28 जुलाई का इतिहास: कौन थे विलियम हर्शेल, जिन्होंने फिंगरप्रिंट को बनाया पहचान का जरिया

Kaushiki | Jul 28, 2026, 08:00 IST
william herschel fingerprint
सर विलियम जेम्स हर्शेल का जन्म 1833 में हुआ था। उन्होंने भारत में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में काम किया। 1858 में उन्होंने पहचान के लिए फिंगरप्रिंट का पहली बार इस्तेमाल किया। उनकी इस तकनीक ने दुनिया में अपराध और धोखाधड़ी रोकने का तरीका पूरी तरह बदल दिया

Discovery of Fingerprints: आज हम सब अपने स्मार्टफोन को अनलॉक करने के लिए फिंगरप्रिंट सेंसर का इस्तेमाल करते हैं। बैंक का काम हो या आधार कार्ड बनाना, हमारी उंगलियों के निशान ही हमारी सबसे बड़ी पहचान बन चुके हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उंगलियों के निशानों को पहचान का जरिया बनाने का आईडिया सबसे पहले किसके दिमाग में आया था? यह कहानी बेहद दिलचस्प और हैरान कर देने वाली है।



इस पूरी क्रांति के पीछे एक ब्रिटिश अधिकारी का हाथ था, जिनका नाम सर विलियम जेम्स हर्शेल था। वे भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए काम करते थे। उस जमाने में सरकारी कागजातों में पेंशन की धोखाधड़ी और फर्जी दस्तखत बहुत बड़ी समस्या थी। लोग एक दूसरे की जगह आकर पैसे ले लेते थे और प्रशासन उन्हें पहचान नहीं पाता था।



विलियम हर्शेल ने इस समस्या को हल करने के लिए एक अनोखा रास्ता खोज निकाला। उन्होंने गौर किया कि हर इंसान के हाथ की रेखाएं और उंगलियों के निशान बिल्कुल अलग होते हैं। फिर क्या था, उन्होंने कानूनी कागजातों पर दस्तखत के साथ-साथ हथेली और उंगलियों की छाप लेना शुरू कर दिया। आइए जानते हैं कि कैसे एक छोटी सी तरकीब ने पूरी दुनिया की पुलिसिंग और फॉरेंसिक साइंस का इतिहास हमेशा के लिए बदल दिया।



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विलियम हर्शेल कौन थे और उनका जीवन

विलियम जेम्स हर्शेल का जन्म 1833 में इंग्लैंड में हुआ था। वे एक मशहूर और विद्वान परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके दादा विलियम हर्शेल ने यूरेनस ग्रह की खोज की थी।



विलियम हर्शेल खुद पढ़ाई में काफी तेज और होशियार थे। वे ब्रिटिश सिविल सर्विस परीक्षा पास करके भारत आ गए। उनकी नियुक्ति बंगाल के हुगली जिले में बतौर कलेक्टर हुई। वे अपने काम को बहुत ईमानदारी से किया करते थे।



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फिंगरप्रिंट का आईडिया कैसे दिमाग में आया

हुगली में सरकारी पेंशन बांटने में बहुत धांधली होती थी। फर्जी लोग आकर दूसरों की पेंशन का पैसा ले जाते थे। कागजों पर दस्तखत या अंगूठे की स्याही भी फर्जी बनती थी।



हर्शेल इस धोखाधड़ी को हर हाल में रोकना चाहते थे। 28 जुलाई 1858 को उन्होंने एक ठेकेदार से कॉन्ट्रैक्ट साइन कराया। हर्शेल ने ठेकेदार राजधर कोनार्ड के पूरे हाथ का प्रिंट लिया। वे बस ठेकेदार को डराना और पक्का वादा चाहते थे।



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खोज से बदला पहचान का पूरा तरीका

हाथ का प्रिंट लेने के बाद हर्शेल को बड़ा चमत्कार दिखा। उन्होंने देखा कि सालों बाद भी निशान बिल्कुल नहीं बदले थे। इंसान की उम्र बढ़ती है, पर उंगलियों के निशान वही रहते हैं।



इसके बाद हर्शेल ने केवल उंगलियों के निशान लेना शुरू किया। उन्होंने हुगली जेल के कैदियों का भी रिकॉर्ड तैयार किया। इससे कैदियों की अदला-बदली की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो गई। सरकारी दफ्तरों में धोखाधड़ी के मामले बहुत तेजी से घटने लगे।



दुनिया को किसने बताया के इंसान की एक जैसी दिखने वाली उंगलियों की लकीरे अलग अलग होती है, Fingerprint


दुनिया पर फिंगरप्रिंट साइंस का असर

हर्शेल ने इस सिस्टम पर कई सालों तक गहराई से रिसर्च की। उन्होंने साबित किया कि दो लोगों के फिंगरप्रिंट एक से नहीं होते। उन्होंने अपना यह काम वैज्ञानिक फ्रांसिस गाल्टन को भेजा।



गाल्टन ने इस पर आगे चलकर बड़ी वैज्ञानिक थ्योरी लिखी। बाद में सर एडवर्ड हेनरी ने फिंगरप्रिंट वर्गीकरण बनाया। कोलकाता में दुनिया का पहला फिंगरप्रिंट ब्यूरो खोला गया। आज पूरी दुनिया की क्राइम ब्रांच इसी तकनीक पर टिकी है।



