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BHOPAL. सर्दियों वाले दिन अब सिमट रहे हैं। पारा चढ़ रहा है। हां, ऐसा ही पारा हर हफ्ते चढ़ता है सियासत और अफसरशाही में। अब देखिए न, एक साहब के शौक की चर्चा ने मंत्रालय में कानाफूसी का पारा चढ़ा दिया है। बुंदेलखंड से भी एक खबर सामने आई है। वहां एक कलेक्टर साहब चर्च को चंदा दिला रहे हैं।
इधर, मंत्रीजी की चाहत अधूरी रह गई है। उन्होंने अपनी पसंदीदा मैडम को आगे बढ़ाने के भरसक प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई है। हालांकि मंत्रीजी ने हार नहीं मानी है। अब उनका टाइम खराब चल रहा है, इसलिए शांत बैठ गए हैं।
खैर, देश-प्रदेश में खबरें तो और भी बहुत हैं, आप तो सीधे नीचे उतर आईए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।
चर्च को फंडिंग करा रहे साहब!
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बुंदेलखंड के जिले में पदस्थ एक कलेक्टर साहब वैसे तो लंबे अरसे से विवादों में हैं। अब हाल ही में अंदरखाने से खबर आई है कि कलेक्टर साहब गुपचुप तरीके से एक चर्च को फंडिंग करवा रहे हैं। वैसे धार्मिक संस्थानों को दान देना या दिलवाना कोई अपराध तो नहीं है, लेकिन हवा उलटी बह रही है।
लिहाजा, साहब पूरा काम बेहद गोपनीय तरीके से कर रहे हैं। अब कोई ऐसे गुपचुप काम करे और द सूत्र को खबर न हो, ऐसा भले कैसे हो सकता है। फिलहाल ये कलेक्टर साहब बड़े साहब की गुड लिस्ट में हैं।
यही वजह है कि इन पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगने और जनप्रतिनिधियों की नाराजगी सामने आने के बाद भी कुछ नहीं हुआ है और कलेक्टर साहब अंगद की तरह अपने पैर जमाए हुए हैं।
शौक बड़ी चीज होती है...
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देखिए, शौक बड़ी चीज होती है। फिर इसके आगे सब बौना हो जाता है। यही मामला ले लीजिए। मंत्रालय में सचिव के पद पर पदस्थ एक साहब राजधानी के एक हाईप्रोफाइल सैलून में अक्सर विजिट करते देखे जाते हैं। साहब को वहां की मसाज खास तौर पर पसंद है।
साहब के आने से पहले ही सैलून वाला मसाज रूम की व्यवस्थाएं पूरी तरह चाक-चौबंद कर देता है, ताकि साहब आराम करें और पूरे कम्फर्ट के साथ 2-3 घंटे मसाज का आनंद ले सकें। अब आगे क्या लिखना… आप समझदार हैं। आजकल हाईप्रोफाइल सैलून में मसाज के नाम पर क्या-क्या होता है, ये बताने की जरूरत नहीं है।
खाकी के लिए खाली करना होगा बंगला
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होम डिपार्टमेंट के अफसर इन दिनों अपने ही अंदाज में खेल खेलते नजर आ रहे हैं। अब मामला ऐसा है कि मामा के दाएं- बाएं रहने वाले एक पूर्व मंत्रीजी लंबे समय से सरकारी बंगला खाली नहीं कर रहे थे। पात्रता खत्म होने के बाद भी बंगले पर उनका कब्जा बना हुआ था।
इसी बीच होम डिपार्टमेंट ने हाल ही में वही बंगला पुलिस कमिश्नर को आवंटित कर दिया। बस फिर क्या था, पूरा मामला पलट गया। अब नेताजी सकते में हैं और खुद होम डिपार्टमेंट के चक्कर लगाकर बंगला खाली करने के लिए समय मांगते फिर रहे हैं। अब देखना यह है कि नेताजी कितनी जल्दी बंगला खाली करते हैं या मामला कुछ दिन और खिंचता है।
मंत्री नहीं बचा पाए चहेती को...
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अक्सर विवादों में रहने वाले मंत्रीजी इस बार चाहकर भी अपनी चहेती को नहीं बचा पाए। चर्चा है कि मंत्रीजी को एक प्राइमरी टीचर इतनी पसंद आई कि अलग-अलग तरीके अपनाकर उसे एमपीपीएससी वाले पद तक पहुंचा दिया। इतना ही नहीं, अपने महकमे में डेपुटेशन पर बुलाकर बंगला और गाड़ी उपलब्ध करा दी, लेकिन मंत्रीजी के अपने ही चाहने वालों ने इतनी शिकायतें कर दीं कि मामला ऊपर तक पहुंच गया। हालात ऐसे बने कि मंत्रीजी चाहकर भी अपनी चहेती को बचा नहीं पाए।
दरअसल, इस समय मंत्रीजी खुद बड़े विवाद में उलझे हैं। ऐसे माहौल में उन्होंने कुछ समय चुप रहना बेहतर समझा है। सूत्रों का कहना है कि जैसे ही मंत्रीजी विवादों से बाहर आएंगे, वैसे ही मैडम को फिर सिस्टम में ताकत दिलाने की कोशिश शुरू हो सकती है। मंत्रीजी की चाहत ही कुछ ऐसी बताई जा रही है… अब आगे क्या हो, ये आने वाला समय ही बताएगा।
काम तो बोलता है जी!
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अगर आप सच में विजनरी होते हैं तो आपका काम खुद अपनी कहानी कहता है। हाल की एक पोस्टिंग ने यही साबित भी किया है। साहब जब पहले एक महकमे में पदस्थ थे, तब उनका विजन और काम करने का तरीका हर किसी को प्रभावित करता था। सिस्टम में उनकी पकड़ और फैसलों की चर्चा अलग स्तर पर होती थी।
बाद में उनका तबादला हो गया और उनकी जगह कई दूसरे साहब आए, लेकिन बात वैसी बन नहीं पाई। डॉक्टर साहब स्वयं दो साल में इस महकमे में चार प्रयोग कर चुके थे। अब आखिरकार पुराने साहब को महकमे की कमान सौंपी गई है। उम्मीद यही है कि साहब अपने काम के दम पर फिर वही पुराना असर दिखाएंगे और महकमे के जरिए प्रदेश को नई रफ्तार देने की कोशिश करेंगे।
भीड़ कहां किसी की होती है नेताजी!
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कहते हैं अभिनेताओं और नेताओं के लिए भीड़ किसी बूस्टर डोज के जैसी होती है। अब देखिए, विपक्ष के एक नेताजी का हाल ही में वीरों की धरा में जोरदार स्वागत हुआ। जेसीबी से फूल बरसाए गए। भीड़ और कार्यकर्ताओं का जोश देखकर नेताजी ने मंच से बड़ा दावा कर दिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में बदलाव की लहर चल पड़ी है और प्रदेश में परिवर्तन की चर्चा अब खुलकर होने लगी है।
हालांकि, उनके इस बयान के बाद सियासी गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। उनके समर्थकों ने ही कहा कि नेताजी ने अति उत्साह में ये बयान दे दिया। वहीं, नेताजी से जलने वाले कहते रहे कि चुनाव में अभी तीन साल हैं। दूर के ढोल तो सुहाने ही लगते हैं।
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