27 जुलाई का इतिहास: कैसे मिला टाइटैनिक का मलबा, जानें समुद्र की गहराई का सच
Titanic Discovery 1985: साल 1912 की वह काली रात आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है। दुनिया का सबसे भव्य और न डूबने वाला जहाज टाइटैनिक एक विशाल बर्फ के पहाड़ से टकराकर समुद्र में समा गया था।
इस हादसे में 15 सौ से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। इसके बाद दशकों तक यह जहाज समुद्र की अथाह गहराइयों में खोया रहा। कई देशों की टीमों ने टाइटैनिक के मलबे को ढूंढने की कोशिश की। लेकिन हर बार लोगों को केवल नाकामी ही हाथ लगी।
फिर आया साल 1985, जब एक सीक्रेट मिशन ने इस इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया। वैज्ञानिक रॉबर्ट बैलाड की समझदारी और अमेरिकी नेवी के सहयोग से टाइटैनिक का मलबा खोज लिया गया।
समुद्र से निकालीं ऐतिहासिक चीजें
इसके बाद 27 जुलाई 1987 को एक नया इतिहास रचा गया। फ्रांसीसी और अमेरिकी टीमों ने मिलकर समुद्र से ऐतिहासिक चीजें निकालीं।
दूसरी तरफ, टाइटैनिक को लेकर एक मशहूर थ्योरी भी काफी चर्चा में रही। दावा किया गया कि डूबने वाला जहाज टाइटैनिक नहीं बल्कि ओलिंपिक था। आइए इस पूरी रोमांचक कहानी और इसके पीछे छिपे सच को विस्तार से समझते हैं।
1985 में कैसे हुई टाइटैनिक की खोज
टाइटैनिक को खोजना आसान नहीं था। समुद्र तल में अत्यधिक दबाव और घना अंधेरा था। वैज्ञानिक रॉबर्ट बैलाड लंबे समय से टाइटैनिक को खोजना चाहते थे। लेकिन इस बड़े मिशन के लिए भारी फंड की जरूरत थी। बैलाड मदद के लिए अमेरिकी नौसेना के पास पहुंचे। अमेरिकी नेवी उस समय अपने दो डूबे हुए परमाणु सबमरीन ढूंढ रही थी।
नेवी ने बैलाड के सामने एक शर्त रखी। उन्हें पहले सबमरीन थ्रेशर और स्कॉर्पियन का मलबा ढूंढना था। अगर समय बचता, तो ही वे टाइटैनिक को ढूंढ सकते थे।
बैलाड ने इस चुनौती को तुरंत स्वीकार कर लिया। बैलाड ने सबमरीन खोजने के लिए एक नई तकनीक बनाई। उन्होंने मलबे के बहते टुकड़ों का पीछा करने का तरीका निकाला। उन्होंने सबमरीन का मलबा समय से पहले खोज लिया।
अब उनके पास टाइटैनिक के लिए सिर्फ 12 दिन बचे थे। साल 1985 (1 सितंबर) को उनके कैमरे आर्गो ने कुछ देखा। समुद्र की गहराई में टाइटैनिक का एक बॉयलर दिखाई दिया।
यह देखकर पूरी टीम खुशी से उछल पड़ी। टाइटैनिक का मलबा 12 हजार 500 फीट की गहराई में मिला था। यह खोज इतिहास की सबसे बड़ी और रोमांचक खोज बन गई। रॉबर्ट बैलाड का नाम दुनिया भर में मशहूर हो गया।
27 जुलाई 1987 का ऐतिहासिक अभियान
1985 की खोज के बाद मलबे से चीजें निकालने की योजना बनी। 27 जुलाई 1987 को एक बड़ा अभियान शुरू हुआ। इस मिशन को फ्रांसीसी संस्था इफ़्रेमर और टाइटैनिक कंपनी ने चलाया।
इस काम में 'नॉटिल' नामक सबमरीन का इस्तेमाल हुआ। यह सबमरीन समुद्र की गहराई में उतरने में सक्षम थी। गोताखोरों की टीम ने मलबे से कीमती चीजें बाहर निकालीं। इस अभियान में लगभग 18 सौ दुर्लभ वस्तुएं निकाली गईं। इनमें यात्रियों के निजी सामान और जहाज के हिस्से शामिल थे।
दुनियाभर के संग्रहालयों में रखा गया
समुद्र से यात्रियों के चमड़े के बैग निकाले गए। ये बैग पानी के भीतर भी सुरक्षित बचे हुए थे। बैग के अंदर से कपड़े, पत्र और पैसे मिले। इसके अलावा सोने के गहने और घड़ियां भी सही सलामत मिलीं।
जहाज का एक विशाल पीतल का झाड़फानूस निकाला गया। यात्रियों के खाने के बर्तन और क्रॉकरी भी बाहर आई। जहाज की घंटी और सेफ को भी बाहर लाया गया। इन सभी चीजों ने दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा।
इन अवशेषों को दुनियाभर के संग्रहालयों में रखा गया। इनसे टाइटैनिक के यात्रियों की कहानियां सामने आईं। इस अभियान से लोगों को टाइटैनिक के भव्य जीवन की झलक मिली। यह मिशन तकनीकी रूप से बेहद सफल रहा।
जहाजों की अदला-बदली की थ्योरी का सच
टाइटैनिक के हादसे के बाद एक अफवाह बहुत तेजी से फैली। इस अफवाह को 'द स्विच कंसपिरेसी' कहा जाता है। इस थ्योरी के अनुसार, टाइटैनिक कभी डूबा ही नहीं था।
दावों के मुताबिक डूबा हुआ जहाज असल में ओलिंपिक था। ओलिंपिक टाइटैनिक का जुड़वां और पुराना जहाज था। 1911 में ओलिंपिक एक युद्धपोत से टकराकर क्षतिग्रस्त हो गया था।
