अयोध्या राम मंदिर: सदियों के संघर्ष से लेकर भव्य मंदिर बनने तक की कहानी

Kaushiki | Aug 05, 2026, 08:00 IST
Ayodhya Ram Mandir
5 अगस्त 2020 को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए ऐतिहासिक भूमि पूजन हुआ था। पीएम नरेंद्र मोदी ने चांदी की ईंट रखकर मंदिर की नींव रखी थी। सदियों लंबे संघर्ष के बाद शुरू हुआ यह निर्माण आज एक भव्य और दिव्य राम मंदिर के रूप में पूरा हो चुका है।

Ayodhya Ram Mandir: 5 अगस्त 2020 का दिन भारत के इतिहास में दर्ज हो चुका है। इस दिन उत्तर प्रदेश के अयोध्या शहर में एक नया इतिहास रचा गया। करोड़ों श्रद्धालुओं का 500 सालों पुराना सपना सच होने जा रहा था।



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या पहुंचकर अयोध्या का राममंदिर का भूमि पूजन किया। उन्होंने वैदिक नियमों के साथ मंदिर निर्माण की पहली शिला रखी थी। इस कार्यक्रम में देश के बड़े साधु और संत शामिल हुए थे।



पूरी अयोध्या नगरी को दीपों और फूलों से बहुत सुंदर सजाया गया था। लोग अपने घरों में दीये जलाकर खुशियां मना रहे थे। यह सिर्फ एक इमारत की नींव रखने का काम नहीं था। यह करोड़ों लोगों की आस्था और भरोसे की बहुत बड़ी जीत थी। आइए जानते हैं कि इस पूरे सफर की कहानी कैसी रही।



Up:सिद्धि में बदला सदियों का संघर्ष...पूरी हुई कामना, फैसले से प्राण प्रतिष्ठा तक राम मंदिर का गौरव


राम मंदिर आंदोलन का पूरा इतिहास

राम मंदिर का विवाद कई सौ साल पुराना माना जाता है। 16वीं सदी में बाबर के सेनापति मीर बाकी ने मस्जिद बनवाई थी। हिंदू पक्ष का मानना था कि वहां भगवान राम का जन्म हुआ था।



इसके बाद से ही उस स्थान को लेकर संघर्ष शुरू हो गया। साल 1853 में पहली बार इस जगह पर बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। अंग्रेजी सरकार ने 1859 में विवादित जगह पर बाड़ लगा दी थी।



22 दिसंबर 1949 की रात मुख्य गुंबद के नीचे रामलला की मूर्ति प्रकट हुई। इसके बाद सरकार ने उस पूरे विवादित परिसर को लॉक कर दिया। साल 1980 के दशक में विश्व हिंदू परिषद ने आंदोलन तेज कर दिया। 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचे को ढहा दिया गया था।



Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह - Khabar Lahariya (खबर लहरिया)


कोर्ट का फैसला और कानूनी जीत

विवादित ढांचे के गिरने के बाद मामला अदालत में बहुत लंबा चला। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 में जमीन को तीन हिस्सों में बांट दिया था। लेकिन कोई भी पक्ष हाईकोर्ट के इस फैसले से सहमत नहीं हुआ।



इसके बाद यह मामला देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रिम कोर्ट ने 40 दिनों तक इस मामले पर लगातार सुनवाई की। आखिरकार 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट का एतिहासिक फैसला आया।



अदालत ने पूरी विवादित जमीन रामलला विराजमान को देने का आदेश दिया। साथ ही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए अलग जमीन देने को कहा। इस फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हुआ। केंद्र सरकार ने मंदिर बनाने के लिए एक खास ट्रस्ट बनाया।



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5 अगस्त 2020 का वो ऐतिहासिक दिन

9 नवंबर के फैसले के बाद 5 अगस्त 2020 की तारीख तय हुई। इस दिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद अयोध्या नगरी पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले हनुमानगढ़ी मंदिर जाकर बजरंगबली के दर्शन किए।



इसके बाद वे रामलला के दर्शन करने मुख्य परिसर में गए। पीएम मोदी ने साष्टांग प्रणाम करके रामलला का आशीर्वाद लिया था। दोपहर 12 बजकर 44 मिनट पर राम मंदिर भूमि पूजन का शुभ मुहूर्त था। शुभ मुहूर्त में 40 किलो की चांदी की ईंट रखी गई।



पूजन के दौरान पूरे देश में जय श्रीराम के नारे गूंज रहे थे। यह पल हर रामभक्त के लिए बहुत ही भावुक कर देने वाला था। इस तरह अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू हो गया।



