31 मई का इतिहास: देवी अहिल्याबाई होल्कर, जिन्होंने देश के बड़े मंदिरों का कराया रेनोवेशन
Ahilyabai Holkar History: ये कहानी भारत की उस महान वीरांगना की है, जिसने महलों के ऐशो आराम को छोड़कर अपना पूरा जीवन प्रजा की सेवा में लगा दिया। हम बात कर रहे हैं मालवा की रानी लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की।
साल 1725 में जन्मी अहिल्याबाई का जीवन आसान नहीं था। कम उम्र में पति को खोने के बाद, उन्होंने हार मानने के बजाय खुद साम्राज्य की कमान संभाली। उन्होंने मध्य प्रदेश के महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया। उसे व्यापार, कला और संस्कृति का एक बड़ा हब बना दिया।
अहिल्याबाई सिर्फ एक कुशल शासक ही नहीं, बल्कि परम शिवभक्त भी थीं। उन्होंने आक्रमणकारियों द्वारा तोड़े गए काशी विश्वनाथ और सोमनाथ जैसे देश के कई बड़े प्रसिद्ध मंदिरों का दोबारा निर्माण कराया। आइए इस महान वीरांगना के बारे में जानें....
कौन थीं अहिल्याबाई होल्कर
अहिल्याबाई होल्कर भारत की महान और न्यायप्रिय महिला शासक थीं। उनका जन्म तो महाराष्ट्र में हुआ था, लेकिन उनका पूरा जीवन और कर्मभूमि मध्य प्रदेश ही रहा। अहिल्याबाई का विवाह इंदौर के महाराजा मल्हारराव होल्कर के बेटे खांडेराव से हुआ था। इस तरह वह इंदौर के होल्कर राजवंश की बहू बनीं।
जब एक युद्ध में उनके पति शहीद हो गए और बाद में ससुर का भी निधन हो गया, तब उन्होंने खुद मालवा (एमपी) साम्राज्य की कमान संभाली। उन्होंने मध्य प्रदेश के महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया और नर्मदा नदी के किनारे एक खूबसूरत किला बनवाया।
उन्होंने ही विश्व प्रसिद्ध 'महेश्वरी साड़ी' उद्योग की शुरुआत की, जिसने स्थानीय बुनकरों को नया जीवन दिया। आज भी इंदौर का इंटरनेशनल एयरपोर्ट और यूनिवर्सिटी उन्हीं के नाम पर है। मध्य प्रदेश के लोग उन्हें आदर से 'लोकमाता' कहते हैं।
MP के होल्कर राजवंश से कैसे जुड़ा नाता
अहिल्याबाई बचपन से ही बहुत दयालु और धार्मिक स्वभाव की थीं। एक बार मालवा के शासक मल्हारराव होल्कर वहां से गुजर रहे थे। उन्होंने अहिल्याबाई के अच्छे स्वभाव और चरित्र को बहुत करीब से देखा।
वह बच्ची के व्यवहार से काफी प्रभावित हुए। इसके बाद उन्होंने अहिल्याबाई का विवाह अपने बेटे खांडेराव से कराया। इस तरह अहिल्याबाई मध्य प्रदेश के इंदौर के होल्कर राजघराने की बहू बनीं।
एक कुशल शासक के रूप में कैसे संभाली मालवा की कमान
अहिल्याबाई का शुरुआती जीवन बहुत अच्छा बीत रहा था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। साल 1754 के कुंभेर युद्ध में उनके पति खांडेराव शहीद हो गए। इस दुखद घटना से पूरा होल्कर परिवार सदमे में डूब गया।
अहिल्याबाई उस समय केवल 29 वर्ष की थीं। कुछ समय बाद उनके ससुर मल्हारराव होल्कर का भी निधन हो गया। इसके बाद पूरे राज्य की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। ससुर के निधन के बाद राज्य में अस्थिरता का माहौल था। लेकिन अहिल्याबाई ने हार नहीं मानी और खुद कमान संभाली।
साल 1767 में वह मालवा की महान शासक बनीं। उन्होंने अपनी बुद्धिमानी से विद्रोहियों को शांत किया। उन्होंने राज्य की सुरक्षा के लिए तुकोजीराव होल्कर को सेनापति नियुक्त किया। उनके इस साहसिक फैसले से पूरा मालवा साम्राज्य सुरक्षित हो गया।
इंदौर से महेश्वर राजधानी बदलना
