28 मई का इतिहास: Veer Savarkar, नासिक के छोटे गांव से सेलुलर जेल तक की कहानी
Veer Savarkar Story: आज का दिन भारतीय इतिहास में एक बहुत ही खास स्थान रखता है। आज ही के दिन महाराष्ट्र नासिक के एक छोटे से गांव में देश के महान सपूत वीर सावरकर का जन्म हुआ था। उनका पूरा नाम विनायक दामोदर सावरकर था, जिन्हें लोग सम्मान से वीर कहते हैं। वे एक प्रखर राष्ट्रवादी नेता, लेखक, वकील और बहुत बड़े कवि भी थे।
सावरकर ने अपना पूरा जीवन भारत माता की सेवा में पूरी तरह समर्पित कर दिया। देश की आजादी की लड़ाई में उनका योगदान बहुत ही अनोखा और बड़ा है। आज उनकी जयंती पर पूरा देश उन्हें नमन कर याद कर रहा है।
नासिक के कलेक्टर जैक्सन की हत्या
इस पूरी कहानी की शुरुआत साल 1909 के दिसंबर महीने से जुड़ी हुई है। नासिक के विजयानंद थिएटर में एक मराठी नाटक का मंचन चल रहा था। यह नाटक वहां के ब्रिटिश कलेक्टर जैक्सन की विदाई के लिए रखा गया था।
तभी 18 साल के क्रांतिकारी अनंत लक्ष्मण कन्हारे ने जैक्सन पर गोलियां चला दीं। कलेक्टर जैक्सन की मौके पर ही गोली लगने से दर्दनाक मौत हो गई थी। जब ब्रिटिश पुलिस ने इस पूरे मामले की बहुत गहराई से जांच शुरू की।
तब पता चला कि हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल लंदन से भेजी गई थी। इस पिस्तौल को लंदन से भेजने वाले व्यक्ति खुद विनायक दामोदर सावरकर थे। इसके बाद ब्रिटिश पुलिस ने सावरकर को लंदन रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया।
सावरकर को एक ही जन्म में दो बार आजीवन कारावास
सावरकर को भारत लाकर उन पर ब्रिटिश अदालत में दो बड़े मुकदमे चलाए गए। पहला आरोप कलेक्टर जैक्सन की हत्या के लिए क्रांतिकारियों को उकसाने का था।
दूसरा गंभीर आरोप ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ बड़ी सशस्त्र साजिश रचने का था। अंग्रेजी अदालत ने सावरकर को बेहद सख्त और ऐतिहासिक सजा सुनाई।
उन्हें एक ही जन्म में 25-25 साल की दो अलग-आजीवन कारावास की सजा मिली। अंग्रेजों ने 28 साल के इस युवा को कुल 50 साल की कैद दी। अंग्रेज सरकार उन्हें भारत की मुख्य भूमि पर रखना बेहद खतरनाक मानती थी। इसीलिए उन्हें सजा काटने के लिए अंडमान की सेलुलर जेल भेज दिया गया।
अंडमान में सावरकर ने कैसी यातनाएं झेली थीं
साल 1911 में वीर सावरकर अंडमान की कुख्यात सेलुलर जेल पहुंचे थे। वहां उन्हें 13.5 गुणा 7.5 फीट की एक बेहद छोटी कोठरी में रखा गया। काले पानी की जेल में कैदियों को बहुत ही अमानवीय यातनाएं दी जाती थीं।
सावरकर को वहां रोज कोल्हू से नारियल का तेल निकालना पड़ता था। कैदियों को रोजाना करीब 14 से 15 किलो तेल निकालना अनिवार्य था। इतनी कठिन मेहनत के बाद शरीर पूरी तरह से टूट जाता था।
खाने में कई बार सब्जी के साथ मरे हुए कनखजूरे और सांप मिलते थे। लेकिन इस भयानक नरक में भी सावरकर का हौसला कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने जेल की पथरीली दीवारों पर कीलों से सुंदर कविताएं लिख डालीं।
सावरकर की माफी की चिट्ठियों का असली सच क्या है
सेलुलर जेल में रहने के दौरान सावरकर ने ब्रिटिश सरकार को कुछ पत्र लिखे। इन पत्रों को लेकर आज भी भारतीय राजनीति में बहुत बड़ी बहस होती है।
विरोधी दल कहते हैं कि माफीनामा लिखने वाला व्यक्ति वीर नहीं हो सकता। वहीं सावरकर के समर्थक और राष्ट्रवादी विचारक इसे एक बड़ी कूटनीति मानते हैं। सावरकर का मानना था कि जेल में सड़ने से अच्छा बाहर आना है।