2020 से अब तक की पूरी टाइमलाइन

  • राम मंदिर निर्माण का काम बहुत तेजी के साथ आगे बढ़ाया गया।
  • L&T कंपनी ने मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी संभाली थी।
  • 2021 में मंदिर की मजबूत नींव ढालने का काम पूरा कर लिया गया।
  • 2022 में मंदिर के मुख्य चबूतरे और पत्थरों को तराशा गया।
  • 2023 के अंत तक मंदिर का पहला तला बनकर तैयार हो गया।
  • 22 जनवरी 2024 को रामलला की नई मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई।
  • पीएम मोदी ने मुख्य यजमान बनकर प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान पूरा किया। इस कार्यक्रम को पूरी दुनिया में करोड़ों लोगों ने लाइव देखा।
  • प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर को आम जनता के लिए खोल दिया गया। आज रोज लाखों श्रद्धालु रामलला के दर्शन करने अयोध्या आ रहे हैं।
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राम मंदिर की भव्यता और वर्तमान स्थिति

आज अयोध्या का राम मंदिर स्थापत्य कला का एक अद्भुत नमूना है। यह मंदिर पारंपरिक नागर शैली में बहुत ही सुंदर बनाया गया है। मंदिर के निर्माण में लोहे या सीमेंट का उपयोग नहीं हुआ है।



इसे सिर्फ राजस्थान के मजबूत गुलाबी बलुआ पत्थरों से बनाया गया है। यह मंदिर करीब हजारों सालों तक सुरक्षित रहने के हिसाब से बना है। मंदिर परिसर में कुल 392 खंभे और 44 सुंदर नक्काशीदार दरवाजे हैं।



अयोध्या शहर में अब नया अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और नया रेलवे स्टेशन है। अयोध्या अब दुनिया का एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र बन चुका है। 5 अगस्त 2020 को बोया गया बीज आज वटवृक्ष बन चुका है। राम मंदिर का यह सफर आस्था और धैर्य की मिसाल है।



सोर्स लिंक्स



  • Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra Official Website
  • Press Information Bureau (PIB) India

05 अगस्त की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं

आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 05 अगस्त का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।



आइए जानते हैं 05 अगस्त (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-



विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

  • 1996: अटलांटा शताब्दी ओलम्पिक का सिडनी में अगले आयोजन के वादे के साथ समापन हुआ।
  • 1999: चीन और ताइवान के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर पहुँचा।
  • 2002: गोंजालो लोजाडा बोलीविया के नए राष्ट्रपति चुने गए।
  • 2008: भारत के अंडमान-निकोबार द्वीप से 176 मील उत्तर-पूर्व हिंद महासागर में 5.5 तीव्रता का भूकंप आया।
  • 2013: भारत की जूनियर महिला हॉकी टीम ने जर्मनी में इंग्लैंड को 3-2 से हराकर कांस्य पदक जीता।
  • 2020: अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए ऐतिहासिक भूमि पूजन संपन्न हुआ।
  • 1852: आचार्य प्यारे मोहन - उड़ीसा के प्रमुख राष्ट्रवादी नेता।
  • 1890: दत्तो वामन पोतदार - प्रसिद्ध मराठी साहित्यकार एवं समाजसेवी।
  • 1890: नील आर्मस्ट्रांग - चाँद पर कदम रखने वाले दुनिया के पहले अंतरिक्ष यात्री।
  • 1901: द्वारका प्रसाद मिश्रा - स्वतंत्रता सेनानी, साहित्यकार और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री।
  • 1907: बी. जी. रेड्डी - मद्रास विधानसभा के प्रमुख सदस्य।
  • 1915: शिवमंगल सिंह 'सुमन' - हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध प्रगतिशील कवि।
  • 1924: जी. जी. स्वेल - भारत की लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष।
  • 1929: अरविंद जोशी - जाने-माने भारतीय अभिनेता।
  • 1936: सुरेश मेहता - भारतीय जनता पार्टी के नेता और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री।
  • 1944: उत्तरा बाओकर - भारतीय रंगमंच, फिल्म और टीवी की प्रसिद्ध अभिनेत्री।
  • 1947: वीरेन डंगवाल - हिंदी के प्रसिद्ध एवं समकालीन कवि।
  • 1969: वेंकटेश प्रसाद - भारत के पूर्व प्रसिद्ध तेज गेंदबाज और क्रिकेटर।
  • 1975: काजोल मुखर्जी - बॉलीवुड की प्रसिद्ध और सफल भारतीय अभिनेत्री।
  • 1980: वत्सल सेठ - भारतीय फिल्म और टीवी अभिनेता।
  • 1987: जेनेलिया डिसूजा - प्रसिद्ध भारतीय अभिनेत्री।
  • 2001: अंशू मलिक - भारत की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवान।
  • 1950: गोपीनाथ बोरदोलोई - प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और असम के प्रथम मुख्यमंत्री।
  • 1998: केशब चन्द्र गोगोई - कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और असम के पूर्व मुख्यमंत्री।
  • 1998: टोडर ज़िकोव - बुल्गारिया के 36वें प्रधानमंत्री।
  • 2000: लाला अमरनाथ - भारतीय क्रिकेट इतिहास के महान और दिग्गज खिलाड़ी।
  • 2014: प्राण कुमार शर्मा - 'चाचा चौधरी' के रचयिता और प्रसिद्ध भारतीय कार्टूनिस्ट।
  • 2025: सत्यपाल मलिक - भारत के अनुभवी एवं वरिष्ठ राजनेता।

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