शासन (होल्कर साम्राज्य) हाथ में लेते ही उन्होंने एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक निर्णय लिया। उन्होंने अपनी राजधानी को इंदौर से नर्मदा किनारे महेश्वर शिफ्ट कर दिया।
महेश्वर को उन्होंने कला, संस्कृति और व्यापार का बड़ा केंद्र बनाया। उन्होंने वहां एक भव्य और सुंदर किला भी बनवाया। आज भी महेश्वर का यह किला सैलानियों के लिए मुख्य आकर्षण है। उनके इस फैसले से नर्मदा तट का आर्थिक विकास तेजी से हुआ।
महेश्वरी साड़ी की शुरुआत
देवी अहिल्याबाई केवल युद्ध लड़ने में ही माहिर नहीं थीं। उनकी सोच अपने समय से बहुत आगे की थी। उन्होंने देश के विभिन्न कोनों से बेहतरीन बुनकरों को महेश्वर बुलाया।
अहिल्याबाई ने बुनकरों को रहने के लिए जमीन और विशेष सुविधाएं दीं। इसी प्रयास से विश्व प्रसिद्ध 'महेश्वरी साड़ी' का जन्म हुआ। आज यह साड़ी पूरी दुनिया में मध्य प्रदेश की पहचान है।
काशी से सोमनाथ तक मंदिरों का कराया रेनोवेशन
अहिल्याबाई को उनकी धार्मिक निष्ठा के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है। उस दौर में कई विदेशी आक्रमणकारियों ने भारतीय मंदिरों को तोड़ा था। अहिल्याबाई ने उन प्रसिद्ध मंदिरों के पुनर्निर्माण का बीड़ा उठाया।
अहिल्याबाई ने वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर का दोबारा निर्माण कराया। इसके अलावा सोमनाथ, गया और अयोध्या के मंदिरों का भी जीर्णोद्धार कराया। उन्होंने चार धाम यात्रा मार्ग पर धर्मशालाएं और कुएं भी बनवाए।
जनता को मानती थीं अपनी संतान
Rani Ahilyabai Holkar:अहिल्याबाई के शासनकाल को मालवा का स्वर्ण युग कहा जाता है। वह रोजाना अपने दरबार में आम जनता की समस्याएं खुद सुनती थीं। वह किसी भी तरह के भेदभाव के सख्त खिलाफ थीं। उन्होंने महिलाओं को संपत्ति के अधिकार दिलाने के लिए कड़े कानून बनाए।
वह राज्य के खजाने का उपयोग केवल लोक कल्याण के कार्यों में करती थीं। जनता उन्हें सम्मान से 'लोकमाता' कहकर बुलाने लगी थी। लगातार जनसेवा करते हुए अहिल्याबाई का स्वास्थ्य धीरे-धीरे गिरने लगा।
13 अगस्त 1795 को इस महान रानी ने अंतिम सांस ली। उनके निधन से पूरे मालवा साम्राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने करीब 28 वर्षों तक मालवा पर बहुत शानदार शासन किया। आज इंदौर का एयरपोर्ट और यूनिवर्सिटी उन्हीं के नाम पर है। उनका जीवन हमें साहस और सेवा की सीख देता है।
31 मई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 30 मई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 31 मई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1774: भारत में पहले डाक सेवा कार्यालय (Post Office) की शुरुआत हुई।
- 1867: समाज सुधार के लिए बंबई (मुंबई) में 'प्रार्थना समाज' की स्थापना की गई।
- 1921: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपने आधिकारिक झंडे को स्वीकार और अंगीकार किया।
- 1959: तिब्बत से निर्वासन के बाद बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा को भारत में सुरक्षित शरण दी गई।
- 1964: बंबई की सड़कों पर ऐतिहासिक इलेक्ट्रिक ट्राम आखिरी बार चली और इसका सफर बंद हुआ।
- 1994: दक्षिण अफ्रीका अधिकारिक तौर पर गुट निरपेक्ष आंदोलन का 109वां सदस्य देश बना।
- 1996: बेंजामिन नेतान्याहू पहली बार इस्रायल के नए प्रधानमंत्री चुने गए।
- 1999: एडोल्फ ट्यूटर स्लोवाक गणराज्य के राष्ट्रपति बने और कृष्ण प्रसाद भट्टराई ने नेपाल के पीएम के रूप में शपथ ली।