फिंगरप्रिंटिंग का इतिहास | सीपीआई ओपनफॉक्स


डिजिटल दौर में फिंगरप्रिंट का वैल्यू

आज के डिजिटल दौर में 1858 का वही फिंगरप्रिंट का आईडिया हमारी पूरी लाइफ का पासवर्ड बन चुका है। सोचिए, जब विलियम हर्शेल ने हुगली में कागज पर पहली बार स्याही से अंगूठा लगवाया था। तब उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन यह निशान कागजों से निकलकर बायोमेट्रिक चिप्स और डिजिटल स्क्रीन पर राज करेगा।



आज सुबह उठते ही सबसे पहले हम अपने स्मार्टफोन का इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर टच करते हैं और फोन अनलॉक हो जाता है। आधार कार्ड की मदद से मिनटों में बैंक अकाउंट खुल जाता है। सिम कार्ड वेरीफाई होता है और सरकारी सब्सिडी सीधे हमारे खातों में पहुंचती है।



उंगलियों के निशान | परिभाषा एवं तथ्य | ब्रिटानिका


फिंगरप्रिंट का यूज

अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस अब पन्नों के रिकॉर्ड नहीं टटोलती, बल्कि AFIS (Automated Finger print Identification System) नाम के डिजिटल डेटाबेस का इस्तेमाल करती है। बस घटनास्थल से मिला एक धुंधला फिंगर प्रिंट स्कैनर पर रखा और एआई (AI) सेकंडों में अपराधी की पूरी कुंडली सामने ले आता है।



एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी चेक-इन हो या ऑफिस की बायोमेट्रिक अटेंडेंस, हर्शेल की वही छोटी सी खोज आज डिजिटल वर्ल्ड में हमारी यूनिक डिजिटल आइडेंटिटी बनकर हमारी लाइफ को आसान और सुरक्षित बना रही है।



रिपोर्ट रिफरेंस:



ब्रिटैनिका एनसाइक्लोपीडिया और


स्कॉटलैंड यार्ड फॉरेंसिक हिस्ट्री आर्काइव।



28 जुलाई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं

आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 28 जुलाई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।



आइए जानते हैं 28 जुलाई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-



विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

  • 1995: वियतनाम आधिकारिक तौर पर आसियान (ASEAN) का सदस्य देश बना।
  • 2001: पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद सिद्दकी ख़ान कंजू की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
  • 2004: इराक के बाकूबा शहर में पुलिस भर्ती केंद्र पर हुए विस्फोट में 68 लोगों की मौत हो गई।
  • 2005: खगोलविदों ने सौरमंडल के 10वें ग्रह (एरिस) की खोज करने का आधिकारिक दावा किया।
  • 2007: पाकिस्तान सरकार ने विवादों में घिरी लाल मस्जिद को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने की घोषणा की।
  • 2008: गुटनिरपेक्ष देशों की मंत्रिस्तरीय बैठक में शामिल होने भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी तेहरान गए।
  • 1165: अरबी भाषा के प्रसिद्ध सूफ़ी कवि, साधक और महान विचारक इबने अरबी का जन्म हुआ।
  • 1909: आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कासू ब्रह्मानंद रेड्डी का जन्म हुआ।
  • 1927: ओडिशा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और मध्य प्रदेश के पूर्व राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर का जन्म हुआ।
  • 1933: दुनिया भर में सिख समुदाय के अधिकारों और बेहतरी के लिए काम करने वाले तरलोचन सिंह का जन्म हुआ।
  • 1957: प्रसिद्ध हिंदी कवि, लेखक और अनुवादक अनिल जनविजय का जन्म हुआ।
  • 1983: भारत के प्रसिद्ध चित्रकार, कलाकार और उद्यमी सुविज्ञ शर्मा का जन्म हुआ।
  • 1972: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और नक्सलवादी आंदोलन की शुरुआत करने वाले चारू मजूमदार का निधन हुआ।
  • 2007: सिक्किम राज्य के पहले मुख्यमंत्री काज़ी लेन्डुप दोरजी का निधन हुआ।
  • 2013: हिंदी फिल्मों में सबसे ज्यादा पुलिस इंस्पेक्टर का रोल करने वाले प्रसिद्ध अभिनेता जगदीश राज का निधन हुआ।
  • 2014: मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल मधुकर दिघे का निधन हुआ।
  • 2016: भारत की प्रसिद्ध लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता महाश्वेता देवी का निधन हुआ।
  • 2017: हिंदी सिनेमा के जाने-माने सहायक अभिनेता इंद्र कुमार का निधन हुआ।
  • 2019: मेघालय के 10वें मुख्यमंत्री रहे डोनकुपर रॉय का निधन हुआ।
  • 2021: अंतर्राष्ट्रीय खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी नंदू नाटेकर का निधन हुआ।
  • विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस (World Nature Conservation Day)
  • विश्व हेपेटाइटिस दिवस (World Hepatitis Day)
  • वर महोत्सव दिवस

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