बोल हरि बोल: सत्ता के गलियारों से फुसफुसाहटें… नाम नहीं, सिर्फ इशारे

Harish Divekar | Mar 01, 2026, 13:32 IST
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मध्यप्रदेश की सत्ता के गलियारों में भ्रष्टाचार, प्रभाव और कुर्सी की राजनीति इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। आज के बोल हरि बोल में पढ़िए इन घटनाओं के बारे में विस्तार से...

BHOPAL. कुर्सियां बदलती हैं, चेहरे बदलते हैं, पर सत्ता की कहानियां नहीं बदलतीं। फाइलों के नीचे दबे सच, मीटिंगों में अटकी नैतिकता, और फोन की घंटियों में उलझी प्रशासनिक मजबूरियां- यही है इस हफ्ते वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम का Bol Hari Bol।



नाम हम नहीं लेंगे… पर जिनके कान खड़े होने हैं, वो खुद समझ जाएंगे।



साहब, रशियन वाली बात जरा धीरे बोलते!

निगम के खजाने को भरने के लिए कमिश्नर साहब ने अफसरों की बैठक बुलाई। मामला उठा, एक बड़े मैरिज गार्डन और स्कूल संचालक का, जो टैक्स देने में सालों से संवेदनशील हैं। उपायुक्त साहब ने हाथ जोड़ दिए। उन्होंने कहा कि सर, इनसे ना टैक्स वसूल सकता हूं, ना अतिक्रमण तोड़ सकता हूं।



कमिश्नर हैरान, क्यों भला? जवाब आया, बड़े लोग हैं साहब… ऊपर से फोन आते हैं… जजों तक के। और… रशियन लड़कियां भी सप्लाई करते हैं। बस… रशियन शब्द गिरा और मीटिंग की हवा निकल गई। कमिश्नर साहब ने पानी मांगा… और विषय बदल दिया। रेवेन्यू बढ़े या न बढ़े, प्रभाव का ब्याज जरूर बढ़ रहा है।



कुर्सी गई तो परिक्रमा भी गई

जब तक भाईसाहब बड़े पद पर थे, दरबार में भीड़ लगी रहती थी। चरणवंदना की प्रतिस्पर्धा चलती थी। पद गया… तो परिक्रमा भी गई।


हालिया मातृशोक ने आईना दिखा दिया। वीवीआई सूची सिकुड़कर सच्चे परिचितों तक रह गई।



जो दिन-रात कसीदे पढ़ते थे, वे अब व्यस्त हो गए। भाईसाहब समझ गए हैं। भीड़, कुर्सी की होती है… व्यक्ति की नहीं। हां, प्रतिभा है उनमें। बाउंस बैक करेंगे…लेकिन इस बार भ्रम कम और अनुभव ज्यादा होगा।



मंत्री से ज्यादा OSD का करंट!

दो मंत्रियों के ओएसडी इन दिनों हाई वोल्टेज पर हैं। निवेशक मंत्री से मिल लें, पर काम तभी होगा जब ओएसडी प्रसन्न हों। सवाल उठ रहा है, मंत्री नियंत्रण में हैं या नियंत्रण कहीं और है? मामला सूबे के मुखिया तक पहुंच चुका है। अब देखना है करंट कम होगा या सर्किट बदलेगा।



भ्रष्टाचार का इनाम- बड़ी कलेक्टरी!

बुंदेलखंड के एक कलेक्टर पर भ्रष्टाचार के आरोपों की फाइल हल्की नहीं। एसईआर की ढाल थी, सो हटे नहीं। अब चर्चा है, सजा नहीं, बल्कि कमाऊ जिले की कलेक्टरी मिलने वाली है। अंदरखाने फुसफुसाहट है। साहब की मैडम आईआरएस हैं… प्रभावशाली भी। इच्छा है कि साहब पास ही पोस्ट हों। सिस्टम में आरोप कभी-कभी सीढ़ी भी बन जाते हैं।



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