हिरोशिमा दिवस: सुबह 8:15 बजे हुआ ऐसा धमाका कि 4000 डिग्री तापमान में पिघल गए लोग
Hiroshima Bombing History: 06 अगस्त का दिन इतिहास में एक काले दिन की तरह दर्ज है। यह वही दिन है जब मानव इतिहास में पहली बार परमाणु बम का इस्तेमाल हुआ। द्वितीय विश्व युद्ध अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका था। चारों तरफ युद्ध का माहौल और तनाव बना हुआ था।
06 अगस्त 1945 की सुबह जापान के हिरोशिमा शहर के लिए बिल्कुल सामान्य थी। लोग अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे। बच्चे स्कूल जाने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन कुछ ही मिनटों में सब कुछ पूरी तरह से बदलने वाला था।
ए लिटिल बॉय
अमेरिका के एक बी-29 बमवर्षक विमान ने आसमान में उड़ान भरी। इस विमान का नाम एनोला गे रखा गया था। इस विमान में एक बेहद खतरनाक और विनाशकारी हथियार मौजूद था। उस हथियार का नाम 'लिटिल बॉय' रखा गया था।
सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर यह बम गिराया गया। हवा में ही एक जोरदार और भयानक धमाका हुआ। रोशनी इतनी तेज थी कि आँखें चकाचौंध हो गईं। कुछ ही सेकंड में पूरा शहर जलकर खाक हो गया।
हिरोशिमा शहर देखते ही देखते श्मशान में बदल गया। हजारों लोग तुरंत ही भाप बनकर उड़ गए। यह हमला इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक बन गया। आज भी यह दिन दुनिया को शांति का संदेश देता है।
द्वितीय विश्व युद्ध और हमले का बैकग्राउंड
वर्ष 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध अपने चरम पर था। जर्मनी ने आत्मसमर्पण कर दिया था। लेकिन जापान पीछे हटने को तैयार नहीं था। वह लगातार अमेरिकी सेना को टक्कर दे रहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने एक बड़ा फैसला लिया। वे युद्ध को जल्द से जल्द खत्म करना चाहते थे।
अमेरिका का मानना था कि इससे उनके सैनिकों की जान बचेगी। इसलिए परमाणु बम का इस्तेमाल करने की योजना बनी। अमेरिका ने न्यू मैक्सिको के रेगिस्तान में इसका सफल परीक्षण किया था। इस गुप्त प्रोजेक्ट का नाम 'मैनहट्टन प्रोजेक्ट' रखा गया था। इस प्रोजेक्ट में दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक शामिल थे।
जापान को आत्मसमर्पण करने की आखिरी चेतावनी दी गई थी। लेकिन जापान के सैन्य नेताओं ने इस चेतावनी को खारिज कर दिया। इसके बाद हिरोशिमा पर हमला करने की अंतिम मंजूरी दी गई।
हिरोशिमा को चुनने की एक खास वजह थी। यह शहर जापान का एक मुख्य सैन्य और औद्योगिक केंद्र था। यहाँ अमेरिकी सेना अपनी ताकत दिखाना चाहती थी। ताकि जापान तुरंत युद्ध रोक दे।
06 अगस्त 1945 हमले की पूरी टाइमलाइन
तड़के 2 बजकर 45 मिनट पर एनोला गे विमान ने उड़ान भरी। यह विमान टिनियन द्वीप के हवाई अड्डे से रवाना हुआ था। विमान में पायलट पॉल तिब्बत्स और उनकी टीम मौजूद थी।
सुबह 7 बजे जापानी रडार ने अमेरिकी विमानों को देखा। लेकिन उन्होंने इसे केवल एक निगरानी विमान समझा। इसलिए हिरोशिमा में कोई बड़ा अलर्ट जारी नहीं किया गया।
सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर बम को गिराया गया। लिटिल बॉय बम जमीन से 1900 फीट ऊपर ही फट गया। हवा में धमाका होने से इसका असर बहुत ज्यादा बढ़ गया।
धमाके के समय तापमान 4000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। इस भीषण गर्मी ने लोहे और पत्थरों को भी पिघला दिया। धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई।
सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर पूरा शहर धुएं के गुबार से ढक गया। मशरूम के आकार का एक विशाल बादल आसमान में बन गया। कुछ ही पलों में पूरा हिरोशिमा शहर राख का ढेर बन गया।
