बोल हरि बोल: साहब की मौज पर आयोग ने लगाया ब्रेक, दो मैडमों में कोल्डवॉर और वो खाकी वाले साहब!

मध्य प्रदेश की सत्ता और ब्यूरोक्रेसी के गलियारों में हलचल तेज है। चुनाव आयोग की सख्ती, विंध्य में महिला अफसरों का पुराना विवाद और नेताओं की तुनकमिजाजी ने सियासी पारे को गरमा दिया है। आज के बोल हरि बोल में पढ़िए इन घटनाओं के बारे में विस्तार से...

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Harish Divekar
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bol hari bol 08 february 2026

BHOPAL. सत्ता, सिस्टम और सियासत के गलियारों में जो दिखता है, असली कहानी अक्सर उससे अलग होती है। ऊपर से सब कुछ मैनेज नजर आता है, लेकिन अंदरखाने कई परतों में हलचल चलती रहती है। अब देखिए ना, विंध्य में तैनात दो सीनियर महिला पुलिस अफसरों में कोल्ड वॉर चल रहा है।

यह कभी भी सामने आ सकता है। इधर, चुनाव आयोग ने अफसरों की 'मौज' पर ब्रेक लगा दिया है। उधर, कुछ अफसर चुनावी ड्यूटी को लेकर टेंशन में हैं।

खैर, देश-प्रदेश में खबरें तो और भी बहुत हैं, आप तो सीधे नीचे उतर आईए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।

तुनकमिजाजी से परेशानी!

सत्तारूढ़ दल अपने नेताओं के तेवरों से परेशान है। माननीयों की तुनकमिजाजी बार-बार मुश्किल खड़ी कर रही है। पहले से एक मंत्री जी पर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है, ऐसे में एक और मंत्री जी का वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें वे लाड़ली बहनों को धमकाते हुए नजर आ रहे हैं। यह मामला जैसे ही संगठन तक पहुंचा, तुरंत डैमेज कंट्रोल मोड ऑन हो गया।

ऊपर के आदेश पर मंत्री जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई दी, लेकिन यहीं कहानी में ट्विस्ट आ गया। सफाई देते-देते मंत्री जी ने अफसरों पर भ्रष्टाचार का ठप्पा लगा दिया। बोले, मैंने कई तहसीलदार सस्पेंड कर दिए हैं। रिश्वत लेने वाला जनता का भरोसा तोड़ता है। उनका कहना था कि बेईमानी पद देखकर नहीं बदलती, चाहे मंत्री हो, अफसर हो या कर्मचारी।

साहब का नया अंदाज...

खाकी के गलियारों में एक साहब का नया अंदाज खूब सुर्खियां बटोर रहा है। साहब अब थोड़ा क्रिएटिव मूड में दिख रहे हैं। चर्चा है कि उनकी पहल पर शानदार पॉडकास्ट स्टूडियो तैयार कराया गया है। मजेदार बात यह रही कि उद्घाटन के मौके पर रिबन काटने के बाद साहब खुद ही एंकर की कुर्सी पर बैठ गए और आए हुए अतिथियों के इंटरव्यू लेने लगे।

अफसरों के बीच साहब के नए स्टाइल को लेकर खूब चर्चा है। कुछ लोग इसे आधुनिक सोच बता रहे हैं, तो कुछ इसे इमेज मेकओवर की नई रणनीति मान रहे हैं। वैसे भी साहब पहले से सोशल मीडिया फ्रेंडली हैं। अब पॉडकास्ट वाले इस नए अवतार ने कहानी में नया मसाला डाल दिया है। लोग यह भी कह रहे हैं कि आने वाले समय में साहब और नए प्रयोग करते दिख सकते हैं।

शेयर करो घोटाले के प्रमाण

सूबे की सियासत में बजट सत्र से पहले पारा चढ़ता दिख रहा है। सत्ता और विपक्ष दोनों अपने-अपने तरीके से चालें चल रहे हैं, लेकिन इस बार विपक्ष ने थोड़ा अलग रास्ता चुना है। प्रतिपक्ष ने सीधे जनता से जुड़ने का नया फॉर्मूला निकाला है। उन्होंने एक खास वॉट्सएप नंबर और ई-मेल आईडी जारी कर लोगों से खुलकर बात करने की अपील की है।

सियासी गलियारों में इसे बड़े दांव के तौर पर देखा जा रहा है। चर्चा है कि विपक्ष अब जमीन से सीधे इनपुट जुटाकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। लोगों से कहा गया है कि यदि उनके पास भ्रष्टाचार, माफिया राज, सरकारी लापरवाही या भर्ती घोटालों से जुड़े कोई भी दस्तावेज या सबूत हैं तो वे सीधे शेयर करें। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जनता कितना रिस्पॉन्स देती है और सियासी पिच पर इसका असर कितना बड़ा दिखता है।

दो महिला अफसरों में कोल्डवॉर...