- 2001: मानवाधिकार आयुक्त राबिन्सन का कार्यकाल बढ़ाया गया और मिंस्क में पूर्व सोवियत देशों का शिखर सम्मेलन हुआ।
- 2006: मिशेल हैडेन अमेरिकी खुफिया एजेंसी (CIA) के नए डायरेक्टर बने और IAEA ने कहा कि ईरान से दुनिया को खतरा नहीं।
- 2007: सैप ब्लेटर को तीसरी बार अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संघ (FIFA) का प्रेसिडेंट चुना गया।
- 2008: सरकारी तेल कंपनियों ने हवाई ईंधन (ATF) के दामों में 18.5% की भारी बढ़ोतरी की।
- 2008: जरूरी दस्तावेज न होने के कारण पाकिस्तान के पूर्व मंत्री अंसार बर्नी को दिल्ली एयरपोर्ट से वापस भेजा गया।
- 2010: देश के हर प्राइवेट स्कूल में गरीब बच्चों के लिए 25% सीटें रिजर्व करने का शिक्षा का अधिकार कानून बना।
- 2010: आरबीआई के नए नियमों के तहत बैंकों में बचत खाताधारकों के ब्याज की गिनती अब रोज (Daily Basis) होने लगी।
- 1577: मुगल सम्राट जहांगीर की बुद्धिमान पत्नी नूरजहाँ का जन्म हुआ, जिनका असली नाम मेहरुन्निसा था।
- 1725: मालवा (मध्य प्रदेश) की महान और न्यायप्रिय शासक देवी अहिल्याबाई होल्कर का जन्म हुआ, देवी अहिल्याबाई जन्म जयंती।
- 1756: दुनिया में सम्मोहन (Hypnotism) की कला को वैज्ञानिक आधार देने वाले एब्बे फारिया का जन्म हुआ।
- 1843: मराठी रंगमंच और नाटकों में बड़ा बदलाव लाने वाले प्रसिद्ध नाटककार अण्णा साहेब किर्लोस्कर का जन्म हुआ।
- 1899: मशहूर पत्रकार और 'हिन्द समाचार' मीडिया ग्रुप के संस्थापक लाला जगत नारायन का जन्म हुआ।
- 1925: हिंदी सिनेमा के दिग्गज डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और स्क्रीनराइटर राज खोसला का जन्म हुआ।
- 1927: भारतीय सिनेमा जगत के बेहतरीन और क्लासिकल संगीत निर्देशक वनराज भाटिया का जन्म हुआ।
- 1942: मशहूर साप्ताहिक मैगजीन 'आउटलुक' के संस्थापक और जाने-माने पत्रकार विनोद मेहता का जन्म हुआ।
- 1964: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और राजनीतिज्ञ राजीव चंद्रशेखर का जन्म हुआ।
- 1973: भारतीय राजनेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री गुरनाम सिंह का इस दुनिया से निधन हुआ।
- 1987: लघु कथा लेखक और मशहूर मलयाली फिल्म निर्माता-निर्देशक जॉन अब्राहम का निधन हुआ।
- 1988: भारत के मशहूर स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्रा का निधन हुआ।
- 1988: भारतीय समाज सुधारक और प्रसिद्ध लेखक संतराम बी. ए. का इस दुनिया से निधन हुआ।
- 1998: 'जमना लाल बजाज पुरस्कार' से सम्मानित देश के महान स्वतंत्रता सेनानी विचित्र नारायण शर्मा का निधन हुआ।
- 1999: मध्य प्रदेश के भूतपूर्व और 10वें मुख्यमंत्री रहे वीरेंद्र कुमार सकलेचा का निधन हुआ।
- 2001: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजनीतिज्ञ जगन्नाथ कौशल का निधन हुआ।
- 2003: हिंदी सिनेमा को बेहतरीन धुनें देने वाले प्रसिद्ध संगीतकार अनिल बिस्वास का निधन हुआ।
- 2009: अंग्रेजी और मलयालम भाषा की बेहद मशहूर और लोकप्रिय लेखिका कमला दास का निधन हुआ।
- 2022: भारत के बेहद चहेते और मशहूर पार्श्वगायक के.के. (कृष्णकुमार कुन्नाथ) का अचानक निधन हुआ।
- विश्व धूम्रपान निषेध दिवस (World No Tobacco Day): लोगों को तंबाकू और सिगरेट के नुकसान के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल यह वैश्विक दिवस मनाया जाता है।
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