बाहर आकर देश की आजादी के लिए दोबारा काम करना ज्यादा बेहतर था। उन्होंने शिवाजी महाराज और भगवान श्रीकृष्ण की रणनीतियों का उदाहरण भी दिया था। करीब 10 साल बाद 1921 में उन्हें इस जेल से बाहर निकाला गया। इसके बाद उन्हें महाराष्ट्र की रत्नागिरी जेल में शिफ्ट कर दिया गया था।
गांधी जी और सावरकर की पहली मुलाकात
सावरकर और महात्मा गांधी के बीच इतिहास में एक दिलचस्प मुलाकात हुई थी। यह मुलाकात अक्टूबर 1906 में लंदन के इंडिया हाउस में हुई थी। गांधी जी वहां भारतीय छात्रों और क्रांतिकारियों से मिलने पहुंचे थे।
वहां सावरकर रसोई में बैठकर झींगा मछली तल रहे थे। शाकाहारी गांधी जी सावरकर के इस रूप को देखकर काफी हैरान रह गए। बातचीत के दौरान गांधी जी ने सावरकर की उग्र रणनीति का विरोध किया।
सावरकर ने गांधी जी को खाने के लिए तली हुई मछली ऑफर की। गांधी जी ने इसे खाने से साफ तौर पर मना कर दिया था। तब सावरकर ने कहा कि बिना मांसाहार अंग्रेजों से कैसे लड़ेंगे? इस पहली मुलाकात के बाद दोनों के वैचारिक रास्ते हमेशा के लिए अलग हो गए।
सावरकर ने हिंदुत्व को किस तरह परिभाषित किया था
रत्नागिरी जेल में नजरबंदी के दौरान सावरकर ने एक महान किताब लिखी। साल 1922 में आई इस किताब का नाम 'Essentials of Hindutva' था। इस किताब के जरिए उन्होंने हिंदुत्व को एक मजबूत राजनीतिक पहचान दी। सावरकर ने लिखा कि जो भारत को पितृभूमि और पुण्यभूमि मानता है, वह हिंदू है। सिख, बौद्ध और जैन धर्म के लोग भी इसी दायरे में शामिल किए गए।
वे समाज में फैले जातिवाद और छुआछूत के बहुत बड़े विरोधी थे। वे चाहते थे कि पूरा हिंदू समाज अपनी जातियां भूलकर एकजुट हो। उन्होंने समाज सुधार के लिए कई बड़े और सकारात्मक आंदोलन भी चलाए।
मृत्यु के बाद भी सावरकर आज क्यों प्रासंगिक बने हुए हैं
साल 1937 में सावरकर पूरी तरह अंग्रेजों की निगरानी से मुक्त हो सके थे। इसके बाद वे हिंदू महासभा के बहुत सक्रिय राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। उन्होंने देश के विभाजन और तुष्टिकरण की नीतियों का हमेशा कड़ा विरोध किया।
साल 1948 में गांधी जी की हत्या के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। लेकिन अदालत ने ठोस सबूत न मिलने पर उन्हें पूरी तरह बरी कर दिया।
साल 1966 (वीर सावरकर जयंती)में इस महान और जुझारू देशभक्त का निधन हो गया था। आज भी उनके विचार और उनका जीवन करोड़ों युवाओं को प्रेरित करता है। भारतीय इतिहास में उनका नाम हमेशा गर्व के साथ याद किया जाएगा।
सेलुलर जेल की कोठरी में सावरकर ने क्या किया था
सावरकर को सजा काटने के लिए अंडमान की सेलुलर जेल भेजा गया। वहां की जेल को लोग आम भाषा में काले पानी की जेल कहते थे। जेल में उन्हें बहुत ही कठिन और अमानवीय यातनाएं दी जाती थीं। उन्हें कोल्हू से तेल निकालने जैसे बेहद भारी काम करने पड़ते थे।
लेकिन इतनी मुश्किलों के बाद भी उनका हौसला कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने जेल की दीवारों पर ही कीलों से अपनी कविताएं लिख डालीं। उन्होंने वहां हजारों पंक्तियों के महाकाव्य की दीवारों पर रचना कर दी।वे जेल के अंदर भी बंद कैदियों को लगातार शिक्षित करते रहे।
Reference Links:
- भारत सरकार का आधिकारिक राष्ट्रीय वेब पोर्टल:Veer Savarkar Jayanti india.gov.in
- अंडमान और निकोबार प्रशासन - सेलुलर जेल स्मारक रिकॉर्ड: Veer Savarkar Defamation Caseandaman.gov.in
- पत्र सूचना कार्यालय (PIB) भारत सरकार प्रेस विज्ञप्ति: Veer Savarkar Controversy pib.gov.in
- भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR) डिजिटल लाइब्रेरी: ichr.ac.in
28 मई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 28 मई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 28 मई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 2008: राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में पांच जजों को स्थायी जज के रूप में नियुक्त किया था।
- 2008: भारतीय विमान सेवा जेट एयरवेज को 'मध्य एशिया सर्वश्रेष्ठ कार्गो एयरलाइंस' का प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला था।
- 2008: नेपाल की संसद ने देश से 240 साल पुरानी राजशाही का हमेशा के लिए अंत कर दिया था।
- 2008: अमेरिका ने पाकिस्तान समर्थित खूंखार आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के चार बड़े आकाओं पर कड़े वित्तीय प्रतिबंध लगाए थे।
- 2002: नेपाल में आंतरिक संकट और राजनीतिक उथल-पुथल के कारण फिर से आपातकाल लागू कर दिया गया था।
- 2000: राष्ट्रपति के. आर. नारायणन द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए छह दिनों की सरकारी यात्रा पर बीजिंग पहुंचे थे।
- 1999: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संसद से इस्तीफा दिया और तुर्की में नई गठबंधन सरकार बनी थी।
- 1998: पाकिस्तान ने बलूचिस्तान की चगाई पहाड़ियों पर पांच परमाणु परीक्षण किए, जिसके बाद अमेरिका ने उस पर कड़े प्रतिबंध लगाए।
- 1996: रूस चेचेन्या को स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए अधिकतम स्वायत्तता देने के फैसले पर सहमत हुआ था।
- 1969: भारतीय जनता पार्टी की प्रसिद्ध और कद्दावर महिला राजनीतिज्ञ प्रतिमा भौमिक का आज जन्म हुआ था।
- 1952: देश के न्यायिक इतिहास में बेहद खास पहचान रखने वाले भारत के प्रथम लोकपाल पिनाकी चंद्र घोष का जन्म हुआ था।
- 1940: हिंदी भाषा के जाने-माने कवि, शानदार कला-समीक्षक, कुशल अनुवादक और कहानीकार प्रयाग शुक्ल का जन्म हुआ था।
- 1923: तेलुगु सिनेमा के सुपरस्टार अभिनेता और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के संस्थापक एन. टी. रामाराव का जन्म हुआ था।
- 1921: भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया के बेहद दिग्गज और प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक डी. वी. पलुस्कर का जन्म हुआ था।
- 1921: भारतीय राजनीतिज्ञ और गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मठ के भूतपूर्व पीठाधीश्वर महन्त अवैद्यनाथ का जन्म हुआ था।
- 1915: जाने-माने समाज सेवक और भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के सह-संस्थापक गोपाल रामानुजम का जन्म हुआ था।
- 1883: देश के महान भाषाविद, ओजस्वी वक्ता, बुद्धिवादी कवि और अप्रतिम क्रांतिकारी वीर सावरकर का जन्म हुआ था।
- 2005: भारत के बेहद लोकप्रिय कवियों, चुटीले लेखकों और चोटी के साहित्यकारों में से एक गोपाल प्रसाद व्यास का निधन हुआ था।
- 1964: भारतीय सिनेमा जगत के शुरुआती सुनहरे इतिहास के अग्रणी और महान निर्माता-निर्देशक महबूब खान का निधन हुआ था।
- 1954: देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाने वाले प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी विजय सिंह पथिक का निधन हुआ था।
- एमनेस्टी इंटरनेशनल डे: पूरी दुनिया में मानवाधिकारों की रक्षा और उनके सम्मान के लिए हर साल आज का दिन विशेष रूप से मनाया जाता है।
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