लिटिल बॉय बम की ताकत और तबाही
'लिटिल बॉय' नाम सुनने में बहुत छोटा लगता था। लेकिन इसकी विनाशकारी क्षमता बहुत ही भयानक थी। यह यूरेनियम-235 पर आधारित एक परमाणु बम था।इस बम का वजन लगभग 4400 किलोग्राम था। इसकी लंबाई 10 फीट और चौड़ाई 28 इंच थी। इसके अंदर लगभग 64 किलोग्राम यूरेनियम भरा हुआ था।
इसकी ताकत 15 किलोटन टीएनटी के बराबर मानी गई थी। इसने लगभग 13 वर्ग किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह तबाह कर दिया। शहर की 70 प्रतिशत इमारतें पल भर में गिर गईं।
धमाके के बाद रेडियोधर्मी विकिरण यानी रेडिएशन फैल गया। जो लोग तुरंत नहीं मरे, वे रेडिएशन के शिकार हो गए। हवा और पानी पूरी तरह जहरीले हो चुके थे।
धमाके के कुछ देर बाद काली बारिश होने लगी। यह बारिश जहरीले रेडियोधर्मी कणों से भरी हुई थी। प्यास से तड़पते लोगों ने यह पानी पिया और उनकी मौत हो गई।
परमाणु हमले के बाद का दर्दनाक असर
हमले के तुरंत बाद लगभग 80 हजार लोग मारे गए। साल 1945 के अंत तक यह संख्या बढ़कर 1 लाख 40 हजार हो गई। इसमें ज्यादातर आम नागरिक और मासूम बच्चे शामिल थे।
जो लोग इस हमले में बच गए, उन्हें हिबाकुशा कहा गया। हिबाकुशा का मतलब होता है परमाणु बम से प्रभावित लोग। इन लोगों ने जीवन भर असहनीय दर्द और बीमारियां झेलीं।
रेडिएशन के कारण लोगों को कैंसर और ल्यूकेमिया जैसी बीमारियां हुईं। आने वाली कई पीढ़ियों तक विकलांग बच्चे पैदा होते रहे। अनुवांशिक विकारों ने परिवारों को तबाह कर दिया।
अस्पताल और डॉक्टर भी इस हमले में खत्म हो चुके थे। घायलों का इलाज करने वाला कोई नहीं बचा था। पूरे शहर में केवल चीख-पुकार और सन्नाटा छाया हुआ था। यह तबाही केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक भी थी। लोगों ने अपने पूरे परिवार को अपनी आँखों के सामने खो दिया था। यह दर्द कभी न भरने वाला जख्म बन गया।
नागासाकी हमला और जापान का सरेंडर
हिरोशिमा पर हमले के बाद भी तबाही रुकी नहीं थी। केवल तीन दिन बाद अमेरिका ने फिर हमला किया। 9 अगस्त 1945 को नागासाकी शहर पर बम गिराया गया। इस दूसरे परमाणु बम का नाम 'फैट मैन' रखा गया था। यह बम प्लूटोनियम पर आधारित था। इस हमले में भी लगभग 70 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे।
दो-दो परमाणु हमलों के बाद जापान पूरी तरह टूट गया। जापान के सम्राट हिरोहितो ने आत्मसमर्पण करने का फैसला किया। 15 अगस्त 1945 को जापान ने सरेंडर की घोषणा की। इसी के साथ द्वितीय विश्व युद्ध पूरी तरह से समाप्त हो गया। लेकिन दुनिया ने शांति की बहुत बड़ी कीमत चुकाई थी। दो हंसते-खेलते शहर हमेशा के लिए मिट चुके थे।
इस घटना ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया। दुनिया के सभी देश परमाणु हथियारों के खतरे को समझ गए। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई कड़े नियम बनाए गए।
हिरोशिमा दिवस का संदेश और महत्व
हर साल 06 अगस्त को हिरोशिमा दिवस मनाया जाता है। इसे विश्व परमाणु विरोधी दिवस भी कहा जाता है। इस दिन दुनियाभर में शांति सभाएं आयोजित की जाती हैं। हिरोशिमा के पीस मेमोरियल पार्क में कार्यक्रम होता है। सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर मौन रखा जाता है। मृत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि युद्ध केवल विनाश लाता है। परमाणु हथियार मानवता के सबसे बड़े दुश्मन हैं। इनका इस्तेमाल किसी भी समस्या का हल नहीं हो सकता।
आज कई देशों के पास हिरोशिमा से भी खतरनाक बम हैं। अगर आज परमाणु युद्ध हुआ, तो पूरी धरती खत्म हो जाएगी। इसलिए परमाणु हथियारों को पूरी तरह खत्म करना जरूरी है।
