छलावा नहीं, रियल रेवोल्यूशन... हर भारतीय छात्र को मिले अपना एआई ट्यूटर

Amresh Kushwaha | Aug 24, 2026, 15:52 IST
हर छात्र को मिले अपना एआई ट्यूटर- आईएएस श्रीवास्तव कृष्णा
आईएएस (IAS) अधिकारी श्रीवत्स कृष्णा ने भारतीय शिक्षा में एआई (Artificial Intelligence) ट्यूटर को असली क्रांति बताया है। उनका मानना है कि सरकार को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) बनाकर हर बच्चे को मुफ्त एआई (AI) ट्यूटर उपलब्ध कराना चाहिए।

कोचिंग का बड़ा बाजार

भारतीय छात्र पूरी दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हैं। रेडसीर (Redseer) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत का टेस्ट-प्रिपरेशन बाजार वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) तक 14.8 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है। यही बाजार वित्तीय वर्ष 2030 (FY30) तक 23 से 26 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इस समय देश भर में करीब दो लाख कोचिंग सेंटर चल रहे हैं। कक्षा 9 से 12 में 6.5 करोड़ छात्र हैं। इनमें से 2.7 करोड़ छात्र सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं।



कोचिंग पर निर्भरता

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के 2025 के सर्वेक्षण में पाया गया कि 27 प्रतिशत छात्र निजी कोचिंग ले रहे थे। शहरी इलाकों में यह आंकड़ा 30.7 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 25.5 प्रतिशत रहा। इसका मतलब है कि 1.7 करोड़ से दो करोड़ छात्र कोचिंग पर निर्भर हैं।



एकल प्लेटफॉर्म असमर्थ

किसी भी एकमात्र निजी प्लेटफॉर्म के पास इतना सामर्थ्य नहीं है कि वह पूरे देश को सेवा दे सके। उदाहरण के लिए, फिजिक्सवाला (PhysicsWallah) के पास लगभग 49 लाख पेड ऑनलाइन उपयोगकर्ता हैं। जबकि हमारी जरूरत इससे काफी बड़ी है। इसे एक नेटवर्क के रूप में बनाया जाना चाहिए।



एआई ट्यूटर का विजन

आईएएस श्रीवत्स कृष्णा का कहना है कि यह कोई छलावा नहीं बल्कि रियल रेवोल्यूशन (Real Revolution) है। सरकार को हर बच्चे को मुफ्त एआई (AI - Artificial Intelligence) ट्यूटर देने के लिए आगे आना चाहिए। इसका उद्देश्य निजी कोचिंग को बंद करना नहीं है। इसका मुख्य मकसद आखिरी लाइन में खड़े बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है।



सार्वजनिक और निजी मॉडल

हमें कोचिंग का राष्ट्रीयकरण नहीं करना चाहिए। इसके लिए पब्लिक रेल, प्राइवेट इंजन मॉडल बनाना होगा। जैसे यूपीआई (UPI - Unified Payments Interface) और ओएनडीसी (ONDC - Open Network for Digital Commerce) ने काम किया, वैसे ही शिक्षा में भी नेटवर्क खोलना होगा। सरकार प्लेटफॉर्म बनाएगी और निजी क्षेत्र कंटेंट देगा।



बंडल व्यवस्था को तोड़ना

कोचिंग संस्थान चार चीजों का बंडल बनाकर भारी फीस लेते हैं। इनमें कंटेंट, डाउट सॉल्विंग, सहकर्मी समूह और गुणवत्ता का संकेत शामिल हैं। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की मदद से हम पहली दो चीजों की लागत शून्य कर सकते हैं। इसे आईआईटी (IIT) मद्रास के बोधन एआई (Bodhan.ai) जैसे केंद्रों से जोड़ा जा सकता है।



शुरुआत नीट और जेईई से

इसकी शुरुआत नीट (NEET - National Eligibility cum Entrance Test) और जेईई (JEE - Joint Entrance Examination) जैसी बड़ी परीक्षाओं से होनी चाहिए। यूट्यूब पर कंटेंट पहले से उपलब्ध है। बस एक मानकीकृत सिस्टम और व्यक्तिगत डाउट सॉल्विंग की जरूरत है।



डेटा पर छात्र का अधिकार

इसमें छात्र साइन-अप के लिए आधार का उपयोग करेंगे। शैक्षणिक रिकॉर्ड के लिए अपार आईडी (APAAR ID - Automated Permanent Academic Account Registry) का उपयोग होगा। छात्र के डेटा का मालिक खुद छात्र होगा। गूगल (Google) और मेटा (Meta) जैसी टेक कंपनियां भी इस दिशा में काम कर रही हैं। यह पूरी पहल भारतीय छात्रों के भविष्य को नई दिशा देगी।



नोट- इस लेख के लेखक आईएएस श्रीवास्तव कृष्णा हैं। इस लेख में उनके निजी विचार दिए गए हैं।

FAQ

  1. क्या सरकार निजी कोचिंग सेंटरों को बंद करने की योजना बना रही है?
    नहीं, सरकार का उद्देश्य निजी कोचिंग उद्योग को बंद करना नहीं है। योजना यह है कि 'पब्लिक रेल, प्राइवेट इंजन' मॉडल के तहत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए, ताकि हर छात्र को मुफ्त और उच्च गुणवत्ता वाला एआई (AI) ट्यूटर मिल सके और शिक्षा में समानता आए।
  2. एआई ट्यूटर की शुरुआत किन परीक्षाओं से करने का प्रस्ताव है?
    इसकी शुरुआत देश की दो सबसे बड़ी और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं - नीट (NEET) और जेईई (JEE) से करने का प्रस्ताव है। ये परीक्षाएं वस्तुनिष्ठ और मशीन-ग्रेडेबल होती हैं, जिससे एआई मॉडल के माध्यम से डाउट सॉल्विंग और प्रैक्टिस कराना आसान होता है।

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