थ्योरी में कहा गया कि व्हाइट स्टार लाइन कंपनी घाटे में थी। बीमा का पैसा लेने के लिए दोनों जहाजों को बदल दिया गया। कंपनी ने ओलिंपिक को टाइटैनिक बनाकर समुद्र में उतार दिया।
इरादा इसे डुबाकर बीमा की रकम वसूलने का था। लेकिन यह थ्योरी पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठी है। इतिहासकारों और समुद्री विशेषज्ञों ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया।
डिजाइन में छोटे-बड़े अंतर
दोनों जहाजों के डिजाइन में कई छोटे-बड़े अंतर थे। इतने बड़े बदलाव गुप्त रूप से करना नामुमकिन था। जब 1985 में मलबा मिला, तो सच्चाई सामने आ गई। मलबे के हर हिस्से पर नंबर 401 लिखा हुआ था।
401 टाइटैनिक का आधिकारिक निर्माण नंबर था। वहीं ओलिंपिक का आधिकारिक निर्माण नंबर 400 था। मलबे से मिले बर्तनों और इंजन पर भी 401 नंबर था। इससे साबित हुआ कि डूबा हुआ जहाज टाइटैनिक ही था।
इतिहासकारों के मुताबिक, बीमा घोटाला करना नामुमकिन था। जहाज बदलने में हजारों मजदूरों की जरूरत पड़ती। कोई भी मजदूर इतनी बड़ी बात छुपा कर नहीं रख सकता था।
इसलिए अदला-बदली का दावा सिर्फ एक कपोल-कल्पित कहानी है। टाइटैनिक का डूबना एक दुखद और भयानक दुर्घटना थी। इसमें किसी भी तरह का कोई षड्यंत्र शामिल नहीं था।
रिपोर्ट सोर्स:
- नेशनल जियोग्राफिक चैनल,
- बीबीसी न्यूज
- वुड्स होले ओशनोग्राफिक इंस्टीट्यूशन (WHOI) रिपोर्ट्स
27 जुलाई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 27 जुलाई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 27 जुलाई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 2002: यूक्रेन में एक विमान दुर्घटनाग्रस्त होने से 70 लोगों की जान चली गई।
- 2003: अमेरिका ने यमन को स्कड मिसाइल बेचने पर उत्तर कोरियाई कंपनी पर नए प्रतिबंध लगाए।
- 2006: रूस का प्रक्षेपण यान 'नेपर' उड़ान भरने के दौरान ज़मीन पर गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हुआ।
- 2007: ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने 40,000 साल पुराने विशालकाय 'वोमबैट' के जबड़े का जीवाश्म ढूंढने का दावा किया।
- 2008: नेपाल के नवनिर्वाचित संविधान सभा अध्यक्ष सुभाष नेमवांग को राष्ट्रपति रामबरन यादव ने शपथ दिलाई।
- 1913: स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख महिला क्रांतिकारी कल्पना दत्त का जन्म हुआ।
- 1940: अमेरिकी पुरस्कार विजेता भारतीय मूल की प्रसिद्ध लेखिका भारती मुखर्जी का जन्म हुआ।
- 1960: महाराष्ट्र के 19वें मुख्यमंत्री और वरिष्ठ राजनीतिज्ञ उद्धव ठाकरे का जन्म हुआ।
- 1963: भारत की सुप्रसिद्ध और पार्श्व गायिका के. एस. चित्रा का जन्म हुआ।
- 1967: भारतीय सिनेमा और टीवी के जाने-माने अभिनेता आसिफ़ बसरा का जन्म हुआ।
- 1983: भारत की प्रमुख महिला चक्का फेंक (डिस्कस थ्रोअर) एथलीट सीमा पुनिया का जन्म हुआ।
- 1891: भारत विद्या के प्रख्यात विद्वान राजेन्द्रलाल मित्रा का निधन हुआ।
- 1933: नौवीं लोकसभा के सदस्य कल्याण सिंह कालवी का निधन हुआ।
- 1944: आचार्य रामचंद्र शुक्ल के सहयोगी और हिंदी के विद्वान पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल का निधन हुआ।
- 1970: आधुनिक केरल के प्रमुख नेता पत्तम थानु पिल्लई का निधन हुआ।
- 1987: 'बर्डमैन ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर पक्षी विज्ञानी सालिम अली का निधन हुआ।
- 1992: हिंदी सिनेमा के मशहूर और दिग्गज अभिनेता अमजद ख़ान का निधन हुआ।
- 1999: माही क्षेत्र से फ्रांसीसी शासन खत्म कराने वाले सेनानी आई. के. कुमारन का निधन हुआ।
- 2002: भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति कृष्णकांत का निधन हुआ।
- 2006: प्रसिद्ध हिंदी कवि शिवदीन राम जोशी का निधन हुआ।
- 2015: भारत के पूर्व राष्ट्रपति और 'मिसाइल मैन' डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का निधन हुआ।
- 2016: भारत के ख्यातिप्राप्त और जाने-माने तबला वादक लच्छू महाराज का निधन हुआ।
- 2017: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता एन. धरम सिंह का निधन हुआ।
- केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) स्थापना दिवस (27 जुलाई 1939 को स्थापना हुई थी)।
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