यह दिन हमें शांति, अहिंसा और भाईचारे का पाठ पढ़ाता है। हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित दुनिया बनानी होगी। यही इस दिन का असली और सबसे बड़ा संदेश है।
हिरोशिमा की त्रासदी मानव इतिहास का सबसे काला अध्याय है। 06 अगस्त 1945 की घटना हमें चेतावनी देती रहती है। हमें इतिहास की इस भूल से बड़ा सबक लेना चाहिए।
Reference Links:
- Hiroshima Peace Memorial Museum Official Archives (pcf.city.hiroshima.jp)
- United Nations Disarmament Affairs - Hiroshima Day History (un.org)
- National World WarII Museum - Atomic Bombing of Hiroshima (nationalww2museum.org)
06 अगस्त की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 06 अगस्त का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 06 अगस्त (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1914: ऑस्ट्रिया ने रूस के विरुद्ध युद्ध की आधिकारिक घोषणा की।
- 1945: अमेरिका ने जापानी शहर हिरोशिमा पर 'लिटिल बॉय' नाम का पहला परमाणु बम गिराया।
- 2001: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच महत्वपूर्ण आर्थिक समझौता संपन्न हुआ।
- 2002: भारत-पाकिस्तान तनाव के चलते ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान से अपने नागरिकों को वापस बुलाया।
- 2004: फिजी तख्तापलट मामले में उपराष्ट्रपति जोपे सेनीलोली को 4 साल जेल की सजा सुनाई गई।
- 2005: भारत और पाकिस्तान सीमा पर साझा गश्त तेज करने के लिए सहमत हुए।
- 2007: त्रिनिदाद में ऐतिहासिक हिंदू मंदिर क्षतिग्रस्त हुआ तथा हंगरी में 80 लाख साल पुराना देवदार जीवाश्म मिला।
- 2008: भेल (BHEL) को कृष्णापट्टनम में सुपर क्रिटिकल बॉयलर का ऑर्डर मिला और टाटा ने बंगाल से प्लांट हटाने का फैसला टाला।
- 1915: गुरदयाल सिंह ढिल्लों – भारत के पाँचवें लोकसभा अध्यक्ष का जन्म हुआ।
- 1921: के. एम. चांडी – स्वतंत्रता सेनानी और गुजरात व मध्य प्रदेश के पूर्व राज्यपाल का जन्म।
- 1933: ए. जी. कृपाल सिंह – प्रसिद्ध भारतीय क्रिकेटर का जन्म हुआ।
- 1944: अविनाश दीक्षित – भारतीय मूल के जाने-माने अमेरिकी अर्थशास्त्री का जन्म।
- 1959: राजेन्द्र सिंह – 'वाटरमैन ऑफ इंडिया' के नाम से प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता का जन्म।
- 1970: एम. नाइट श्यामलन – प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी फिल्म निर्देशक का जन्म।
- 1925: सर सुरेन्द्रनाथ बनर्जी – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का निधन।
- 1981: भूपेश गुप्ता – प्रख्यात भारतीय नेता व सांसद का निधन।
- 1982: एस. के. पोट्टेक्काट्ट – प्रसिद्ध मलयालम साहित्यकार का निधन।
- 1982: गोदे मुरहारी – छठवीं लोकसभा के उपाध्यक्ष का निधन।
- 1997: बीरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य – प्रसिद्ध असमिया साहित्यकार का निधन।
- 2003: रॉबिन बनर्जी – प्रसिद्ध वन्यजीव विशेषज्ञ और पर्यावरणविद् का निधन।
- 2006: सूरज भान – भारतीय राजनीतिज्ञ और वरिष्ठ दलित नेता का निधन।
- 2018: आर. के. धवन – कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद का निधन।
- 2019: सुषमा स्वराज – पूर्व विदेश मंत्री, भाजपा नेत्री और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री का निधन।
- विश्व स्तनपान दिवस (सप्ताह): माताओं और शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के लिए।
- हिरोशिमा दिवस (परमाणु विरोधी दिवस): विश्व शांति और परमाणु हथियारों के विरोध का प्रतीक दिन।
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