समर्पण और जुनून
विजयलक्ष्मी का खेल बहुत आक्रामक था। वे शुरुआत से ही दबाव बना लेती थीं। विरोधी खिलाड़ी उनकी चालों से घबरा जाते थे। उन्होंने कई बड़े अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को हराया। वे मुश्किल समय में भी शांत रहती थीं। यही बात उन्हें दूसरों से अलग बनाती थी।
उनके परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया। उनकी बहनें भी चेस खेलती हैं। उनके घर में चेस एक खेल नहीं, जीवन था। उनकी सफलता ने नए दरवाजे खोल दिए। कई लड़कियों ने उन्हें देखकर चेस खेलना शुरू किया। वे भारत की नई रोल मॉडल बन गईं।
पुरस्कार और देश का बड़ा सम्मान
उनकी इस बड़ी उपलब्धि को देश ने सराहा। साल 2001 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार दिया गया। यह खेल जगत का बहुत बड़ा सम्मान है। उन्हें कई अन्य नागरिक सम्मान भी मिले। वे भारतीय चेस की पहचान बन चुकी थीं। हर कोई उनकी सफलता की तारीफ करता था।
वे एयर इंडिया में भी कार्यरत रहीं। उन्होंने खेल के साथ अपना काम भी संभाला। वे हर भूमिका में सफल साबित हुईं। आज भी लोग उनका नाम सम्मान से लेते हैं। उनकी कहानी हमें मेहनत करना सिखाती है। वे सच्ची मायनों में एक विजेता हैं।
आज के युवाओं के लिए बड़ा सबक
विजयलक्ष्मी की कहानी केवल चेस तक सीमित नहीं है। यह कहानी सपनों को सच करने की है। उन्होंने दिखाया कि मेहनत से सब संभव है। अगर आपके पास सही सोच है, तो आप जीतेंगे। राह में मुश्किलें जरूर आती हैं। पर हिम्मत हारना कभी सही विकल्प नहीं होता।
आज भारत में कई महिला ग्रैंडमास्टर हैं। पर पहला कदम विजयलक्ष्मी ने ही उठाया था। उन्होंने दूसरों के लिए रास्ता आसान बनाया। वे आज भी युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करती हैं। उनकी जीवन यात्रा एक सीख है। मेहनत और लगन से हर मंजिल मिलती है।
रिफ्रेश सोर्स (क्रेडिट्स):
- चेस ओलिंपियाडऑल इंडिया चेस फेडरेशन (AICF) आधिकारिक रिकॉर्ड्स
- Chess Tournamentअंतर्राष्ट्रीय शतरंज महासंघ (FIDE) प्रोफाइल और डेटाबेस
- खेल एवं युवा कार्यक्रम मंत्रालय, भारत सरकार (अर्जुन पुरस्कार विजेता सूची)
24 जुलाई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 24 जुलाई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 24 जुलाई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1999: ब्रिटेन के लिवरपुल में पहली 'सार्वभौमिक महिला धर्मसभा' का आयोजन हुआ और अमेरिकी अंतरिक्ष यान कोलंबिया का सफल प्रक्षेपण किया गया।
- 2002: यूरोपियन यूनियन ने संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष में 3.20 करोड़ यूरो अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने का फैसला किया।
- 2004: इटली ने भारतीय पर्यटकों की सुविधा के लिए सात नए वीजा कॉल सेंटर खोलने का निर्णय लिया।
- 2005: उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच कोरियाई क्षेत्र को पूरी तरह परमाणु हथियारों से मुक्त करने पर आम सहमति बनी।
- 2006: प्यूर्टो रिको की सुन्दरी जुलेखा रिवेरा मेंडोजा को 'मिस यूनिवर्स 2006' के ताज से नवाजा गया।
- 2008: फ़्रांस के ट्रिकेस्टिन परमाणु संयंत्र में हुए अचानक रिसाव के कारण लगभग 100 लोग प्रभावित हुए।
- 1853: ज्योतिषशास्त्र के महान मराठी विद्वान शंकर बाल कृष्ण दीक्षित का जन्म हुआ।
- 1911: भारत के प्रसिद्ध और महान बाँसुरी वादक पन्नालाल घोष का जन्म हुआ।
- 1924: उर्दू के सुप्रसिद्ध शायर और कवि नाजिश प्रतापगढ़ी का जन्म हुआ।
- 1928: गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता केशुभाई पटेल का जन्म हुआ।
- 1935: बारहवीं लोकसभा के पूर्व सदस्य रामपाल उपाध्याय का जन्म हुआ।
- 1936: भारत के जाने-माने आर्थोपेडिक चिकित्सक डॉ. कांतिलाल हस्तीमल संचेती का जन्म हुआ।
- 1937: 'भारत कुमार' के नाम से मशहूर प्रसिद्ध भारतीय अभिनेता मनोज कुमार का जन्म हुआ।
- 1943: भारत के पूर्व लोक सभा महासचिव जी. सी. मल्होत्रा का जन्म हुआ।
- 1945: दिग्गज आईटी कंपनी 'विप्रो' (Wipro) के अध्यक्ष और मशहूर उद्योगपति अज़ीम प्रेमजी का जन्म हुआ।
- 1946: भारतीय राजनीतिज्ञ और कई राज्यों के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का जन्म हुआ।
- 1985: भारत के विश्व प्रसिद्ध बिलियर्ड्स और स्नूकर खिलाड़ी पंकज आडवाणी का जन्म हुआ।
- 1939: असम के महान सामाजिक कार्यकर्ता और स्वतंत्रता सेनानी तरुण राम फुकन का निधन हुआ।
- 1980: हिंदी और बांग्ला फिल्मों के महान व दिग्गज अभिनेता उत्तम कुमार का निधन हुआ।
- 2017: भारत के पूर्व अंतरिक्ष वैज्ञानिक और 'इसरो' (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष उडुपी रामचन्द्र राव का निधन हुआ।
- 2017: भारत के मशहूर वैज्ञानिक, विचारक और शिक्षाविद प्रोफेसर यशपाल का निधन हुआ।
- 2020: भारत की मशहूर नृत्यांगना और कोरियोग्राफर अमला शंकर का निधन हुआ।
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