बघेलखंड में पदस्थ दो सीनियर महिला पुलिस अधिकारियों के बीच चल रही खामोश टक्कर चर्चा का विषय बनी हुई है। अंदरखाने से खबर है कि दोनों के बीच कोल्डवॉर अब अपने पीक पर पहुंच गया है और कभी भी खुलकर सामने आ सकता है। सिस्टम से जुड़े लोग भी इस टकराव पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि मामला सिर्फ प्रोफेशनल मतभेद तक सीमित नहीं माना जा रहा।

दोनों महिला अफसरों के बीच यह अदावत नई नहीं, बल्कि एक दशक पुरानी है। तब भी दोनों एक जिले में पदस्थ थीं और हालात इतने बिगड़ गए थे कि बात झूमाझटकी तक पहुंच गई थी। उस पुराने अध्याय के बाद अब फिर दोनों आमने-सामने हैं, जिससे हलचल तेज हो गई है।

मौज पर आयोग का ब्रेक!

देश जैसे-जैसे चुनावी मोड की तरफ बढ़ रहा है, वैसे-वैसे प्रशासनिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। पांच राज्यों में प्रस्तावित चुनावों को लेकर इलेक्शन कमीशन अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। हाल ही में देशभर के ऑब्जर्वर बनाए गए अफसरों की दिल्ली में बड़ी बैठक हुई है। इसमें मध्यप्रदेश के भी 55 अफसर शामिल हुए।

इस बैठक की सबसे ज्यादा चर्चा इसकी सख्त हिदायतों को लेकर हो रही है। दरअसल, आयोग तक लगातार शिकायतें पहुंच रही थीं कि कुछ अफसर चुनावी राज्यों में ऑब्जर्वर बनकर जाते हैं और साथ में परिवार या खास लोगों को भी ले जाते हैं। वहां शॉपिंग, पार्टियों और दूसरी मौज-मस्ती होती है।

इन सबका हजारों लाखों रुपए का बिल आखिर में स्थानीय तहसीलदार और पटवारियों पर डाल दिया जाता था। अब आयोग ने सख्त हिदायत दी है कि यह सब बिल्कुल नहीं चलेगा। अफसर परिवार को साथ नहीं ले जा सकेंगे। शॉपिंग और पार्टी कल्चर पर भी ब्रेक रहेगा। साथ ही रिपोर्टिंग रोजाना करनी होगी।

चुनावी ड्यूटी और टेंशन

चुनावी सीजन करीब आते ही इलेक्शन कमीशन फुल तैयारी मोड में आ गया है। देशभर में अफसरों की ट्रेनिंग चल रही है, ड्यूटी चार्ट तैयार हो रहे हैं और हर स्तर पर ब्रीफिंग का दौर जारी है। इन सबके बीच एक खास चर्चा अफसरों के बीच तेजी से तैर रही है। बताया जा रहा है कि आयोग ने इस बार के चुनाव में कुछ जगहों पर तनाव व संभावित हिंसा की आशंका जताई है और अधिकारियों को अलर्ट रहने की सख्त हिदायत दी है।

बस, इसी चेतावनी के बाद कई अफसरों के बीच यह चर्चा है कि उनकी ड्यूटी कहीं ऐसे राज्यों में न लग जाए, जहां चुनाव के दौरान हालात ज्यादा तनावपूर्ण रहते हैं। खासतौर पर पश्चिम बंगाल का नाम बातचीत में सबसे ज्यादा लिया जा रहा है, जहां चुनावी माहौल अक्सर गर्म माना जाता है। अंदरखाने खबर है कि कुछ आईएएस अधिकारियों में वहां पोस्टिंग को लेकर हल्की टेंशन भी बनी हुई है।

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